11.21

संस्कृत

अमी हि त्वां सुरसङ्घा विशन्ति केचिद्भीताः प्राञ्जलयो गृणन्ति । स्वस्तीत्युक्त्वा महर्षिसिद्धसङ्घाः स्तुवन्ति त्वां स्तुतिभिः पुष्कलाभिः ॥

amī hi tvāṃ surasaṅghā viśanti kecid bhītāḥ prāñjalayo gṛṇanti svastīty uktvā maharṣisiddhasaṅghāḥ stuvanti tvāṃ stutibhiḥ puṣkalābhiḥ

अनुवाद

ये देवताओं के समूह आपमें ही प्रवेश कर रहे हैं; कुछ भयभीत होकर हाथ जोड़े आपका गुणगान कर रहे हैं। महर्षियों और सिद्धों के समूह "कल्याण हो" कहकर प्रचुर स्तुतियों से आपकी स्तुति कर रहे हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

ध्यान देने योग्य बात: यह श्लोक देवताओं और ऋषियों को उस रूप में प्रवेश करते और उसकी स्तुति करते हुए दिखाता है, और उनमें से कुछ स्पष्ट रूप से “भीताः” हैं, यानी डरे हुए, जबकि वे उपासना कर रहे हैं। इस अध्याय में श्रद्धा-भरा आदर और भय क्रम से आने वाली प्रतिक्रियाएँ नहीं हैं, कि पहले एक हो और फिर दूसरी — उन्हें एक साथ दिखाया गया है, वही समूह एक ही समय में दोनों कर रहा है। पूरा दर्शन इसी भावनात्मक स्वर में चलता है, और यह जल्द ही अक्षरशः सच होने वाला है: श्लोक 26-29 दिखाएँगे कि योद्धा इन्हीं मुखों में स्तुति करने के लिए नहीं, बल्कि निगले जाने के लिए प्रवेश कर रहे हैं। देवता डरते हुए उपासना करते हैं — भीताः, यानी भयभीत, स्तुति वाले ही वाक्यांश में। यहाँ आदर और भय एक साथ हैं, एक के बाद एक नहीं, और गीता 11.26–गीता 11.29 निगले जाने को अक्षरशः सच कर दिखाते हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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शब्द-दर-शब्द

amī hi tvāṃ surasaṅghā viśantiअमी हि त्वां सुरसङ्घा विशन्ति
ये देवताओं के समूह आपमें प्रवेश कर रहे हैं (amī + hi + tvām + sura-saṅghāḥ + viśanti)
kecid bhītāḥ prāñjalayo gṛṇantiकेचिद् भीताः प्राञ्जलयो गृणन्ति
कुछ भयभीत होकर हाथ जोड़े स्तुति कर रहे हैं (kecit + bhītāḥ + prāñjalayaḥ + gṛṇanti)
svastīty uktvā maharṣisiddhasaṅghāḥस्वस्तीत्य् उक्त्वा महर्षिसिद्धसङ्घाः
'कल्याण हो' कहकर महर्षियों और सिद्धों के समूह (svasti + iti + uktvā + mahā-ṛṣi-siddha-saṅghāḥ)
stuvanti tvāṃ stutibhiḥ puṣkalābhiḥस्तुवन्ति त्वां स्तुतिभिः पुष्कलाभिः
प्रचुर स्तोत्रों से आपकी स्तुति करते हैं (stuvanti + tvām + stutibhiḥ + puṣkalābhiḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The verse is careful not to flatten the crowd into one uniform reaction: it specifies “kecid,” some, as frightened, leaving room for others in the same assembly whose praise isn’t marked by fear at all. Even in a scene built around collective overwhelm, the text preserves the fact that not everyone in a crowd experiences the same event identically — a small grammatical honesty easy to miss inside such a densely packed verse.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप किसी ऐसे समूह का हिस्सा हों जो एक ही अभिभूत कर देने वाली घटना से गुज़र रहा है, तो यह न मान लें कि बाकी सब उसे ठीक वैसे ही अनुभव कर रहे हैं जैसे आप — कुछ लोग अधिक भयभीत होंगे, कुछ कम, और आपकी अपनी प्रतिक्रिया को सही होने के लिए वहाँ मौजूद बाकी लोगों से मेल खाना ज़रूरी नहीं है।

व्यावसायिक

  • जब आपकी टीम पर कोई बड़ा बदलाव आए, तो समूह को एक ही भावनात्मक इकाई मानने के बजाय प्रतिक्रियाओं की वास्तविक विविधता की अपेक्षा रखें — एक ही घोषणा से कुछ लोग चिंतित होंगे, तो कुछ उत्साहित, और बदलाव को लागू करने का अर्थ है दोनों पर ध्यान देना, न कि यह मान लेना कि सब एक जैसे हैं।

परिवार और समाज

  • जब कोई बड़ी पारिवारिक घटना सभी को एक साथ प्रभावित करे, तो याद रखें कि वहाँ मौजूद हर व्यक्ति उसे भावनात्मक रूप से एक ही तरह अनुभव नहीं कर रहा — यह मान लेने से बचें कि आपकी प्रतिक्रिया, या सबसे ऊँची आवाज़ में व्यक्त हुई प्रतिक्रिया, पूरे परिवार की बात कहती है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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