संस्कृत
कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं बोद्धव्यं च विकर्मणः । अकर्मणश्च बोद्धव्यं गहना कर्मणो गतिः ॥
karmaṇo hy api boddhavyaṃ boddhavyaṃ ca vikarmaṇaḥ akarmaṇaś ca boddhavyaṃ gahanā karmaṇo gatiḥ
अनुवाद
कर्म का स्वरूप भी जानना चाहिए, विकर्म का स्वरूप भी जानना चाहिए और अकर्म का स्वरूप भी जानना चाहिए, क्योंकि कर्म की गति गहन है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
कृष्ण तीन बातें गिनाते हैं जिन्हें समझना ज़रूरी है, केवल दो नहीं: कर्म, गलत या निषिद्ध कर्म (विकर्म), और अकर्म। यह तीन तरह का भेद है, कोई सीधा-सादा दो-तरफ़ा बँटवारा नहीं। वे कर्म के मार्ग को ही “रहस्यमय” कहते हैं। इससे कर्मयोग को किसी सरल सूत्र की तरह पढ़ना कठिन हो जाता है; अभी जो पहेली रखी गई है, उसका वास्तविक हल श्लोक 18 में मिलता है। गहना गतिः — “यह मार्ग घनी झाड़ी जैसा है” — यह कृष्ण की अपनी चेतावनी है कि यह विषय नारों में नहीं समाता। इस जोड़ी में विकर्म (मर्यादा का उल्लंघन करने वाला कर्म) जोड़ देने से विश्लेषण ईमानदार बना रहता है: हर कर्म अर्पित करने योग्य नहीं होता, और कौन-सा कर्म कैसा है, यह पहचानना भी इसी साधना का हिस्सा है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- karmaṇo hy api boddhavyaṃकर्मणो ह्य् अपि बोद्धव्यं
- कर्म का स्वरूप भी जानना चाहिए (karmaṇaḥ + hi + api + boddhavyam)
- boddhavyaṃ ca vikarmaṇaḥबोद्धव्यं च विकर्मणः
- और विकर्म का भी जानना चाहिए (boddhavyam + ca + vikarmaṇaḥ)
- akarmaṇaś ca boddhavyaṃअकर्मणश् च बोद्धव्यं
- और अकर्म का भी जानना चाहिए (akarmaṇaḥ + ca + boddhavyam)
- gahanā karmaṇo gatiḥगहना कर्मणो गतिः
- कर्म की गति गहन है (gahanā + karmaṇaḥ + gatiḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Adding vikarma turns what looked like a single opposition — action versus inaction — into a three-term field. That means an adequate account of action needs a second, independent axis: not just whether you acted, but whether the acting itself was rightly done. Collapsing those two questions into one is exactly the kind of confusion this verse is warning is possible even for the wise.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- अपने निर्णयों का मूल्यांकन करते समय हर बात को 'मैंने कर्म किया या नहीं' तक सीमित न करें — एक दूसरा, स्वतंत्र प्रश्न भी पूछें: आपने कर्म किया या नहीं, इससे अलग, क्या वह कर्म अपने आप में सही था।
व्यावसायिक
- किसी निर्णय या घटना की समीक्षा करते समय 'क्या टीम ने समय पर कदम उठाया' को 'क्या उठाया गया कदम सही था' से अलग रखें — देरी और गलत कर्म को एक ही चूक मानकर मिला देने से यह छिप जाता है कि असली समस्या कहाँ थी।
परिवार और समाज
- जब कोई विवाद हो, तो इस बात को कि किसी ने कुछ किया या नहीं, इस बात से अलग रखें कि जो उसने किया वह सही था या नहीं — 'तुमने कुछ किया' की हर स्थिति को अपने आप गलत मान लेना एक वास्तविक और उपयोगी भेद को मिटा देता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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