2.4

संस्कृत

कथं भीष्ममहं सङ्ख्ये द्रोणं च मधुसूदन । इषुभिः प्रतियोत्स्यामि पूजार्हावरिसूदन ॥

kathaṃ bhīṣmam ahaṃ saṅkhye droṇaṃ ca madhusūdana iṣubhiḥ pratiyotsyāmi pūjārhāv arisūdana

अनुवाद

अर्जुन बोले — हे मधुसूदन, मैं युद्धभूमि में भीष्म और द्रोण के विरुद्ध बाणों से कैसे लड़ूँगा? हे अरिसूदन, वे दोनों तो पूजा के योग्य हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

अर्जुन का पहला उत्तर कड़ा प्रतिवाद करता है: वह भीष्म और द्रोण पर बाण कैसे चला सकता है — अपने पितामह और अपने गुरु पर, जिनके प्रति वह आदर का ऋणी है — केवल इसलिए कि कृष्ण इसे कायरता कहते हैं? यह आपत्ति ठोस और व्यक्तिगत है, अमूर्त नहीं: ये विशेष व्यक्ति हैं, और वह उनके प्रति किस बात का ऋणी है, यही वह प्रश्न है जिसका उत्तर अध्याय की कर्तव्य संबंधी आगे की शिक्षा को देना होगा।

यह दायित्वों का वास्तविक टकराव है — बड़ों के प्रति देय आदर बनाम योद्धा का स्वधर्म — और अर्जुन का यह कहना सही है कि यह टकराव वास्तविक है। गीता 2.31–गीता 2.33 में कृष्ण का उत्तर इस कीमत को नकारता नहीं; वह यह तर्क देता है कि बड़ी कीमत दूसरी ओर है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

kathaṃकथं
कैसे
bhīṣmamभीष्मं
भीष्म को
ahaṃअहं
मैं
saṅkhyeसङ्ख्ये
युद्ध में
droṇaṃद्रोणं
द्रोण को
caच
और
madhusūdanaमधुसूदन
हे मधुसूदन
iṣubhiḥइषुभिः
बाणों से
pratiyotsyāmiप्रतियोत्स्यामि
सामने होकर लड़ूँगा
pūjārhāvपूजार्हाव्
दोनों पूजनीय (pūjā-arhau)
arisūdanaअरिसूदन
हे शत्रुओं का नाश करने वाले

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Arjuna’s objection is deliberately specific — not “killing is wrong” in the abstract but “Bhishma and Drona, by name, people I owe reverence to.” Krishna’s coming argument will answer in the opposite register, at the level of the self’s nature in general — and part of what makes the middle of this chapter difficult is that a concrete, personal objection is being met with an impersonal, universal answer.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप कोई आपत्ति उठाएँ, तो ध्यान दें कि आप किसी विशिष्ट, निजी सरोकार के आधार पर तर्क कर रहे हैं या किसी सामान्य सिद्धांत के आधार पर — और यदि कोई आपको गलत स्तर पर उत्तर दे (जब आपका आशय ठोस बात से था, तब वह अमूर्त उत्तर दे), तो यह बात कह दें, बजाय इसके कि यह बेमेल बिना ध्यान दिए निकल जाए।

व्यावसायिक

  • जब कोई हितधारक किसी निर्णय पर आपत्ति करते हुए उससे प्रभावित विशिष्ट लोगों या संबंधों का नाम ले, तो केवल सामान्य नीति के सहारे उत्तर न दें — एक ठोस, निजी आपत्ति इस योग्य है कि सिद्धांत की व्यापक बात पर जाने से पहले उसे कम से कम आंशिक रूप से उसी स्तर पर स्वीकार किया जाए।

परिवार और समाज

  • यदि आपका कोई प्रियजन कोई विशिष्ट, निजी चिंता प्रकट करे, तो केवल किसी सामान्य सिद्धांत से उत्तर देने के मोह से बचें — बातचीत को व्यापक बनाने से पहले उस ठोस चिंता को उसी स्तर पर संबोधित करें जिस स्तर पर वह उठाई गई थी।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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