संस्कृत
मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसंज्ञितम् । यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम ॥
madanugrahāya paramaṃ guhyam adhyātmasaṃjñitam yat tvayoktaṃ vacas tena moho'yaṃ vigato mama
अनुवाद
मुझ पर अनुग्रह करने के लिए आपने अध्यात्म नाम का जो परम गुह्य वचन कहा है, उससे मेरा यह मोह दूर हो गया है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
अर्जुन आरम्भ में ही अध्याय 10 की दिव्य विभूतियों वाली शिक्षा को श्रेय देते हैं कि उसने उनका मोह दूर कर दिया है। यह वही शब्द है जो अध्याय 1 में उनकी जड़ता के लिए आया था। इस बात को जल्दी आए और अधूरे समापन के रूप में रेखांकित करना उचित है। 18 अध्यायों के क्रम में यहाँ, श्लोक 1 में ही, वे कहते हैं कि उनका भ्रम मिट गया है। फिर भी कुछ ही श्लोकों के भीतर वे उसी दर्शन के सामने खुले आतंक में डूब जाएँगे जिसकी माँग वे अभी करने वाले हैं। बौद्धिक संशय का मिट जाना एक बात है। वह संशय वास्तव में जिस ओर संकेत कर रहा था, उसका सीधे सामना करके टिके रह पाना दूसरी बात है। ये दोनों अलग सिद्ध होती हैं। अर्जुन जिस मोह के दूर होने की बात कहते हैं, वह वही शब्द है जो अध्याय 1 में उनके टूट जाने के लिए आया था (गीता 1.30)। गीता 18.73 में, बिल्कुल अंत में, यह शब्द एक बार फिर आएगा। बौद्धिक स्पष्टता जल्दी आ गई है। पर जिस दर्शन की माँग वे अभी करने वाले हैं, वह उसे लगभग फिर से ध्वस्त कर देगा।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- madanugrahāya paramaṃ guhyamमदनुग्रहाय परमं गुह्यं
- मुझ पर अनुग्रह के लिए, परम गोपनीय (mat-anugrahāya + paramam + guhyam)
- adhyātmasaṃjñitamअध्यात्मसंज्ञितं
- अध्यात्म नामक (adhyātma-saṃjñitam)
- yat tvayoktaṃ vacas tenaयत् त्वयोक्तं वचस् तेन
- जो वचन आपने कहा, उससे (yat + tvayā + uktam + vacaḥ + tena)
- moho'yaṃ vigato mamaमोहोऽयं विगतो मम
- मेरा यह मोह दूर हो गया है (mohaḥ + ayam + vigataḥ + mama)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Arjuna announces closure — “this delusion is gone” — in the very first line of a chapter that is about to open, not conclude, his crisis. The text places a completion statement at a structural beginning, which is easy to misread as irony but is doing something more useful: it distinguishes intellectual resolution from the harder trial that resolution invites. Understanding an argument and having stood in front of what the argument was about turn out to be two separate thresholds, crossed here in the wrong order.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आपको लगे कि कोई प्रश्न आपके मन में आख़िरकार सुलझ गया है, तो उसे अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक कठिन परीक्षा की शुरुआत समझिए — सच्ची निश्चितता की परीक्षा तर्क से नहीं, बल्कि सामना होने पर होती है, और यह परीक्षा अक्सर ठीक तभी आती है जब आप स्वयं को निश्चित घोषित कर देते हैं।
व्यावसायिक
- जब आपकी टीम किसी अच्छी चर्चा के बाद किसी डिज़ाइन-निर्णय को 'सुलझा हुआ' कह दे, तो यह मानकर न चलें कि कठिन हिस्सा — वास्तविक दबाव में उस समझौते के साथ जीना — पीछे छूट गया है; बौद्धिक सहमति परीक्षा का द्वार है, उसका अंत नहीं।
परिवार और समाज
- अगर आप किसी ऐसी बातचीत के ठीक बाद, जिसने चीज़ें स्पष्ट कर दीं, किसी से कहें कि विवाद 'सुलझ गया' है, तो सजग रहिए — क्या सच है इसकी स्पष्टता, और जब वह सचमुच फिर आपके सामने हो तब स्थिर बने रहना, ये दो अलग-अलग उपलब्धियाँ हैं, और दूसरी की परीक्षा अभी हुई ही नहीं है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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