संस्कृत
यत्तदग्रे विषमिव परिणामेऽमृतोपमम् । तत्सुखं सात्त्विकं प्रोक्तमात्मबुद्धिप्रसादजम् ॥ ३७ ॥
yat tad agre viṣam iva pariṇāme'mṛtopamam tat sukhaṃ sāttvikaṃ proktam ātmabuddhiprasādajam
अनुवाद
जो सुख आरम्भ में विष के समान लगता है, किन्तु परिणाम में अमृत के समान होता है, जो अपनी बुद्धि की प्रसन्नता से उत्पन्न होता है, वह सुख सात्त्विक कहा गया है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
कृष्ण एक बिंब के माध्यम से ‘पहले कीमत, बाद में फल’ वाली इस संरचना को स्पष्ट कर देते हैं: सात्त्विक सुख आरम्भ में विष जैसा और अन्त में अमृत जैसा लगता है, और वह आत्मज्ञान की निर्मलता (प्रसाद, यानी स्वच्छ स्पष्टता) से उत्पन्न होता है। पहले विष, फिर अमृत — यह क्रम गुणों के वर्गीकरण की पूरी परियोजना का सबसे स्पष्ट एकल रूपक है, और यह ठीक अगले श्लोक में राजसिक सुख को मिलने वाले क्रम को सीधे उलट देता है। सात्त्विक सुख: विषम् इव अग्रे, अमृतोपमम् परिणामे — पहले विष, बाद में अमृत। अनुशासन आरम्भ में अप्रिय होता है; उससे मिलने वाला आनन्द, आत्म-बुद्धि-प्रसाद-ज, “मन के अपने निर्मल होने से उत्पन्न”, टिकाऊ होता है। गीता 18.38 इस वक्र को उलट देता है। इसका गुण सत्त्व है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- yat tad agreयत् तद् अग्रे
- जो आरम्भ में (yat + tat + agre)
- viṣam iva pariṇāme'mṛtopamamविषं इव परिणामेऽमृतोपमं
- विष के समान, पर परिणाम में अमृत के समान (viṣam + iva + pariṇāme + amṛta-upamam)
- tat sukhaṃ sāttvikaṃ proktamतत् सुखं सात्त्विकं प्रोक्तं
- वह सुख सात्त्विक कहा गया है (tat + sukham + sāttvikam + proktam)
- ātmabuddhiprasādajamआत्मबुद्धिप्रसादजं
- अपनी बुद्धि की प्रसन्नता से उत्पन्न (ātma-buddhi-prasāda-jam)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Notice what this verse doesn’t offer as the test: it never asks what a pleasure feels like right now. A sattvic pleasure can taste exactly like poison in this exact moment, indistinguishable at the snapshot level from something genuinely harmful — the only test on offer is trajectory, whether the arc bends toward nectar or away from it, which means a single moment tells you nothing about a pleasure’s guna.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- कोई कठिन अभ्यास, थेरेपी, कोई नया अनुशासन या कोई असुविधाजनक आदत आपके लिए अच्छी है या नहीं, इसका निर्णय इस बात से न करें कि ठीक इसी क्षण वह कैसी लगती है; शुरुआत की वही असुविधा दोनों में से किसी भी परिणाम के साथ मेल खा सकती है। उसे आज के स्वाद से नहीं, महीनों में बनने वाली उसकी दिशा से परखें।
व्यावसायिक
- कोई कठिन पहल, जो अपने शुरुआती हफ़्तों में कष्टदायक लगती है, अपने-आप ही गलत निर्णय नहीं हो जाती — इस श्लोक की कसौटी दिशा है, आरंभ की अनुभूति नहीं। केवल शुरुआत के आधार पर कोई निष्कर्ष निकालने से पहले, उचित अवधि तक उसकी दिशा पर नज़र रखें।
परिवार और समाज
- कोई कठिन बातचीत या किसी रिश्ते का कोई कठिन दौर, जो अभी बुरा लग रहा है, अपने-आप में यह नहीं बताता कि उसे जारी रखना सार्थक है या नहीं — यह देखें कि वह वास्तव में किस ओर जा रहा है, केवल यह नहीं कि उसके बीच में रहते हुए वह कैसा लगता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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