संस्कृत
ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् । ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना ॥
brahmārpaṇaṃ brahma havir brahmāgnau brahmaṇā hutam brahmaiva tena gantavyaṃ brahma-karma-samādhinā
अनुवाद
अर्पण ब्रह्म है, हवि ब्रह्म है, ब्रह्मरूपी अग्नि में ब्रह्म के द्वारा ही आहुति दी जाती है। जो ब्रह्मरूपी कर्म में पूरी तरह समाहित रहता है, वह ब्रह्म को ही प्राप्त होता है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यह प्रसिद्ध “ब्रह्मार्पणम्” श्लोक पूरी तरह एक ही शब्द, ब्रह्म, “सनातन”, की पाँच बार आवृत्ति से रचा गया है। यह शब्द अर्पण, अर्पित किया जाने वाला पदार्थ, अग्नि, अर्पण करने वाला और गंतव्य, इन पाँचों के लिए आता है। इस तरह वैदिक यज्ञ के हर अलग तत्त्व को यह श्लोक एक ही अद्वैत सत्ता में समेट देता है। श्लोक 23 ने यज्ञ को तत्त्वदर्शन के रूप में देखने का जो विचार प्रस्तुत किया था, उसका यह अध्याय का सबसे संक्षिप्त कथन है। श्लोक 25-30 में यज्ञ के विशिष्ट प्रकारों की जो सूची दी गई है, वह एक-एक करके यही दिखाने के लिए है कि उनमें से कोई भी इसी समझ के साथ किया जा सकता है। जब अर्पण करने वाला, अर्पण, अग्नि और लक्ष्य, सब एक ही दिखाई देते हैं, तब कर्म में कोई “दूसरा” नहीं रहता जिसके साथ लेन-देन हो, और इसलिए बाँधने वाला भी कुछ नहीं रहता। यहाँ ब्रह्म कर्म का पूरा क्षेत्र है, उसे ग्रहण करने वाला नहीं। “यज्ञ के रूप में कर्म करने” का यही तात्त्विक रूप है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- brahmārpaṇaṃब्रह्मार्पणं
- अर्पण ब्रह्म है (brahma-arpaṇam)
- brahma havirब्रह्म हविः
- हवि ब्रह्म है (brahma + haviḥ)
- brahmāgnauब्रह्माग्नौ
- ब्रह्मरूपी अग्नि में (brahma-agnau)
- brahmaṇā hutamब्रह्मणा हुतं
- ब्रह्म द्वारा आहुति दी गई (brahmaṇā + hutam)
- brahmaiva tena gantavyaṃब्रह्मैव तेन गन्तव्यं
- उसे ब्रह्म को ही प्राप्त होना है (brahma + eva + tena + gantavyam)
- brahma-karma-samādhināब्रह्म-कर्म-समाधिना
- ब्रह्मरूपी कर्म में समाहित (brahma-karma-samādhinā)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
The verse doesn’t argue for non-duality so much as perform it: offering, offered substance, fire, offerer, and goal all reduce to one repeated word, so the grammar itself refuses to let subject and object stay separate. It’s a rare case in the text where the form of the sentence is doing the philosophical work usually left to the content — you don’t need the explanation of non-duality to feel its point once you notice the sentence has nowhere left for a second thing to stand.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप चाहते हैं कि कोई विश्वास सचमुच आपके आचरण को बदले — न कि केवल ऐसी बात रहे जिससे आप सैद्धांतिक रूप से सहमत हों — तो देखिए कि आप अपने दिनों का वर्णन कैसे करते हैं: क्या आपकी भाषा अब भी 'मैं' को 'मैंने जो किया' से अलग रखती है? अपने कर्म के बारे में प्रयोग किए जाने वाले शब्दों को बदलना वह काम कर सकता है जो केवल दृढ़ विश्वास अकेले नहीं कर पाता।
व्यावसायिक
- यदि आप चाहते हैं कि कोई टीम साझा ज़िम्मेदारी को किसी बैठक में केवल समर्थन देने के बजाय सचमुच आत्मसात करे, तो जाँचिए कि क्या आपकी अपनी भाषा 'मेरा हिस्सा' और 'उनका हिस्सा' को बार-बार अलग करती रहती है — श्रेय और दोष के बारे में किस तरह बात की जाती है, यह किसी भी घोषित मूल्य की तुलना में संस्कृति को कहीं अधिक आकार देता है।
परिवार और समाज
- यदि आप चाहते हैं कि कोई रिश्ता अलग-अलग रखे जा रहे दो हिसाबों के बजाय एक सच्चे 'हम' जैसा लगे, तो ध्यान दीजिए कि क्या आपकी रोज़मर्रा की भाषा अब भी 'मैंने क्या किया' को 'उन्होंने क्या किया' के सामने तौलती रहती है — आदतन कहे जाने वाले वाक्यों को बदलना, कम अलगाव महसूस करने का संकल्प लेने की तुलना में, अनुभव की जाने वाली वास्तविकता को कहीं अधिक तेज़ी से बदल सकता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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