संस्कृत
न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः । न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम् ॥
na tv evāhaṃ jātu nāsaṃ na tvaṃ neme janādhipāḥ na caiva na bhaviṣyāmaḥ sarve vayam ataḥ param
अनुवाद
ऐसा कभी नहीं था कि मैं न रहा होऊँ, या तुम न रहे हो, या ये राजा न रहे हों; और न ऐसा ही होगा कि इसके बाद हम सब न रहें।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
कृष्ण इस दावे को काल से परे रखते हैं, केवल इस जीवन तक सीमित नहीं: वे स्वयं, अर्जुन और वहाँ उपस्थित सभी लोग सदा से विद्यमान रहे हैं और कभी भी अस्तित्व में रहना नहीं छोड़ेंगे। यह पुनर्जन्म के बारे में बाद में जोड़ी गई कोई बात नहीं है। इसे आत्मस्वरूप के विषय में एक मूल तथ्य के रूप में कहा गया है, जो पीछे की ओर भी और आगे की ओर भी बिना किसी सीमा के फैला हुआ है। व्याकरण की दृष्टि से यह दोहरे निषेधों की एक शृंखला है, “ऐसा कभी नहीं था कि मैं नहीं था”। यह स्थायित्व के सीधे कथन से अधिक प्रबल है, क्योंकि यह न-होने के किसी एक क्षण की संभावना को भी समाप्त कर देता है। यह आत्मा की शिक्षा का पहला सकारात्मक कथन है, और यह शिक्षा गीता 2.30 तक चलती है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- na tv evāhaṃन त्व् एवाहं
- ऐसा नहीं कि मैं (na + tu + eva + aham)
- jātuजातु
- किसी भी समय
- nāsaṃनासं
- नहीं था (na + āsam)
- na tvaṃन त्वं
- न तुम (na + tvam)
- neme janādhipāḥनेमे जनाधिपाः
- न ये राजा लोग (na + ime + jana-adhipāḥ)
- na caiva na bhaviṣyāmaḥन चैव न भविष्यामः
- और न ऐसा कि हम नहीं रहेंगे (na + ca + eva + na + bhaviṣyāmaḥ)
- sarveसर्वे
- सब
- vayamवयं
- हम
- ataḥ paramअतः परं
- इसके बाद (ataḥ + param)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Krishna could have stated this as a pure abstraction — “the self is eternal” — but instead he names three concrete parties: himself, Arjuna, and the kings assembled on the field. The metaphysics arrives already anchored to the specific people in the specific crisis, which is exactly what makes it usable rather than merely true — Arjuna doesn’t have to translate a general principle into his particular grief, Krishna has already done that translation for him.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप किसी सामान्य सत्य को आत्मसात करने का प्रयास कर रहे हों — कि असफलताएँ बीत जाती हैं, कि भय चीज़ों को विकृत कर देता है — तो उसे अमूर्त न छोड़ें; उसे अपनी वास्तविक, ठोस परिस्थिति के सामने रखकर नाम दें, जैसे यह श्लोक कृष्ण, अर्जुन और वहाँ एकत्र राजाओं का नाम लेकर उल्लेख करता है। अमूर्त बातें मन को कायल करती हैं; ठोस बातें भीतर तक झकझोर देती हैं।
व्यावसायिक
- जब आप अपनी टीम को कोई सामान्य सिद्धांत समझाएँ, तो उसे नीति के रूप में छोड़ देने के बजाय तुरंत उनकी वास्तविक वर्तमान परिस्थिति से जोड़ें — अमूर्त रूप में कहे गए सिद्धांत पर लोग बस सिर हिला देते हैं; वही सिद्धांत जब उनके विशेष मामले पर लागू किया जाता है, तो उसे काम में लाया जाता है।
परिवार और समाज
- जब आप चाहते हैं कि कोई सामान्य सत्य आपके किसी प्रियजन के मन तक सचमुच पहुँचे, तो उसे सामान्य छोड़ देने के बजाय नाम लेकर उनकी विशेष परिस्थिति पर लागू करें — "यह हमेशा बीत जाता है" का असर "यह झगड़ा, यही वाला, बीत जाएगा" से अलग होता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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