संस्कृत
एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदुः । स कालेनेह महता योगो नष्टः परन्तप ॥
evaṃ paramparā-prāptam imaṃ rājarṣayo viduḥ sa kāleneha mahatā yogo naṣṭaḥ parantapa
अनुवाद
हे परन्तप, इस प्रकार परम्परा से प्राप्त इस योग को राजर्षियों ने जाना। किन्तु बहुत समय बीत जाने के कारण वह योग यहाँ इस लोक में नष्ट हो गया।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
श्लोक 1 की वंश-परम्परा को आगे बढ़ाते हुए कृष्ण कहते हैं कि राजर्षियों ने इस योग को उत्तराधिकार के क्रम से सुरक्षित रखा, जब तक कि समय के लंबे अंतराल में यह क्षीण नहीं हो गया — और ठीक यही वह रिक्ति है जिसे वे अर्जुन को इसे फिर से सिखाकर भरने वाले हैं। “क्षीण हो गया” शब्द यहाँ सचमुच महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है: यह आगे आने वाली बात को किसी नवीनता के रूप में नहीं, बल्कि किसी खोई हुई चीज़ की पुनर्स्थापना के रूप में प्रस्तुत करता है। परम्परा — गुरु से शिष्य तक, कड़ी-दर-कड़ी — को इस ज्ञान के सामान्य माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया है, और उसकी विफलता को इस कारण के रूप में कि एक नए संचार की आवश्यकता है। अध्याय 4 एक टूटी हुई शृंखला का वर्णन भी करता है और गीता 4.34 में यह भी बताता है कि किसी शृंखला को अखंड कैसे रखा जाए।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- evaṃएवं
- इस प्रकार
- paramparā-prāptamपरंपरा-प्राप्तं
- परम्परा से प्राप्त (paramparā-prāptam)
- imaṃइमं
- इसे
- rājarṣayoराजर्षयो
- राजर्षियों ने (rāja-ṛṣayaḥ)
- viduḥविदुः
- जाना
- sa kāleneha mahatāस कालेनेह महता
- वह यहाँ दीर्घ काल के प्रभाव से (saḥ + kālena + iha + mahatā)
- yogoयोगो
- योग
- naṣṭaḥनष्टः
- लुप्त हो गया
- parantapaपरन्तप
- हे परन्तप
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Notice the rhetorical choice underneath the history lesson: Krishna is about to do something genuinely new — re-teach a yoga to someone outside the royal-sage line — but he frames it first as recovery of something lost, not as innovation. Positioning change as restoration rather than novelty is a persuasive move in its own right, one that shows up whenever a real departure needs the credibility of continuity to be accepted.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप अपने जीने के ढंग में कोई वास्तविक बदलाव लाना चाहें, तो उसे अपने मन में एक बिल्कुल नए संकल्प की तरह नहीं, बल्कि किसी ऐसे मूल इरादे को फिर से पाने की तरह देखने की कोशिश करें जिससे आप भटक गए थे — पुनर्स्थापना अक्सर नएपन की तुलना में प्रेरणा को अधिक समय तक बनाए रखती है।
व्यावसायिक
- जब आप किसी टीम के मौजूदा काम करने के तरीके से सचमुच हटकर कुछ प्रस्तावित करें, तो उसे एक नई पहल के रूप में नहीं, बल्कि उस प्रक्रिया के मूल उद्देश्य को फिर से स्थापित करने के रूप में रखें — इससे विरोध कम होता है और यह अक्सर अधिक सटीक भी होता है, क्योंकि ज़्यादातर भटकाव धीरे-धीरे और बिना ध्यान में आए होता है।
परिवार और समाज
- जब आप परिवार की किसी ऐसी परंपरा को फिर से शुरू करें जो चुपचाप छूट गई थी, तो उसे कोई नया नियम लागू करने के रूप में नहीं, बल्कि किसी ऐसी चीज़ को वापस लाने के रूप में प्रस्तुत करें जो मायने रखती थी — इससे विरोध के बजाय भागीदारी को न्योता मिलता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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