संस्कृत
वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति दंष्ट्राकरालानि भयानकानि । केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषु संदृश्यन्ते चूर्णितैरुत्तमाङ्गैः ॥
vaktrāṇi te tvaramāṇā viśanti daṃṣṭrākarālāni bhayānakāni kecid vilagnā daśanāntareṣu saṃdṛśyante cūrṇitair uttamāṅgaiḥ
अनुवाद
वे बड़ी तेज़ी से आपके विकराल दाढ़ों वाले भयानक मुखों में प्रवेश कर रहे हैं। कुछ आपके दाँतों के बीच फँसे हुए दिखाई दे रहे हैं, उनके सिर चूर-चूर हो गए हैं।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
श्लोक 25 में अर्जुन को यह उपमा मिली थी — दाँत “काल की संहारक ज्वालाओं जैसे”। यहाँ वह उपमा तुलना नहीं रह जाती, एक दृश्य बन जाती है: सचमुच के सिर, चूर्ण की तरह पिसे हुए, सचमुच की दाढ़ों के बीच फँसे हुए। “त्वरमाणाः” शब्द, यानी जल्दी करते हुए, चुपचाप एक भयानक काम कर रहा है — किसी को उसकी इच्छा के विरुद्ध भीतर नहीं खींचा जा रहा, वे स्वयं उसकी ओर दौड़े जा रहे हैं, और यही वह बात है जिसके इर्द-गिर्द अगले दो श्लोक अपनी उपमाएँ रचते हैं। गीता 11.25 की उपमा एक दृश्य बन जाती है: सचमुच के सिर, सचमुच की दाढ़ों के बीच चूर्ण की तरह पिसे हुए। त्वरमाणाः, “जल्दी करते हुए” — किसी को खींचा नहीं जाता; वे दौड़ते हैं, और अगली दो उपमाएँ इसी बात पर टिकी हैं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- vaktrāṇi te tvaramāṇā viśantiवक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति
- वे शीघ्रता से आपके मुखों में प्रवेश कर रहे हैं (vaktrāṇi + te + tvaramāṇāḥ + viśanti)
- daṃṣṭrākarālāni bhayānakāniदंष्ट्राकरालानि भयानकानि
- दाढ़ों से विकराल, भयानक (daṃṣṭrā-karālāni + bhayānakāni)
- kecid vilagnā daśanāntareṣuकेचिद् विलग्ना दशनान्तरेषु
- कुछ, दाँतों के बीच फँसे हुए (kecit + vilagnāḥ + daśana-antareṣu)
- saṃdṛśyante cūrṇitair uttamāṅgaiḥसंदृश्यन्ते चूर्णितैः उत्तमाङ्गैः
- पिसकर चूर्ण हुए सिरों सहित दिखाई देते हैं (saṃdṛśyante + cūrṇitaiḥ + uttama-aṅgaiḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Two verses ago, the teeth were “like” Time’s destroying flames — a simile still holds a sliver of distance, a comparison rather than an identity. Here that distance collapses: these are described as actual heads, actually crushed, between actual teeth. The move from figurative to literal in the space of two verses is itself the point — metaphor was offering Arjuna, and the reader, a small mercy of remove, and verse 27 withdraws it.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप देखें कि आप किसी डर को किसी बुरी चीज़ 'जैसा' बताने के बजाय उसे सचमुच घटित होता हुआ बताने लगे हैं, तो इस बदलाव को वास्तविक मानें — उपमा का सहारा अब समाप्त हो चुका है, और हो सकता है कि स्थिति को तुलना के ज़रिए नरम करने के बजाय उसका सीधे सामना करना पड़े।
व्यावसायिक
- जिस जोखिम को आप अब तक काल्पनिक रूप में बताते आए हैं, उसे जब आपकी टीम ठोस और शाब्दिक शब्दों में बताने लगे, तो भाषा के इस बदलाव को इस बात का संकेत मानें कि जोखिम वास्तविक हो गया है, न कि केवल यह कि लोगों के बोलने का ढंग बदल गया है।
परिवार और समाज
- यदि कोई चिंता जिसे आपने तुलना के रूप में कहा था — 'ऐसा लगता है जैसे हम एक-दूसरे से दूर होते जा रहे हैं' — आपका कोई प्रियजन साफ़-साफ़ और शाब्दिक रूप में कहने लगे, तो भाषा के इस बदलाव को अनदेखा न करें; इसका प्रायः अर्थ होता है कि उनके लिए उपमा की नरम करने वाली दूरी पहले ही समाप्त हो चुकी है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
स्वयं से पूछें
इस श्लोक को पढ़ने से आगे ले जाने के कुछ तरीके। टिक और नोट इसी ब्राउज़र में रहते हैं।