संस्कृत
श्रोत्रादीनीन्द्रियाण्यन्ये संयमाग्निषु जुह्वति । शब्दादीन्विषयानन्य इन्द्रियाग्निषु जुह्वति ॥
śrotrādīnīndriyāṇy anye saṃyamāgniṣu juhvati śabdādīn viṣayān anya indriyāgniṣu juhvati
अनुवाद
कुछ लोग श्रवण आदि इन्द्रियों को संयम की अग्नियों में होम करते हैं, और कुछ अन्य लोग शब्द आदि विषयों को इन्द्रियों की अग्नियों में होम करते हैं।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यह श्लोक बाहरी कर्मकांड से भीतरी अनुशासन की ओर बढ़ता है: स्वयं इन्द्रियों को संयम की अग्नियों में आहुति देना, या इन्द्रियों के विषयों को इन्द्रियों की अग्नियों में आहुति देना। इनमें से हर एक को — एक ओर संयम, दूसरी ओर सक्रिय इन्द्रिय-अनुभव — यज्ञ के एक रूप के रूप में नए ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे इस शब्द का अर्थ उसके उस मूल कर्मकांडी अर्थ से बहुत आगे तक फैल जाता है जो श्लोक 12 में स्थापित हुआ था। ये दोनों विपरीत स्वभावों का वर्णन करते हैं, जिन्हें बराबर माना गया है: वह तपस्वी जो इन्द्रियों को समेट लेता है, और वह सक्रिय व्यक्ति जो विषयों को प्रशिक्षित इन्द्रियों से बिना पकड़े मिलने देता है। दोनों “अर्पण” करते हैं — एक रोककर, दूसरा बिना आसक्ति के मिलकर।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- śrotrādīnīndriyāṇy anyeश्रोत्रादीनीन्द्रियाण्य् अन्ये
- अन्य लोग श्रोत्र आदि इन्द्रियों को (śrotra-ādīni + indriyāṇi + anye)
- saṃyamāgniṣu juhvatiसंयमाग्निषु जुह्वति
- संयम-रूपी अग्नियों में हवन करते हैं (saṃyama-agniṣu + juhvati)
- śabdādīn viṣayān anyaशब्दादीन् विषयान् अन्य
- अन्य लोग शब्द आदि विषयों को (śabda-ādīn + viṣayān + anye)
- indriyāgniṣu juhvatiइन्द्रियाग्निषु जुह्वति
- इन्द्रिय-रूपी अग्नियों में हवन करते हैं (indriya-agniṣu + juhvati)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Two opposite techniques appear side by side without one being marked correct: sealing the senses off entirely, and staying engaged with sense-objects but disciplined in how they’re taken in. The verse doesn’t ask which temperament is right, withdrawal or engagement — it treats both as valid routes to the same fire, which quietly undercuts the assumption that discipline always has to look like abstinence.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- यदि आत्म-अनुशासन के लिए आपकी सहज प्रवृत्ति किसी प्रलोभन को संयम से बरतने के बजाय उसे पूरी तरह हटा देने की है, तो जान लें कि यह केवल एक मान्य तरीका है, एकमात्र तरीका नहीं — यह श्लोक पूर्ण निवृत्ति और अनुशासित संलग्नता, दोनों को उसी स्थिरता तक पहुँचने के समान रूप से वैध मार्ग मानता है। जो तरीका आपके लिए सचमुच टिकता हो, वही चुनें।
व्यावसायिक
- काम पर एकाग्रता की आदतें बनाते समय यह न मान लें कि अनुशासित विकल्प हमेशा सबसे कठोर विकल्प ही होता है — हर व्यवधान को सीधे रोक देना, या उनसे सीमित और व्यवस्थित ढंग से जुड़ने की अनुमति देना, दोनों वैध रणनीतियाँ हैं; वही अपनाएँ जिससे आपका काम अधिक स्थिर रहे, न कि वह जो अधिक तपस्वी दिखता हो।
परिवार और समाज
- जब परिवार का कोई सदस्य किसी प्रलोभन को आपसे अलग ढंग से सँभालता है — पूर्ण परहेज़ के बजाय संयम से, या इसका उलटा — तो यह मान लेने से बचें कि आपका तरीका अधिक अनुशासित है; यह श्लोक दोनों को उसी मूल संयम तक पहुँचने के मान्य मार्ग मानता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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