4.25

संस्कृत

दैवमेवापरे यज्ञं योगिनः पर्युपासते । ब्रह्माग्नावपरे यज्ञं यज्ञेनैवोपजुह्वति ॥

daivam evāpare yajñaṃ yoginaḥ paryupāsate brahmāgnāv apare yajñaṃ yajñenaivopajuhvati

अनुवाद

कुछ योगी देवताओं के लिए ही यज्ञ करते हैं, और कुछ अन्य ब्रह्म की अग्नि में यज्ञ के द्वारा ही यज्ञ की आहुति देते हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह श्लोक उस सूची को आरंभ करता है जिसकी भूमिका श्लोक 24 बाँधता है: कुछ योगी “देवताओं” को, यानी श्लोक 12 के देवों को, यज्ञ अर्पित करते हैं, और कुछ अपना यज्ञ सीधे सनातन ब्रह्म की अग्नि में अर्पित करते हैं — यह एक ही मूल कर्म है, जिसे समझ के दो अलग-अलग स्तरों पर बताया गया है: बाहरी देव-पूजा और अधिक सीधा, अद्वैत अर्पण।

इन दोनों को सच्चे और झूठे के रूप में ऊँचा-नीचा नहीं ठहराया गया है, बल्कि बाहरी और भीतरी के रूप में रखा गया है: देवताओं को अर्पित यज्ञ और “ब्रह्म में यज्ञ द्वारा अर्पित यज्ञ” एक ही भाव हैं, बस अलग-अलग गहराई पर। इस सूची का उद्देश्य (देखें गीता 4.30) व्यापकता दिखाना है, ऊँच-नीच का क्रम नहीं — गीता 4.33 तक।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

daivam evāpare yajñaṃदैवं एवापरे यज्ञं
कुछ योगी देवताओं के लिए ही यज्ञ (daivam + eva + apare + yajñam)
yoginaḥ paryupāsateयोगिनः पर्युपासते
योगी उपासना करते हैं (yoginaḥ + paryupāsate)
brahmāgnāv apare yajñaṃब्रह्माग्नाव् अपरे यज्ञं
दूसरे ब्रह्म रूपी अग्नि में यज्ञ (brahma-agnau + apare + yajñam)
yajñenaivopajuhvatiयज्ञेनैवोपजुह्वति
यज्ञ के द्वारा ही आहुति देते हैं (yajñena + eva + upajuhvati)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Two very different orientations sit in the same verse — sacrifice offered outward to the gods, and sacrifice poured directly into the fire of the Absolute — and Krishna ranks neither over the other here. That patience is deliberate: the catalogue runs another five verses gathering every variant before verse 33 finally states which is best. Naming the full range before judging any part of it is its own discipline, one most people skip when they form an opinion after hearing only the first option.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • किसी लक्ष्य तक पहुँचने का कौन-सा तरीका आपके लिए 'सही' है, यह तय करने से पहले कोशिश करें कि पहले उपलब्ध तरीकों की पूरी शृंखला को पहचान लें — जैसे यह श्लोक एक विकल्प को बिना उसका दर्जा तय किए गिनाता है और निर्णय को तब तक रोके रखता है जब तक पूरी तस्वीर का और हिस्सा सामने न आ जाए। केवल पहला विकल्प सुनकर बनाई गई राय दूसरे विकल्पों से सामना होने पर शायद ही टिक पाती है।

व्यावसायिक

  • किसी डिज़ाइन समीक्षा में, जो पहला प्रस्ताव रखा जाए उसे दर्जा देने से बचें — किसी को भी सबसे अच्छा ठहराने से पहले तरीकों की पूरी शृंखला को सामने आने दें, जैसे यह श्लोक कई और श्लोकों तक अपना निर्णय रोके रखता है। जल्दी दर्जा तय कर देना चुपचाप उन विकल्पों को बंद कर देता है जिनकी अभी तक किसी ने वास्तव में तुलना ही नहीं की है।

परिवार और समाज

  • जब आपका कोई करीबी किसी बात को सँभालने का अपना ऐसा तरीका बताए जो आपका तरीका नहीं है, तो उसे कमतर मानने का निर्णय तब तक रोके रखें जब तक आपने वास्तव में उपलब्ध तरीकों की पूरी शृंखला न सुन ली हो — जिसमें आपका अपना तरीका भी ईमानदारी से उनके तरीके के बराबर रखा गया हो, न कि अपने-आप उससे ऊपर।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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