संस्कृत
यथैधांसि समिद्धोऽग्निर्भस्मसात्कुरुतेऽर्जुन । ज्ञानाग्निः सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते तथा ॥
yathaidhāṃsi samiddho 'gnir bhasmasāt kurute 'rjuna jñānāgniḥ sarva-karmāṇi bhasmasāt kurute tathā
अनुवाद
हे अर्जुन, जैसे प्रज्वलित अग्नि ईंधन को भस्म कर देती है, वैसे ही ज्ञान रूपी अग्नि सभी कर्मों को भस्म कर देती है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
अध्याय का केंद्रीय रूपक यहाँ अपनी पूरी शक्ति के साथ सामने आता है: जैसे अग्नि ईंधन को राख कर देती है, वैसे ही ज्ञान की अग्नि, ज्ञानाग्नि, हर कर्म को राख कर देती है। अग्नि का बिंब श्लोक 10 और श्लोक 27 से धीरे-धीरे उभरता आ रहा है, पर यहाँ आकर वह सजावटी नहीं रह जाता, बल्कि एक प्रक्रिया बन जाता है — इसे प्रायः गीता का सबसे स्पष्ट कथन माना जाता है कि ज्ञान केवल नया बंधन उत्पन्न करने से ही नहीं बचता, जो बात समभाव से किए गए कर्म के विषय में श्लोक 14 और 20 में पहले ही कही जा चुकी है, बल्कि पहले से किए जा चुके कर्मों के अवशेष को सक्रिय रूप से भस्म भी कर देता है। यह दावा अनासक्ति के दावे से अधिक प्रबल है: यह नहीं कि “ज्ञान में किए गए कर्म बाँधते नहीं”, बल्कि यह कि “ज्ञान सर्वकर्माणि, सभी कर्मों को भस्म कर देता है” — संचित कर्मों के ढेर सहित। यह इस प्रश्न का अध्याय द्वारा दिया गया उत्तर है कि जिस व्यक्ति का एक अतीत है, वह फिर भी मुक्त कैसे हो सकता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- yathaidhāṃsi samiddho 'gnirयथैधांसि समिद्धो ऽग्निः
- जैसे प्रज्वलित अग्नि ईंधन को (yathā + edhāṃsi + samiddhaḥ + agniḥ)
- bhasmasāt kurute 'rjunaभस्मसात् कुरुते ऽर्जुन
- भस्म कर देती है, हे अर्जुन (bhasmasāt + kurute + arjuna)
- jñānāgniḥ sarva-karmāṇiज्ञानाग्निः सर्व-कर्माणि
- ज्ञान की अग्नि सभी कर्मों को (jñāna-agniḥ + sarva-karmāṇi)
- bhasmasāt kurute tathāभस्मसात् कुरुते तथा
- वैसे ही भस्म कर देती है (bhasmasāt + kurute + tathā)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Nearly everything else in this chapter asks for trust in something unverifiable — an unborn self, an unmanifest reality behind the manifest one. This verse instead reaches for the one phenomenon in the entire text that needs no argument at all: everyone has watched fire reduce fuel to ash. The hardest claim in the chapter, that knowledge can destroy the residue of already-completed action, gets anchored to the most directly observable image available, as if the certainty of the metaphor were meant to lend some of its own certainty to the claim it’s illustrating.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप किसी ऐसे आंतरिक बदलाव पर विश्वास करने की कोशिश कर रहे हों जिसे आप पूरी तरह जाँच नहीं सकते — कि पुराने ढर्रे सचमुच मिट रहे हैं, केवल शांत नहीं पड़ गए हैं — तो उस विश्वास को किसी ऐसी ठोस और देखी जा सकने वाली चीज़ से जोड़िए जिस पर आप पहले से पूरा भरोसा करते हैं, जैसे यह श्लोक अपने कहीं अधिक कठिन दावे को सहारा देने के लिए अग्नि की स्पष्ट निश्चितता उधार लेता है।
व्यावसायिक
- जब आप किसी ऐसे अमूर्त रणनीतिक बदलाव का प्रस्ताव रख रहे हों जिसे लोग पहले से जाँच नहीं सकते, तो उसे किसी एक ठोस, सीधे देखी जा सकने वाली उपमा या मिसाल पर टिकाइए जिस पर लोग पहले से पूरा भरोसा करते हैं — किसी परिचित चीज़ से उधार ली गई निश्चितता वह वास्तविक काम करती है जो अकेला अमूर्त तर्क नहीं कर सकता।
परिवार और समाज
- जब आप चाहते हों कि कोई आपके भीतर हुए बदलाव पर भरोसा करे — कि आपने सचमुच कुछ छोड़ दिया है, केवल उसके बारे में चुप नहीं हो गए हैं — तो दावे को केवल शब्दों पर टिकाने के बजाय प्रमाण के रूप में किसी ठोस, देखे जा सकने वाले व्यवहार की ओर इशारा कीजिए; निश्चितता प्रायः ठोस से अमूर्त की ओर जाती है, उलटी दिशा में नहीं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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