11.31

संस्कृत

आख्याहि मे को भवानुग्ररूपो नमोऽस्तु ते देववर प्रसीद । विज्ञातुमिच्छामि भवन्तमाद्यम् न हि प्रजानामि तव प्रवृत्तिम् ॥

ākhyāhi me ko bhavān ugrarūpo namo'stu te devavara prasīda vijñātum icchāmi bhavantam ādyaṃ na hi prajānāmi tava pravṛttim

अनुवाद

मुझे बताइए, उग्र रूप वाले आप कौन हैं? हे देवश्रेष्ठ, आपको नमस्कार है, प्रसन्न होइए। आप आदिपुरुष को मैं जानना चाहता हूँ, क्योंकि मैं आपकी प्रवृत्ति को नहीं समझ पा रहा हूँ।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

शुद्ध वर्णन के सोलह श्लोक (15 से 30 तक) अंततः एक सीधे प्रश्न तक पहुँचते हैं — “आख्याहि मे को भवान्”, मुझे बताइए कि आप कौन हैं। यह एक चौंकाने वाली स्वीकारोक्ति है: अर्जुन इस पूरे समय एक अभिभूत कर देने वाले दर्शन का सटीक और सजीव विस्तार से वर्णन करते रहे हैं, पर वास्तव में यह जाने बिना कि वे देख क्या रहे हैं। इस अनुरोध का उत्तर तुरंत मिलता है, और उस पहेली जैसी शैली के बिना जिसे गीता कभी-कभी अपनाती है — अगले ही श्लोक में कृष्ण का उत्तर उतना ही सीधा है जितना यह प्रश्न। सजीव वर्णन के सोलह श्लोक, और अर्जुन अब भी नहीं जानते कि वे क्या देख रहे हैं — आख्याहि मे को भवान्, “मुझे बताइए कि आप कौन हैं।” उत्तर अगले ही श्लोक में आता है, उतना ही सीधा जितना प्रश्न।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

ākhyāhi me ko bhavān ugrarūpoआख्याहि मे को भवान् उग्ररूपो
मुझे बताइए कि उग्र रूप वाले आप कौन हैं (ākhyāhi + me + kaḥ + bhavān + ugra-rūpaḥ)
namo'stu te devavara prasīdaनमोऽस्तु ते देववर प्रसीद
हे देवश्रेष्ठ, आपको नमस्कार है, प्रसन्न होइए (namaḥ + astu + te + deva-vara + prasīda)
vijñātum icchāmi bhavantam ādyaṃविज्ञातुं इच्छामि भवन्तं आद्यं
आप आदिपुरुष को मैं जानना चाहता हूँ (vijñātum + icchāmi + bhavantam + ādyam)
na hi prajānāmi tava pravṛttimन हि प्रजानामि तव प्रवृत्तिं
क्योंकि मैं आपकी प्रवृत्ति को नहीं समझ पाता (na + hi + prajānāmi + tava + pravṛttim)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

It would have been easy for Arjuna to keep performing comprehension — his description in verses 15 through 30 is detailed enough to sound like understanding. Instead he explicitly names the gap: he has been looking without knowing. The question costs him nothing rhetorically because the text has already shown, at length, that his ignorance was never a failure of attention.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • किसी स्थिति का विस्तृत और सुस्पष्ट वर्णन कर देना उसे समझ लेने के बराबर नहीं है — आप किसी चीज़ का ठीक-ठीक बयान कर सकते हैं और फिर भी यह न जानें कि वह है क्या। इस अंतर को खुलकर स्वीकार कर लेना, जैसा अर्जुन यहाँ करते हैं, यह इस दिखावे से कहीं बेहतर है कि सारे ब्योरे जुड़कर पहले ही समझ बन चुके हैं।

व्यावसायिक

  • किसी मीटिंग में पूरी और बारीकी से देखी-परखी प्रगति-रिपोर्ट दे देने का अर्थ यह नहीं कि आपने समस्या का सचमुच निदान कर लिया है — अगर आप अभी तक नहीं जानते कि जिसका आप वर्णन कर रहे हैं उसके पीछे क्या है, तो साफ़-साफ़ यही कहें, बजाय इसके कि धाराप्रवाह ब्योरे को उस निष्कर्ष की जगह ले लेने दें जिस तक आप पहुँचे ही नहीं हैं।

परिवार और समाज

  • आप किसी प्रियजन के व्यवहार का वर्षों तक सजीव और सटीक वर्णन कर सकते हैं, बिना कभी यह पूछे कि उसके पीछे असल में क्या है — ईमानदार कदम, जैसा अर्जुन यहाँ उठाते हैं, यह है कि इस अंतर को स्वीकार करें और सीधे पूछें, न कि समझ की जगह और अधिक अवलोकन रख दें।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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