11.6

संस्कृत

पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्विनौ मरुतस्तथा । बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत ॥

paśyādityān vasūn rudrān aśvinau marutas tathā bahūny adṛṣṭapūrvāṇi paśyāścaryāṇi bhārata

अनुवाद

हे भारत, आदित्यों, वसुओं, रुद्रों, दोनों अश्विनीकुमारों और मरुतों को भी देखो; और ऐसे अनेक आश्चर्य देखो जो पहले कभी नहीं देखे गए।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

आज्ञार्थक “पश्य” (देखो) इस एक ही श्लोक में तीन बार दोहराया गया है — यह आलंकारिक ढोल की ऐसी थाप है जो पूरे दर्शन में बार-बार लौटती रहेगी। विषय-वस्तु वैदिक देवमण्डल की नामावली है (आदित्य, वसु, रुद्र, अश्विनीकुमार, मरुत्) — मुद्दा यह विशेष गणना उतनी नहीं है, जितना उसके नीचे छिपा दावा: हर वह देवता जिसका नाम लेना अर्जुन पहले से जानता है, उसी व्यक्ति के भीतर समाया हुआ निकलने वाला है जिससे वह अब तक बात करता रहा है। पश्य — “देखो” — इस एक श्लोक में तीन बार ढोल की थाप की तरह गूँजता है, और पूरे दर्शन में बार-बार लौटता रहेगा। देवताओं की नामावली (अध्याय 10 की विभूति) अब केवल प्रतिनिधित्व करती हुई नहीं, बल्कि समाई हुई दिखाई गई है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

paśyādityān vasūn rudrānपश्यादित्यान् वसून् रुद्रान्
आदित्यों, वसुओं और रुद्रों को देखो (paśya + ādityān + vasūn + rudrān)
aśvinau marutas tathāअश्विनौ मरुतस् तथा
दोनों अश्विनीकुमारों और मरुतों को भी (aśvinau + marutaḥ + tathā)
bahūny adṛṣṭapūrvāṇiबहून्य् अदृष्टपूर्वाणि
पहले कभी न देखी गई अनेक वस्तुएँ (bahūni + adṛṣṭa-pūrvāṇi)
paśyāścaryāṇi bhārataपश्याश्चर्याणि भारत
उन आश्चर्यों को देखो, हे भारत (paśya + āścaryāṇi + bhārata)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Notice the order of disclosure: Krishna starts the roll call with beings Arjuna can already name — Âdityas, Vasus, Rudras, deities he’s grown up worshipping — before the description tips, a few verses later, into forms with no name at all. The vision doesn’t open with the unprecedented; it opens with the familiar and only then escalates past it, which is what makes the later strangeness legible as escalation rather than a completely alien opening.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आपको किसी को सचमुच अभिभूत कर देने वाली किसी चीज़ से परिचित कराना हो, तो उससे शुरू करें जिसे वे पहले से पहचान सकते हैं, और अपरिचित हिस्सों को उस आधार के जम जाने के बाद आने दें — सबसे अजीब हिस्से से शुरू करने पर उसके बाद आने वाली किसी भी बात को समझ में बिठाना और कठिन हो जाता है।

व्यावसायिक

  • जब आप कोई ऐसी व्यवस्था लागू कर रहे हों जो आगे चलकर आपकी टीम की जानी-पहचानी चीज़ों से बहुत अलग दिखेगी, तो उसके पहले रूप को उन्हीं श्रेणियों के सहारे प्रस्तुत करें जिनका वे पहले से उपयोग करते हैं, और सचमुच नई अवधारणाएँ तभी सामने लाएँ जब वह परिचित ज़मीन उनके पैरों तले आ चुकी हो।

परिवार और समाज

  • परिवार को कोई कठिन समाचार देते समय, उससे शुरू करें जो वे स्थिति के बारे में पहले से समझते हैं, और उसके बाद वे हिस्से जोड़ें जिन्हें स्वीकार करना सबसे कठिन होगा — पहले परिचित ज़मीन होने से बात का बढ़ता बोझ उन्हें भटकाने के बजाय सहने योग्य बन जाता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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