संस्कृत
निराशीर्यतचित्तात्मा त्यक्तसर्वपरिग्रहः । शारीरं केवलं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम् ॥
nirāśīr yata-cittātmā tyakta-sarva-parigrahaḥ śārīraṃ kevalaṃ karma kurvan nāpnoti kilbiṣam
अनुवाद
जो किसी भी चीज़ की आशा नहीं रखता, जिसका चित्त और आत्मा संयमित हैं, जिसने सब परिग्रह त्याग दिए हैं, वह केवल शरीर से कर्म करता हुआ पाप को प्राप्त नहीं होता।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यह श्लोक 20वें श्लोक में खींचे गए चित्र में एक और विशेषता जोड़ता है: ऐसा व्यक्ति “केवल शरीर से” कर्म करता है, उसने संग्रह की हर लालसा त्याग दी है और मन तथा आत्मा को वश में कर लिया है, और इस प्रकार कर्म करते हुए उसे कोई पाप नहीं लगता। यह वही व्यक्ति है जो 20वें श्लोक में है, पर अब उसका वर्णन इस दृष्टि से किया गया है कि उसने क्या छोड़ा है, न कि उसने क्या पाया है। शारीरं केवलं कर्म — “केवल शरीर का कर्म” — का अर्थ है ऐसा कर्म जिसमें अंग तो लगे रहते हैं, पर संग्रह करने वाली इच्छा नहीं लगती; किसी “मैं” के लिए कुछ भी बटोरा नहीं जा रहा। यही त्यक्त-सर्व-परिग्रह का ठोस रूप है — हर प्रकार की पकड़ को छोड़ देना।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- nirāśīrनिराशीः
- कामना से रहित (nir-āśīḥ)
- yata-cittātmāयत-चित्तात्मा
- जिसने मन और आत्मा को वश में किया है (yata-citta-ātmā)
- tyakta-sarva-parigrahaḥत्यक्त-सर्व-परिग्रहः
- जिसने सारे परिग्रह त्याग दिए हैं (tyakta-sarva-parigrahaḥ)
- śārīraṃ kevalaṃ karmaशारीरं केवलं कर्म
- केवल शरीर से होने वाला कर्म (śārīram + kevalam + karma)
- kurvanकुर्वन्
- करते हुए
- nāpnoti kilbiṣamनाप्नोति किल्बिषं
- पाप को प्राप्त नहीं होता (na + āpnoti + kilbiṣam)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
“Performing action by the body alone” is a striking phrase: it locates the entire remaining engagement in the physical, mechanical layer, implying mind and self have already been withdrawn from the transaction of the act. This is describing a kind of doing that carries no psychological investment left in it at all — hands moving without the self being staked on how it turns out.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- आज कोई एक रोज़मर्रा का काम 'केवल शरीर से' करके देखें — हाथ और ध्यान उसमें लगे हों, पर उसका नतीजा कैसा निकलता है, इस पर आपके आत्म-मूल्य का ज़रा भी दाँव न लगा हो — और ग़ौर करें कि वही काम कितना हल्का लगता है।
व्यावसायिक
- किसी पूरी तरह यांत्रिक काम के लिए, जैसे नियमित रिपोर्टिंग या डिप्लॉयमेंट का कोई बार-बार दोहराया जाने वाला चरण, नतीजे में अपने अहं का दाँव जान-बूझकर न लगाएँ — उसे अपने हाथों से कुशलता के साथ करें, अपने आत्म-मूल्य को परिणाम से जोड़े बिना।
परिवार और समाज
- परिवार के कुछ दायित्व, कोई घरेलू काम या कोई नियमित मुलाक़ात, तब बेहतर ढंग से निभते हैं जब आप उन्हें कुशलता से करें और अपना यह भाव कि आपको प्यार किया जाता है या आपकी क़द्र होती है, इस बात पर न टिकाएँ कि उन्हें किस तरह लिया जाता है — कर्म करें, पर परिणाम पर ख़ुद को दाँव पर न लगाएँ।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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