11.3

संस्कृत

एवमेतद्यथाऽऽत्थ त्वमात्मानं परमेश्वर । द्रष्टुमिच्छामि ते रूपमैश्वरं पुरुषोत्तम ॥

evam etad yathāttha tvam ātmānaṃ parameśvara draṣṭum icchāmi te rūpam aiśvaraṃ puruṣottama

अनुवाद

हे परमेश्वर, आप अपने विषय में जैसा कहते हैं, वह वैसा ही है। हे पुरुषोत्तम, मैं आपका ऐश्वर्यमय रूप देखना चाहता हूँ।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

आख़िरकार औपचारिक निवेदन सामने आता है: और वर्णन नहीं, बल्कि स्वयं दर्शन — द्रष्टुम् इच्छामि, “मैं देखना चाहता हूँ।” “पुरुषोत्तम”, अर्थात् परम पुरुष, यह संबोधन ध्यान देने योग्य है, क्योंकि यह ठीक वही उपाधि है जिसे खोलकर समझाने में अध्याय 15 आगे चलकर पूरा एक प्रवचन लगाएगा; यहाँ इसे लगभग सहज भाव से कह दिया गया है, इससे पहले कि ग्रंथ सचमुच इसे अर्जित करे। अर्जुन किसी दावे को सुनी-सुनाई बात मानकर स्वीकार करने के बजाय प्रत्यक्ष अनुभव से परखना चाहता है — यह उस तर्कपूर्ण विवेचन से बिलकुल भिन्न ढंग है जिसे कृष्ण अध्याय 2 से गढ़ते आ रहे हैं। द्रष्टुम् इच्छामि — “मैं देखना चाहता हूँ” — पूरे संवाद का ढंग तर्कपूर्ण विवेचन से हटाकर प्रत्यक्ष अनुभव की ओर ले जाता है। “पुरुषोत्तम” यहाँ सहज भाव से कह दिया गया है, गीता 15 में इस उपाधि के अर्जित होने से चार अध्याय पहले।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

evam etad yathāttha tvamएवं एतद् यथात्थ त्वं
यह वैसा ही है, जैसा आप स्वयं कहते हैं (evam + etat + yathā + āttha + tvam)
ātmānaṃ parameśvaraआत्मानं परमेश्वर
अपने आपको, हे परमेश्वर (ātmānam + parama-īśvara)
draṣṭum icchāmi te rūpamद्रष्टुं इच्छामि ते रूपं
मैं आपका रूप देखना चाहता हूँ (draṣṭum + icchāmi + te + rūpam)
aiśvaraṃ puruṣottamaऐश्वरं पुरुषोत्तम
ऐश्वर्यमय, हे पुरुषोत्तम (aiśvaram + puruṣottama)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Every teaching from chapter 2 onward has asked Arjuna to accept an argument; this is the one moment he asks instead for evidence he can check with his own faculties. It’s a small but real admission that reasoning, however sound, has a ceiling — at some point a person wants to see the thing itself, not just be persuaded that it’s there. Krishna doesn’t treat the request as a failure of faith; he grants it immediately, in the very next breath.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जिस बात को आपने अब तक केवल किसी और के कहने पर माना है, उसे आगे चलकर स्वयं परखना चाहना भरोसे की कमी नहीं है — तर्क को सच्चे मन से समझने के बाद प्रमाण को सीधे देखने की इच्छा रखना एक उचित अगला कदम है, पीछे की ओर उठा कदम नहीं।

व्यावसायिक

  • जब कोई हितधारक महीनों तक आपके तर्क को समझता रहा हो और फिर एक और ब्रीफ़िंग लेने के बजाय डेटा या सिस्टम को सीधे देखना चाहे, तो इसे संदेह नहीं, बल्कि भरोसे का स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ना समझें — उन्हें एक और तर्क देने के बजाय सीधे दिखा दें।

परिवार और समाज

  • यदि आपका कोई प्रियजन कुछ समय तक धैर्य से आपकी बातें मानता रहा हो और फिर उस चीज़ को सचमुच देखना या अनुभव करना चाहे जिसका आप वर्णन करते आए हैं, तो इसे समझ के और निकट आने का उसका तरीका मानें, न कि आपकी अब तक कही बातों को ठुकराना।

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