4.28

संस्कृत

द्रव्ययज्ञास्तपोयज्ञा योगयज्ञास्तथाऽपरे । स्वाध्यायज्ञानयज्ञाश्च यतयः संशितव्रताः ॥

dravya-yajñās tapo-yajñā yoga-yajñās tathāpare svādhyāya-jñāna-yajñāś ca yatayaḥ saṃśita-vratāḥ

अनुवाद

इसी प्रकार दृढ़ व्रतों वाले अन्य यत्नशील साधकों में से कुछ द्रव्य का यज्ञ करते हैं, कुछ तप का यज्ञ करते हैं, कुछ योग का यज्ञ करते हैं, और कुछ स्वाध्याय तथा ज्ञान का यज्ञ करते हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह श्लोक सूची को कर्मकाण्ड से सबसे दूर तक फैला देता है: धन का यज्ञ, तप का यज्ञ, योग-साधना का यज्ञ, और स्वाध्याय तथा स्वयं ज्ञान का यज्ञ। यह सोच-समझकर बनाई गई सूची है, जो यज्ञ के सबसे बाहरी रूप, भौतिक धन, से चलकर सबसे भीतरी रूप, ज्ञान के यज्ञ, तक पहुँचती है, जिसे श्लोक 33 स्पष्ट रूप से इन सबमें श्रेष्ठ ठहराएगा।

यह क्रम ही संक्षेप में पूरा तर्क है: द्रव्य (वस्तुएँ) → तप (प्रयास) → योग (अभ्यास) → स्वाध्याय-ज्ञान (अध्ययन और जानना)। गीता 4.33 बस अंतिम कड़ी को उस गंतव्य के रूप में नाम देता है जिसकी ओर यह पूरा क्रम बढ़ रहा था।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

dravya-yajñāsद्रव्य-यज्ञास्
द्रव्य-यज्ञ करने वाले (dravya-yajñāḥ)
tapo-yajñāतपो-यज्ञा
तप का यज्ञ करने वाले (tapaḥ-yajñāḥ)
yoga-yajñās tathāpareयोग-यज्ञास् तथापरे
और कुछ दूसरे योग का यज्ञ करने वाले (yoga-yajñāḥ + tathā + apare)
svādhyāya-jñāna-yajñāś caस्वाध्याय-ज्ञान-यज्ञाश् च
और स्वाध्याय तथा ज्ञान का यज्ञ करने वाले (svādhyāya-jñāna-yajñāḥ + ca)
yatayaḥ saṃśita-vratāḥयतयः संशित-व्रताः
दृढ़ व्रत वाले प्रयत्नशील यति (yatayaḥ + saṃśita-vratāḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The verse doesn’t reserve its closing description — yatayaḥ saṃśita-vratāḥ, “men of disciplined effort, of strict vows” — for the hardest-looking item on the list. It applies equally to whoever practices any of the four, wealth, austerity, yoga, or study. That’s easy to miss: the person who chooses the seemingly gentler path of study still needs the same vow-bound rigor as the one giving away wealth or undergoing austerity. Nothing on this list is being offered as the easy option.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • यह मत मान लीजिए कि आत्म-सुधार का शांत, अधिक बौद्धिक रूप चुन लेने से — पढ़ना, अध्ययन, चिंतन — आप उस अनुशासन से छूट जाते हैं जिसकी माँग कोई कठिन, अधिक दिखने वाला प्रयास करता। यह श्लोक अध्ययन को भी कठोर, निरंतर प्रतिबद्धता की ठीक उसी कसौटी पर रखता है जिस पर वह भौतिक यज्ञ को रखता है।

व्यावसायिक

  • यदि इस तिमाही आप दिखने वाला काम पूरा करके देने के बजाय सीखने या अपने कौशल बढ़ाने में लगे हैं, तो इसे कम मेहनत वाला विकल्प न समझें — इसमें भी उसी अनुशासित कठोरता की ज़रूरत है जो आप किसी बहुत अधिक दिखने वाले काम में लगाते, वरना यह चुपचाप असली योगदान में गिना जाना बंद हो जाता है।

परिवार और समाज

  • किसी रिश्ते में भावनात्मक रूप से लगना — सचमुच सुनना, सचमुच किसी को समझने की कोशिश करना — सेवा के व्यावहारिक कामों का 'आसान' विकल्प नहीं है। इसमें भी उतने ही निरंतर अनुशासन की ज़रूरत होती है, और इसे कम मेहनत वाला विकल्प मान लेना ही आमतौर पर वह जगह है जहाँ यह विफल हो जाता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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