4.9

संस्कृत

जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः । त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन ॥

janma karma ca me divyam evaṃ yo vetti tattvataḥ tyaktvā dehaṃ punar janma naiti mām eti so 'rjuna

अनुवाद

हे अर्जुन, मेरे जन्म और कर्म दिव्य हैं। जो इसे इस प्रकार तत्त्व से जान लेता है, वह देह छोड़ने के बाद फिर जन्म नहीं लेता, बल्कि मुझे प्राप्त होता है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

कृष्ण श्लोक 5-8 को सही रूप में समझने का फल बताते हैं: जो कोई उनके जन्म और कर्म के सार को सचमुच जान लेता है, वह पुनर्जन्म से मुक्त हो जाता है और उसके स्थान पर उन्हीं को प्राप्त होता है। यह ‘सही ज्ञान के द्वारा मुक्ति’ की वही संरचना है जो पूरे अध्याय में बार-बार आती है — किसी तात्त्विक तथ्य की सही समझ, न कि केवल कर्मकांड या प्रयास, ही इस चक्र को तोड़ती है। तत्त्वतः — “जैसा वह वास्तव में है,” न कि केवल किसी सिद्धांत के रूप में स्वीकार किया हुआ — यही वह विशेषण है जिस पर पूरा भार टिका है: अनुभूत ज्ञान मुक्त करता है, सूचना नहीं। “इसे जानो और तुम मुक्त हो” का यही रूप गीता 4.16, गीता 4.32 और गीता 4.35 में फिर आता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

janma karma ca me divyamजन्म कर्म च मे दिव्यं
मेरा जन्म और कर्म दिव्य हैं (janma + karma + ca + me + divyam)
evaṃ yo vetti tattvataḥएवं यो वेत्ति तत्त्वतः
जो इस प्रकार तत्त्व से जानता है (evam + yaḥ + vetti + tattvataḥ)
tyaktvā dehaṃत्यक्त्वा देहं
देह त्यागकर (tyaktvā + deham)
punar janma naitiपुनः जन्म नैति
फिर जन्म को प्राप्त नहीं होता (punaḥ + janma + na + eti)
mām eti so 'rjunaमां एति सो ऽर्जुन
वह मुझे प्राप्त होता है, हे अर्जुन (mām + eti + saḥ + arjuna)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Most of the Gita’s liberation talk — atman, sthitaprajna — points inward, toward correctly understanding oneself. This verse points the other way: what frees a person here is truly knowing something about Krishna, not about themselves. It’s a quiet but real departure from the chapter’s usual direction of insight, worth noticing rather than folding into the more familiar self-knowledge frame.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • हर बड़ी सफलता अधिक आत्म-विश्लेषण से नहीं आती — कभी-कभी जो चीज़ आपको सचमुच मुक्त करती है, वह है अपने से बाहर किसी व्यक्ति या किसी चीज़ को आख़िरकार स्पष्ट रूप से समझ लेना। इसलिए यह न मान लें कि हर उपयोगी अंतर्दृष्टि भीतर झाँकने से ही मिलती है।

व्यावसायिक

  • जब आप अटके हुए हों, तो सोचिए कि रास्ता शायद अपनी कार्य-प्रक्रिया को बेहतर समझने से नहीं, बल्कि किसी सहयोगी टीम या किसी अगुआ की वास्तविक सीमाओं और प्रेरणाओं को सच्चे मन से समझने से खुले — केवल भीतर की नहीं, बाहर की अंतर्दृष्टि भी।

परिवार और समाज

  • कोई रिश्ता कभी-कभी इसलिए सहज नहीं हो जाता कि आपने ख़ुद को बेहतर समझ लिया, बल्कि इसलिए सहज हो जाता है कि आपने आख़िरकार समझ लिया कि दूसरे व्यक्ति को वास्तव में क्या प्रेरित करता है — अंतर्दृष्टि के लिए केवल भीतर ही नहीं, बाहर भी देखें।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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