4.41

संस्कृत

योगसंन्यस्तकर्माणं ज्ञानसञ्छिन्नसंशयम् । आत्मवन्तं न कर्माणि निबध्नन्ति धनञ्जय ॥

yoga-sannyasta-karmāṇaṃ jñāna-sañchinna-saṃśayam ātmavantaṃ na karmāṇi nibadhnanti dhanañjaya

अनुवाद

हे धनंजय, जिसने योग के द्वारा कर्मों का संन्यास कर दिया है, जिसने ज्ञान से अपने संशय काट डाले हैं और जो आत्मवान है, उसे कर्म नहीं बाँधते।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

वह संगम, जिसे पूरा अध्याय जोड़ता आ रहा है: जिसने योग के द्वारा कर्म का त्याग कर दिया है और ज्ञान के द्वारा संशय को काट दिया है — योगसंन्यस्तकर्माणम्, ज्ञानसंछिन्नसंशयम् — वह कर्म से बिल्कुल नहीं बँधता। यह अध्याय 3 का कर्मयोग है, अर्थात् फल में आसक्ति के बिना कर्म, और अध्याय 4 का ज्ञान, अर्थात् वह ज्ञान जो संशय को मिटा देता है — दोनों को एक ही संयुक्त वाक्य में साथ-साथ नाम दिया गया है, और यहीं गीता यह खुलकर कहने के सबसे निकट पहुँचती है कि उसके दो मार्ग, जो आपस में प्रतिस्पर्धी प्रतीत होते हैं, वास्तव में कभी अलग मार्ग थे ही नहीं। ये दोनों समास जान-बूझकर एक साथ जोड़े गए हैं: योग त्याग करता है, ज्ञान काटता है, और परिणाम है एक आत्मवान् — ऐसा व्यक्ति जो स्वयं पर अधिकार रखता है। अध्याय 5 का आरम्भ अर्जुन के इस प्रश्न से होता है कि इन दोनों में कौन श्रेष्ठ है, और कृष्ण का उत्तर मूलतः यही श्लोक है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

yoga-sannyasta-karmāṇaṃयोग-संन्यस्त-कर्माणं
जिसने योग द्वारा कर्मों का संन्यास कर दिया है (yoga-sannyasta-karmāṇam)
jñāna-sañchinna-saṃśayamज्ञान-सञ्छिन्न-संशयं
जिसके संशय ज्ञान से कट गए हैं (jñāna-sañchinna-saṃśayam)
ātmavantaṃ na karmāṇiआत्मवन्तं न कर्माणि
आत्मवान को कर्म नहीं (ātma-vantam + na + karmāṇi)
nibadhnanti dhanañjayaनिबध्नन्ति धनञ्जय
बाँधते, हे धनंजय (nibadhnanti + dhanañjaya)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Read quickly, the verse looks like it’s naming two things — action renounced through yoga, doubt severed through knowledge — set side by side. There’s a third term easy to skip past: ātmavantam, one established in or possessed by the Self. Without it, the first two could pass for two separate achievements, a technique for action and a technique for doubt. With it, they read instead as two descriptions of a single underlying condition — being grounded in the Self is what both the acting and the knowing actually rest on.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • यदि आपने अपने जीवन में दो ऐसे अनुशासन बनाए हैं जो अलग-अलग दिखते हैं — एक कर्म को सँभालने का अभ्यास, और दूसरा संशय को सँभालने का — तो उन दोनों के नीचे छिपी उस शांत तीसरी चीज़ को खोजिए, जैसे यह श्लोक 'आत्मा में स्थित होने' को वह आधार बताता है जो वास्तव में बाकी दोनों को एक साथ थामे रखता है।

व्यावसायिक

  • आपके रिज़्यूमे पर दो कौशल जो आपस में असंबंधित दिखते हैं — पैनी तकनीकी समझ और हितधारकों से शांत संवाद — संभव है दोनों एक ही शांत, गहरे गुण पर टिके हों, जैसे इस बात की सच्ची स्पष्टता कि आप वास्तव में क्या हासिल करना चाहते हैं; इन दोनों कौशलों को अलग-अलग चीज़ें मानकर साथ-साथ विकसित करने के बजाय उस नींव को खोजिए और उसे नाम दीजिए।

परिवार और समाज

  • किसी रिश्ते में आप जो दो काम अच्छी तरह करते हैं और जो असंबंधित लगते हैं — धैर्य बनाए रखना, ईमानदार बने रहना — हो सकता है दोनों उस व्यक्ति के प्रति एक ही शांत, गहरी प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति हों; उस साझा जड़ को नाम देना इन दोनों व्यवहारों को अलग-अलग परियोजनाओं की तरह साधने से अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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