संस्कृत
अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च । नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः ॥
acchedyo'yam adāhyo'yam akledyo'śoṣya eva ca nityaḥ sarvagataḥ sthāṇur acalo'yaṃ sanātanaḥ
अनुवाद
यह आत्मा काटा नहीं जा सकता, यह जलाया नहीं जा सकता, न इसे भिगोया जा सकता है और न ही सुखाया जा सकता है। यह नित्य, सर्वव्यापी, स्थिर, अचल और सनातन है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यह श्लोक 23वें श्लोक की चौगुनी अभेद्यता (न काटा जा सकने वाला, न जलाया जा सकने वाला, न भिगोया जा सकने वाला, न सुखाया जा सकने वाला) को विशेषणों के रूप में दोहराता है, फिर विशेषणों का एक दूसरा समूह जोड़ता है — नित्य, सर्वव्यापी, स्थिर, अचल, सनातन। यह दोहराव जान-बूझकर है: यह कोई नया तर्क कम और आग्रह अधिक है, जिसमें लगभग समानार्थी शब्दों का ढेर लगाया जाता है, जब तक कि अविनाशिता का दावा बिल्कुल स्पष्ट न हो जाए। सर्वगत — “सब जगह गया हुआ”, सर्वत्र विद्यमान — इस सूची का एकमात्र सचमुच नया शब्द है, और यह चुपचाप आत्मा का दायरा बढ़ा देता है: शरीर के भीतर रहने वाली किसी वस्तु से, ऐसी वस्तु तक जिसके भीतर शरीर है। अध्याय 13 की क्षेत्रज्ञ संबंधी शिक्षा इसी सूत्र को फिर से उठाती है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- acchedyo'yamअच्छेद्योऽयं
- यह काटा नहीं जा सकता (acchedyaḥ + ayam)
- adāhyo'yamअदाह्योऽयं
- यह जलाया नहीं जा सकता (adāhyaḥ + ayam)
- akledyo'śoṣya eva caअक्लेद्योऽशोष्य एव च
- न भिगोया जा सकता है और न ही सुखाया जा सकता है (akledyaḥ + aśoṣyaḥ + eva + ca)
- nityaḥनित्यः
- नित्य
- sarvagataḥसर्वगतः
- सर्वव्यापी (sarva-gataḥ)
- sthāṇurस्थाणुः
- स्थिर
- acalo'yaṃअचलोऽयं
- यह अचल (acalaḥ + ayam)
- sanātanaḥसनातनः
- सनातन
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
This verse closes on “sanātanaḥ” — ancient, perennial, the same root later traditions would use for the phrase “eternal law.” After two verses of piling up near-synonymous immunities, the argument’s most sustained block of pure assertion ends not on a new claim but on the oldest-sounding word in it, as if the emphasis itself is meant to convey permanence rather than add information.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आपको किसी बात का यकीन सिर्फ़ बौद्धिक रूप से नहीं, बल्कि भीतर गहराई तक दिलाना हो, तब अलग-अलग शब्दों में दोहराना वह काम कर सकता है जो एक अकेला सटीक कथन नहीं कर पाता — यह श्लोक अपनी अंतिम पंक्तियों में कोई नई बात नहीं जोड़ रहा, बल्कि ज़ोर को ही यकीन दिलाने का काम करने दे रहा है।
व्यावसायिक
- जब किसी अहम संदेश को टीम के मन में सचमुच उतारना हो, न कि बस एक बार तकनीकी रूप से कह देना हो, तो उसे कई अलग-अलग ढंग से दोबारा कहने से न झिझकें, भले ही उसमें कुछ नया न हो — दोहराव ऐसा विश्वास जगाता है जो एक अकेला सटीक वाक्य अक्सर नहीं जगा पाता।
परिवार और समाज
- जब आप चाहते हैं कि आपका कोई करीबी सचमुच महसूस करे कि आप जो कह रहे हैं वह दिल से कह रहे हैं, तो उसे एक बार सटीकता से कह देना कभी-कभी काफ़ी नहीं होता — उसे कुछ अलग-अलग तरीकों से दोहराना, भले ही कोई नई जानकारी न हो, वही चीज़ हो सकती है जिससे बात सचमुच दिल तक पहुँचे।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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