11.17

संस्कृत

किरीटिनं गदिनं चक्रिणं च तेजोराशिं सर्वतो दीप्तिमन्तम् । पश्यामि त्वां दुर्निरीक्ष्यं समन्ताद् दीप्तानलार्कद्युतिमप्रमेयम् ॥

kirīṭinaṃ gadinaṃ cakriṇaṃ ca tejorāśiṃ sarvato dīptimantam paśyāmi tvāṃ durnirīkṣyaṃ samantād dīptānalārkadyutim aprameyam

अनुवाद

मैं आपको मुकुट, गदा और चक्र धारण किए हुए देखता हूँ। आप तेज के पुंज हैं, सब ओर से दीप्तिमान हैं, प्रज्वलित अग्नि और सूर्य के समान आपकी कान्ति है, चारों ओर से आपको देख पाना कठिन है और आप अप्रमेय हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

“दुर्निरीक्ष्यम्” — जिसे देख पाना कठिन हो, जो आँखों को पीड़ा दे — यही यहाँ का निर्णायक शब्द है, और यह एक सटीक भौतिक दावा है, कोई अलंकार नहीं: यह ऐसे प्रकाश-स्रोत का वर्णन है जो इतना तेज़ है कि उसे देखने वाली आँख को ही चोट पहुँचा दे, और एक ही साँस में उसकी तुलना अग्नि और सूर्य से की गई है। पहचानी जाने वाली प्रतिमा-परम्परा (गदा, चक्र, मुकुट — विष्णु की मूर्तियों के मानक चिह्न) अब भी मौजूद है, पर उसे इतना बढ़ा दिया गया है कि उसे देखना सहज नहीं रह जाता, और ठीक यही अर्जुन की वह शिकायत है जो आगे के श्लोकों में बढ़ती जाती है। दुर्निरीक्ष्यम् — “जिसे देखना कठिन हो, जो आँखों को पीड़ा दे” — एक भौतिक दावा है, कोई अलंकार नहीं: ऐसा प्रकाश-स्रोत जो आँख को चोट पहुँचाने जितना तेज़ हो। विष्णु की मानक प्रतिमा-परम्परा (गदा, चक्र, मुकुट) मौजूद है, पर उसे सहज सीमा से परे बढ़ा दिया गया है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

kirīṭinaṃ gadinaṃ cakriṇaṃ caकिरीटिनं गदिनं चक्रिणं च
मुकुटधारी, गदाधारी और चक्रधारी (kirīṭinam + gadinam + cakriṇam + ca)
tejorāśiṃ sarvato dīptimantamतेजोराशिं सर्वतो दीप्तिमन्तं
तेज के पुंज, सब ओर से दीप्तिमान (tejaḥ-rāśim + sarvataḥ + dīpti-mantam)
paśyāmi tvāṃ durnirīkṣyaṃ samantādपश्यामि त्वां दुर्निरीक्ष्यं समन्ताद्
मैं आपको देखता हूँ, जिन्हें चारों ओर से देख पाना कठिन है (paśyāmi + tvām + durnirīkṣyam + samantāt)
dīptānalārkadyutim aprameyamदीप्तानलार्कद्युतिं अप्रमेयं
प्रज्वलित अग्नि और सूर्य जैसी कांति वाले, अप्रमेय (dīpta-anala-arka-dyutim + aprameyam)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Up to now the description has mostly stayed on the object — how many arms, how many mouths. “Durnirīkṣyam” shifts the description onto what happens to the observer instead: not just how vast the form is, but that looking at it causes pain. That’s a meaningful transition — the vision stops being described purely in its own terms and starts being measured by its effect on the one perceiving it, which is exactly the axis the rest of Arjuna’s speech will run on.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप यह बताने की कोशिश कर रहे हों कि किसी चीज़ ने आप पर कितना असर डाला, तो केवल उस चीज़ का वर्णन न करें — यह बताएँ कि उसके संपर्क में आते ही उसने आपके साथ क्या किया; अकेले वस्तु के किसी भी वर्णन की तुलना में आप पर पड़ा प्रभाव अक्सर उसकी विशालता का अधिक सच्चा माप होता है।

व्यावसायिक

  • किसी घटना की गंभीरता की रिपोर्ट करते समय केवल तकनीकी खराबी का पैमाना ही नहीं, बल्कि उन लोगों और प्रणालियों पर उसका मापा गया प्रभाव भी शामिल करें जिनका उससे सामना हुआ — देखने वाले पर पड़ा प्रभाव अक्सर कच्चे परिमाण की तुलना में निर्णय के लिए अधिक प्रासंगिक आँकड़ा होता है।

परिवार और समाज

  • किसी को यह समझाते समय कि कोई अनुभव आपके लिए इतना मायने क्यों रखता था, यह बताएँ कि उसने आपके साथ क्या किया, न कि केवल यह कि वह अनुभव वस्तुतः क्या था — आप पर पड़ा प्रभाव ही अक्सर वह है जो वास्तव में उसके महत्व को व्यक्त करता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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