संस्कृत
द्यावापृथिव्योरिदमन्तरं हि व्याप्तं त्वयैकेन दिशश्च सर्वाः । दृष्ट्वाऽद्भुतं रूपमुग्रं तवेदम् लोकत्रयं प्रव्यथितं महात्मन् ॥
dyāvāpṛthivyor idam antaraṃ hi vyāptaṃ tvayaikena diśaś ca sarvāḥ dṛṣṭvādbhutaṃ rūpam ugraṃ tavedaṃ lokatrayaṃ pravyathitaṃ mahātman
अनुवाद
हे महात्मन्, स्वर्ग और पृथ्वी के बीच का यह सारा अन्तराल और सभी दिशाएँ केवल आपसे ही व्याप्त हैं। आपके इस अद्भुत और उग्र रूप को देखकर तीनों लोक काँप रहे हैं।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
वर्णन का दायरा अर्जुन के अपने अनुभव से बढ़कर पूरे ब्रह्माण्ड के बारे में एक दावे तक पहुँच जाता है: केवल वही नहीं काँप रहा, बल्कि तीनों लोक (लोकत्रयम्) उसी रूप के सामने थरथरा रहे हैं। “उग्र” शब्द, यानी प्रचण्ड या भयानक, यहाँ सचमुच अहम भूमिका निभाता है और आगे के श्लोकों में बार-बार आता है — यह पहला स्थान है जहाँ इस दर्शन को केवल विशाल नहीं, बल्कि भयावह कहा गया है, और यहाँ से आगे यह भाव थमता नहीं। उग्र — “प्रचण्ड, भयानक” — पहली बार इस दर्शन को केवल विशाल नहीं, बल्कि भयावह कहता है, और यह शब्द यहाँ से आगे बार-बार आता है। वर्णन अर्जुन के अपने काँपने से बढ़कर “तीनों लोकों” तक फैल जाता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- dyāvāpṛthivyor idam antaraṃ hiद्यावापृथिव्योः इदं अन्तरं हि
- स्वर्ग और पृथ्वी के बीच का यह अन्तराल (dyāvā-pṛthivyoḥ + idam + antaram + hi)
- vyāptaṃ tvayaikena diśaś ca sarvāḥव्याप्तं त्वयैकेन दिशश् च सर्वाः
- केवल आपसे ही व्याप्त है, और सभी दिशाएँ भी (vyāptam + tvayā + ekena + diśaḥ + ca + sarvāḥ)
- dṛṣṭvādbhutaṃ rūpam ugraṃ tavedaṃदृष्ट्वाद्भुतं रूपं उग्रं तवेदं
- आपके इस अद्भुत और उग्र रूप को देखकर (dṛṣṭvā + adbhutam + rūpam + ugram + tava + idam)
- lokatrayaṃ pravyathitaṃ mahātmanलोकत्रयं प्रव्यथितं महात्मन्
- तीनों लोक अत्यन्त व्यथित हैं, हे महात्मन् (loka-trayam + pravyathitam + mahā-ātman)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
By widening the report from his own reaction to a claim about all three worlds trembling, Arjuna is quietly doing something protective for himself: pre-empting the suspicion that his fear is a personal overreaction. If the whole cosmos shakes at the same sight, his own terror in the verses ahead can’t be dismissed as an individual failure of nerve — it’s simply the correct response to something objectively overwhelming.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आपको किसी बात से डर लगे और आप चिंता करें कि यह डर ही इस बात का संकेत है कि आपमें कुछ गड़बड़ है, तो जाँचिए कि जिस चीज़ का आप सामना कर रहे हैं, उसके विस्तार को देखते हुए क्या यह डर वास्तव में वस्तुतः उचित प्रतिक्रिया है — जो भी डर उभरता है, वह हर बार कोई निजी कमज़ोरी नहीं होता जिसे संभालकर दूर करना पड़े।
व्यावसायिक
- जब आपकी टीम किसी निष्कर्ष से घबरा जाए, तो असल समस्या का विस्तार पक्का करने से पहले हर व्यक्ति को अलग-अलग तसल्ली देने की इच्छा पर रोक लगाइए — यदि घबराहट वास्तविक गंभीरता के अनुपात में है, तो शांति बनाए रखने के लिए उसे कम करके आँकने से ज़्यादा उपयोगी उसे सही ठहराना है।
परिवार और समाज
- यदि आप किसी बात से डरे हुए हैं और कोई इशारा करे कि आप ज़रूरत से ज़्यादा प्रतिक्रिया दे रहे हैं, तो सीधे-सीधे यह जाँच लेना उचित है कि क्या डर स्थिति के वास्तविक विस्तार से मेल खाता है — कभी-कभी डर बस सटीक, सबकी साझा प्रतिक्रिया होता है, न कि कोई निजी अति-प्रतिक्रिया जिसे संभालकर दूर करना पड़े।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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