4.10

संस्कृत

वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिताः । बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्भावमागताः ॥

vīta-rāga-bhaya-krodhā man-mayā mām upāśritāḥ bahavo jñāna-tapasā pūtā mad-bhāvam āgatāḥ

अनुवाद

राग, भय और क्रोध से मुक्त, मुझमें तन्मय, मेरी शरण में आए हुए बहुत-से लोग ज्ञान रूपी तप से पवित्र होकर मेरे भाव को प्राप्त हो चुके हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह एक सामान्य कथन है कि ऐतिहासिक रूप से श्लोक 9 में बताई गई मुक्ति तक कौन पहुँचे हैं — बहुत से लोग, न कि कुछ चुने हुए। उनकी पहचान तीन चीज़ों से होती है जिन्हें उन्होंने छोड़ दिया है (राग, भय, क्रोध), और एक चीज़ से जिसने उन्हें शुद्ध किया है: “ज्ञान की अग्नि”। शुद्ध करने वाली भीतरी अग्नि की यह छवि श्लोक 19, 27 और 37 में फिर आती है, और जब तक यह स्पष्ट रूप से ज्ञान की अग्नि के नाम से दोबारा प्रकट होती है, तब तक अध्याय इसे अपने केंद्रीय रूपकों में से एक बना चुका होता है। “बहवः” — बहुत से — शब्द जान-बूझकर रखा गया है, ताकि मुक्ति को अत्यंत दुर्लभ समझने वाली किसी भी व्याख्या का खंडन हो। शुद्ध करने वाला तत्त्व ज्ञान-तपस् है, अर्थात् ज्ञान का अनुशासन, जिसे एक तप के रूप में देखा गया है। गीता 4.19 इसी बात को फिर से कहता है कि कर्म “ज्ञान की अग्नि में भस्म हो गए” हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

vīta-rāga-bhaya-krodhāवीत-राग-भय-क्रोधा
राग, भय और क्रोध से मुक्त (vīta-rāga-bhaya-krodhāḥ)
man-mayāमन्-मया
मुझमें तन्मय (mat-mayāḥ)
mām upāśritāḥमां उपाश्रिताः
मेरी शरण में आए हुए (mām + upāśritāḥ)
bahavoबहवो
बहुत से
jñāna-tapasāज्ञान-तपसा
ज्ञान रूपी तप से (jñāna-tapasā)
pūtāपूता
पवित्र हुए
mad-bhāvam āgatāḥमद्-भावं आगताः
मेरे भाव को प्राप्त हुए हैं (mat-bhāvam + āgatāḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Verse 3 called this teaching a “supreme secret” given specially to Arjuna for his devotion and friendship; verse 10 then says many have reached the same state throughout history. The two aren’t in tension so much as making different claims — the access felt exclusive to the one receiving it, but the underlying attainment was never rare. Privileged transmission and common outcome sit side by side without contradiction.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • किसी शिक्षा को दुर्लभ और विशेष बताए जाने का अर्थ यह नहीं कि उसका परिणाम भी दुर्लभ है — बहुत-से साधारण लोग उसी अनुशासन से उसी अवस्था तक पहुँचते हैं, इसलिए विशेष पहुँच की भावना आपको यह विश्वास न दिलाने दें कि वह परिणाम किसी और की पहुँच से बाहर है।

व्यावसायिक

  • ज्ञान तक भीतरी पहुँच विशेष लग सकती है, जबकि उससे मिलने वाला कौशल वास्तव में विशेष नहीं होता — विशेषाधिकार वाली पहुँच को विशेषाधिकार वाला परिणाम न समझें; वही निपुणता प्रायः हर उस व्यक्ति को मिल सकती है जो वही परिश्रम करने को तैयार हो।

परिवार और समाज

  • कोई आपको किसी ऐसी चीज़ में शामिल करे जिसे वह विशेष बताता है, तो यह सच्ची बात है, पर याद रखें कि उसके मूल में जो विकास या समझ है, वह केवल आपके लिए सुरक्षित नहीं है — बहुत-से लोग उसी तरह, उसी प्रयास से वहाँ पहुँचते हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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