4.16

संस्कृत

किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः । तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात् ॥

kiṃ karma kim akarmeti kavayo 'py atra mohitāḥ tat te karma pravakṣyāmi yaj jñātvā mokṣyase 'śubhāt

अनुवाद

कर्म क्या है और अकर्म क्या है — इस विषय में ज्ञानी भी मोहित हो जाते हैं। इसलिए मैं तुम्हें वह कर्म बताऊँगा, जिसे जानकर तुम अशुभ से मुक्त हो जाओगे।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

कृष्ण आगे आने वाली बात की कठिनाई की ओर संकेत करते हैं: बुद्धिमान लोग भी इस विषय में भ्रमित हैं कि कर्म किसे माना जाए और अकर्म किसे। यह श्लोक 17-20 के विरोधाभासों से पहले एक सोचा-समझा आलंकारिक विराम है — यह घोषणा कि यह भेद इतना सूक्ष्म है कि इसे ध्यान से खोलकर समझना पड़ता है, यह कोई स्पष्ट सामान्य बुद्धि की बात नहीं है; और तर्क के सचमुच कठिन होने से पहले यह पाठक की अपेक्षाओं को तैयार कर देता है। यह स्वीकार करना कि कवयः — कवि, द्रष्टा — भी यहाँ उलझन में हैं, इस बात का संकेत है कि अकर्म का अर्थ “न हिलना” नहीं है: पहेली यह है कि एक ही बाहरी कर्म अपने पीछे के भाव के अनुसार बाँधने वाला भी हो सकता है और मुक्त भी। गीता 4.18 इसका समाधान है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

kiṃ karma kim akarmetiकिं कर्म किं अकर्मेति
'कर्म क्या है, अकर्म क्या है?' (kim + karma + kim + akarma + iti)
kavayo 'py atra mohitāḥकवयो ऽप्य् अत्र मोहिताः
इस विषय में ज्ञानी भी भ्रमित हैं (kavayaḥ + api + atra + mohitāḥ)
tat te karma pravakṣyāmiतत् ते कर्म प्रवक्ष्यामि
वह कर्म मैं तुम्हें बताऊँगा (tat + te + karma + pravakṣyāmi)
yaj jñātvā mokṣyase 'śubhātयज् ज्ञात्वा मोक्ष्यसे ऽशुभात्
जिसे जानकर तुम अशुभ से मुक्त हो जाओगे (yat + jñātvā + mokṣyase + aśubhāt)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Before resolving anything, Krishna admits the difficulty up front — even the wise are confused here. That’s a deliberate teaching technique, not just modesty: naming a distinction as genuinely hard, before explaining it, lowers a listener’s guard against feeling stupid and raises their attention for what’s actually about to be said.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप किसी को कोई सचमुच कठिन बात समझाने जा रहे हों, तो विषय में उतरने से पहले साफ़ कह दें कि यह कठिन है — उन लोगों के लिए भी जो पहले से बहुत कुछ जानते हैं। यह ईमानदारी आपको अनिश्चित दिखाने के बजाय सामने वाले का धैर्य अर्जित करती है।

व्यावसायिक

  • अपनी टीम के सामने कोई सचमुच सूक्ष्म तकनीकी भेद रखने से पहले शुरू में ही खुलकर कह दें कि अनुभवी लोग भी इसे उलझन भरा पाते हैं — इससे लोग तुरंत स्पष्टता की झूठी अपेक्षा रखने के बजाय ध्यान से सुनने के लिए तैयार होते हैं।

परिवार और समाज

  • परिवार के साथ कोई कठिन विषय उठाते समय यह कह देना कि यह केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि सभी के लिए सचमुच उलझन भरा या कठिन है, बातचीत को उपदेश के बजाय साझा प्रयास बना देता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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