संस्कृत
एवमुक्त्वा ततो राजन् महायोगेश्वरो हरिः । दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम् ॥
evam uktvā tato rājan mahāyogeśvaro hariḥ darśayāmāsa pārthāya paramaṃ rūpam aiśvaram
अनुवाद
हे राजन्, ऐसा कहकर महान योगेश्वर हरि ने तब पार्थ को अपना परम ऐश्वर्यमय रूप दिखाया।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
कथा का ढाँचा फिर से सामने आ जाता है: यह संजय हैं, जो अंधे राजा धृतराष्ट्र से बात कर रहे हैं और उन्हें दी गई दिव्य दृष्टि से युद्धभूमि पर जो देख रहे हैं, उसका वृत्तान्त सुना रहे हैं। दर्शन के भीतर रहते हुए यह भूल जाना आसान है कि यहाँ “असंभव दृष्टि” के दो कार्य एक के ऊपर एक रखे हुए हैं — युद्धभूमि पर अर्जुन की दिव्य दृष्टि, और कथावाचक के रूप में संजय की दृष्टि, जो यह सब, श्लोक-दर-श्लोक, एक ऐसे राजा तक पहुँचा रही है जो स्वयं इसमें से कुछ भी नहीं देख सकता। “राजन्” (हे राजन्) एक छोटा, पर सधा हुआ स्मरण है कि यह वृत्तान्त वास्तव में कौन सुन रहा है। “हे राजन्” (राजन्) संजय का यह स्मरण है कि वास्तव में कौन सुन रहा है: यहाँ असंभव दृष्टि के दो कार्य एक के ऊपर एक रखे हैं — युद्धभूमि पर अर्जुन की दिव्य दृष्टि, और कथावाचक के रूप में संजय की दृष्टि, जो यह सब एक अंधे राजा तक पहुँचाती है (गीता 1.1 का ढाँचा)।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- evam uktvā tato rājanएवं उक्त्वा ततो राजन्
- ऐसा कहकर, फिर, हे राजन् (evam + uktvā + tataḥ + rājan)
- mahāyogeśvaro hariḥमहायोगेश्वरो हरिः
- महान योगेश्वर हरि (mahā-yoga-īśvaraḥ + hariḥ)
- darśayāmāsa pārthāyaदर्शयामास पार्थाय
- पार्थ को दिखाया (darśayāmāsa + pārthāya)
- paramaṃ rūpam aiśvaramपरमं रूपं ऐश्वरं
- परम ऐश्वर्यमय रूप (paramam + rūpam + aiśvaram)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
The narrative frame doesn’t get reasserted randomly — it happens at the exact hinge where the description is about to become the hardest thing in the poem to follow. Right before language has to strain to hold what’s coming, Sanjaya re-anchors the reader in a simple, stable fact: this is a report, made to a king, by someone who can see what the king cannot. When content is about to get disorienting, restating who is speaking to whom first is its own kind of preparation.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- कोई ऐसी बात कहने से पहले जो सुनने वाले को विचलित कर दे या जिसे समझ पाना कठिन हो, उसे पहले स्थिति के सीधे-सादे तथ्यों पर टिकाएँ — कौन उसे क्या बता रहा है, और क्यों — ताकि बात कठिन होने से पहले ढाँचा स्थिर रहे।
व्यावसायिक
- नेतृत्व के सामने कोई जटिल या चिंताजनक निष्कर्ष रखने से पहले, रिपोर्टिंग की कड़ी और संदर्भ को सीधे शब्दों में फिर से बताएँ — विश्लेषण किसने किया, उनके पास किन जानकारियों तक पहुँच थी — ताकि कठिन बात सामने आने पर भी ढाँचा स्थिर बना रहे।
परिवार और समाज
- जब आप परिवार के साथ कोई भावनात्मक रूप से भारी बात साझा करने वाले हों, तो कठिन बात आने से पहले उन्हें अपने रिश्ते और अपने इरादे के सीधे तथ्यों पर टिकाएँ — स्थिर ढाँचा कठिन समाचार को स्वीकार करना आसान बना देता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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