4.32

संस्कृत

एवं बहुविधा यज्ञा वितता ब्रह्मणो मुखे । कर्मजान्विद्धि तान्सर्वानेवं ज्ञात्वा विमोक्ष्यसे ॥

evaṃ bahu-vidhā yajñā vitatā brahmaṇo mukhe karma-jān viddhi tān sarvān evaṃ jñātvā vimokṣyase

अनुवाद

इस प्रकार अनेक प्रकार के यज्ञ ब्रह्म के मुख में फैले हुए हैं। उन सबको कर्म से उत्पन्न जानो; ऐसा जानकर तुम मुक्त हो जाओगे।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

विशिष्ट साधनाओं के बीस श्लोकों के बाद पाठ थोड़ा पीछे हटकर उस बात का नाम लेता है जो इन सब में समान है: इनमें से हर यज्ञ कर्मज है, कर्म से उत्पन्न है, और इस तथ्य को समझ लेना ही वह है जो व्यक्ति को मुक्त करता है — विमोक्ष्यसे। यहीं अध्याय 4 की शिक्षा सीधे अध्याय 3 की शिक्षा में आकर मिल जाती है: 3.9 का यह कथन कि यज्ञ के रूप में किया गया कर्म बाँधता नहीं, यहाँ एक पूर्ण वर्गीकरण में व्यापक रूप ले रहा है — अर्पण के रूप में किया गया कर्म चाहे जो भी रूप ले, वह एक ही श्रेणी का है, और उस श्रेणी को समझना ही मुक्त करता है, न कि उसके भीतर किसी विशेष विधि में निपुणता पाना। ब्रह्मणो मुखे — “ब्रह्म के मुख में” — इन सभी अर्पणों में से हर एक को एक ही अग्नि में प्रवेश करते हुए चित्रित करता है। मुक्त करने वाली चीज़ श्रेणी को देखना है, विधि को पूर्ण बनाना नहीं; इसीलिए गीता 4.33 फिर ज्ञान को इन सबसे ऊपर रख सकता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

evaṃ bahu-vidhā yajñāएवं बहु-विधा यज्ञा
इस प्रकार अनेक प्रकार के यज्ञ (evam + bahu-vidhāḥ + yajñāḥ)
vitatā brahmaṇo mukheवितता ब्रह्मणो मुखे
ब्रह्म के मुख में फैले हुए हैं (vitatāḥ + brahmaṇaḥ + mukhe)
karma-jān viddhi tān sarvānकर्म-जान् विद्धि तान् सर्वान्
उन सबको कर्म से उत्पन्न जानो (karma-jān + viddhi + tān + sarvān)
evaṃ jñātvā vimokṣyaseएवं ज्ञात्वा विमोक्ष्यसे
ऐसा जानकर तुम मुक्त हो जाओगे (evam + jñātvā + vimokṣyase)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

This verse does two jobs the surrounding text doesn’t ask it to combine: it closes the twenty-verse catalogue that opened at verse 25, and it opens the case for wisdom’s supremacy that verse 33 makes explicit. “Know that all these are born of action” looks backward at everything just listed; “thus knowing thou shalt be free” looks forward to why knowledge, not any item on that list, is about to be named the more important thing. A single verse is doing the work of a chapter break.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • ध्यान दें कि कब आपके जीवन का कोई एक क्षण दोहरा काम कर रहा होता है — प्रयास के एक चरण को समाप्त करते हुए चुपचाप अगले की नींव भी रख रहा होता है। आपने अभी जो पूरा किया उसे नाम देना और वह जो रास्ता खोल रहा है उसे भी नाम देना, एक ही साँस में — यही वह तरीका है जिससे बदलाव सचमुच आत्मसात होते हैं, बजाय इसके कि वे बिना ध्यान दिए एक-दूसरे में धुँधले होकर घुल जाएँ।

व्यावसायिक

  • एक अच्छी समीक्षा-बैठक या परियोजना का समापन एक साथ दो काम करता है — वह अभी पूरे हुए सारे काम का लेखा-जोखा देता है और आगे की दिशा भी तय करता है; उस बैठक को एक सच्चे मोड़ की तरह देखें, न कि केवल पिछले काम की समीक्षा या केवल नए काम की शुरुआत की तरह, क्योंकि केवल एक आधा हिस्सा करने से वह अवसर व्यर्थ चला जाता है।

परिवार और समाज

  • एक अकेली ईमानदार बातचीत किसी पुरानी शिकायत को समाप्त भी कर सकती है और आगे के लिए बेहतर समझ का द्वार भी खोल सकती है — इसे दो अलग-अलग बातचीतों में न बाँटें जिन्हें आप टालते रहें; समापन और नई शुरुआत को सचमुच असर दिखाने के लिए अक्सर एक ही साँस में होना पड़ता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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