संस्कृत
मन्यसे यदि तच्छक्यं मया द्रष्टुमिति प्रभो । योगेश्वर ततो मे त्वं दर्शयात्मानमव्ययम् ॥
manyase yadi tac chakyaṃ mayā draṣṭum iti prabho yogeśvara tato me tvaṃ darśayātmānam avyayam
अनुवाद
हे प्रभो, यदि आप मानते हैं कि मैं उसे देख सकता हूँ, तो हे योगेश्वर, आप मुझे अपना अविनाशी स्वरूप दिखाइए।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
अर्जुन अपने ही अनुरोध के साथ एक शर्त जोड़ते हैं — “यदि आप मानते हैं कि उसे मेरे द्वारा देखा जा सकता है” — यह पहले से ही इस बात की स्वीकृति है कि यह उनकी क्षमता से परे हो सकता है। “योगेश्वर”, अर्थात् योग के स्वामी, यह संबोधन कृष्ण के उसी प्रक्रिया पर अधिकार को इंगित करता है जो इस दर्शन को संभव बनाएगी: यह ऐसा अनुरोध नहीं है कि मानवीय आँखें बस और ज़ोर लगाकर देखें, बल्कि यह अनुरोध है कि कृष्ण अर्जुन की देखने की क्षमता के साथ कुछ करें। श्लोक 8 इस प्रक्रिया को स्पष्ट कर देगा। “यदि आप मानते हैं कि उसे मेरे द्वारा देखा जा सकता है” — यह पहले से ही इस बात की स्वीकृति है कि यह अर्जुन की क्षमता से परे हो सकता है। कृष्ण को योग-ईश्वर कहकर संबोधित करना उस प्रक्रिया को इंगित करता है: मानवीय आँखों का और ज़ोर लगाकर देखना नहीं, बल्कि कृष्ण का देखने की क्षमता के साथ कुछ करना, जिसे गीता 11.8 स्पष्ट करता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- manyase yadi tac chakyaṃमन्यसे यदि तच् छक्यं
- यदि आप मानते हैं कि वह संभव है (manyase + yadi + tat + śakyam)
- mayā draṣṭum iti prabhoमया द्रष्टुं इति प्रभो
- मेरे द्वारा देखा जाना, हे प्रभो (mayā + draṣṭum + iti + prabho)
- yogeśvara tato me tvaṃयोगेश्वर ततो मे त्वं
- हे योगेश्वर, तो मुझे आप (yoga-īśvara + tataḥ + me + tvam)
- darśayātmānam avyayamदर्शयात्मानं अव्ययं
- अपना अविनाशी स्वरूप दिखाइए (darśaya + ātmānam + avyayam)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Arjuna doesn’t just ask to see the imperishable Self — he hands Krishna the decision about whether he’s even capable of it. That’s a distinct move from the certainty he showed demanding answers back in chapter 2: here the boldest request in the poem so far arrives wrapped in a conditional that puts the call in someone else’s hands. Naming the mechanism — Yogeśvara, Lord of Yoga — in the same breath as the hedge suggests he already senses this isn’t something his own effort alone can satisfy.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप कोई ऐसी चीज़ माँगें जो शायद आपकी वर्तमान क्षमता से परे हो, तो यह खुलकर कह देना, और निर्णय किसी ऐसे व्यक्ति पर छोड़ देना, ठीक है जिसकी दृष्टि आपसे अधिक व्यापक हो — यह कमज़ोरी नहीं है, बल्कि इस बात की सही समझ है कि आपके अपने विवेक की सीमाएँ कहाँ हैं।
व्यावसायिक
- जब आप अपने लिए कोई महत्वाकांक्षी, क्षमता से आगे की ज़िम्मेदारी प्रस्तावित करें, तो यह संभावना स्पष्ट रूप से कहें कि हो सकता है आप अभी उसके लिए तैयार न हों, और अपनी तैयारी के बारे में अपने प्रबंधक को राय देने दें — ईमानदारी से जताई गई यह सावधानी झूठे आत्मविश्वास की तुलना में अधिक भरोसा पैदा करती है।
परिवार और समाज
- यदि आप किसी से इतने आत्मीय खुलेपन या ईमानदारी की माँग कर रहे हैं कि आप उसे सँभाल पाएँगे या नहीं, इस बारे में आपको निश्चय नहीं है, तो यह कह दें — 'मुझे बताइए कि क्या आपको लगता है मैं इसे सह पाऊँगा' यह कहना, यह दिखावा करने से कहीं अधिक ईमानदार अनुरोध है कि आप अपनी सीमाएँ पहले से जानते हैं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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