4.11

संस्कृत

ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् । मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥

ye yathā māṃ prapadyante tāṃs tathaiva bhajāmy aham mama vartmānuvartante manuṣyāḥ pārtha sarvaśaḥ

अनुवाद

हे पार्थ, जो मनुष्य जिस प्रकार मेरी शरण में आते हैं, मैं उन्हें उसी प्रकार अपनाता हूँ। मनुष्य सब प्रकार से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करते हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

धार्मिक बहुलवाद का एक प्रसिद्ध श्लोक, जिसे प्रायः आगे श्लोक 25-30 में गिनाए गए मार्गों की विविधता का औचित्य माना जाता है: कोई भी कृष्ण के पास जिस भी प्रकार से आए, वे उससे उसी प्रकार मिलते हैं, क्योंकि हर मानवीय मार्ग अंततः उन्हीं तक पहुँचता है। यह एक कड़ी का काम करता है — श्लोक 5-10 के व्यक्तिगत दावों को समाप्त करता है और श्लोक 12 से आरंभ होने वाली कर्म और उसके प्रेरक कारणों की अधिक संरचनात्मक चर्चा का द्वार खोलता है। क्रिया भजामि — “मैं सहभागी होता हूँ, मैं प्रत्युत्तर देता हूँ” — इस मिलन को परस्पर बनाती है और उसे पास आने के ढंग के अनुरूप ढालती है, न कि सभी मार्गों को एक सपाट बराबरी पर ला देती है। यह भक्ति के संबंध का सबसे व्यापक कथन है: उत्तर उतना ही होता है जितना कोई पहुँचने का प्रयास करता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

ye yathā māṃ prapadyanteये यथा मां प्रपद्यन्ते
जो जिस प्रकार मेरी शरण में आते हैं (ye + yathā + mām + prapadyante)
tāṃs tathaiva bhajāmy ahamतांस् तथैव भजांय् अहं
उन्हें मैं उसी प्रकार भजता हूँ (tān + tathā + eva + bhajāmi + aham)
mama vartmānuvartanteमम वर्त्मानुवर्तन्ते
मेरे मार्ग का अनुसरण करते हैं (mama + vartma-anuvartante)
manuṣyāḥ pārtha sarvaśaḥमनुष्याः पार्थ सर्वशः
मनुष्य, हे पार्थ, सब प्रकार से (manuṣyāḥ + pārtha + sarvaśaḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The reasoning here isn’t relativism — Krishna doesn’t say all paths are equally true. He says all paths are already his, and welcome follows from that ownership, not from indifference to which path someone takes. That’s a meaningfully different foundation for tolerance than “it doesn’t matter which way you go” — it’s closer to “wherever you’re headed, you’re headed toward me.”

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • आप अपनी मान्यताओं पर दृढ़ता से टिके रहते हुए भी उन लोगों का सच्चे मन से स्वागत कर सकते हैं जो किसी दूसरे मार्ग से उसी लक्ष्य तक पहुँचते हैं — सच्ची समावेशिता के लिए यह दिखावा करना ज़रूरी नहीं कि हर मार्ग एक जैसा है, बस यह पहचानना ज़रूरी है कि सभी मार्ग एक ही मंज़िल पर आकर मिलते हैं।

व्यावसायिक

  • जब आपकी टीम किसी एक तरीके को मानक बना लेती है, तब भी आप उन सहयोगियों का स्वागत कर सकते हैं जो किसी दूसरी पद्धति या पृष्ठभूमि से आते हैं, बशर्ते आप यह देख सकें कि उनका मार्ग वास्तव में उसी परिणाम की ओर जाता है जिसे आप पाना चाहते हैं।

परिवार और समाज

  • आप परिवार के किसी सदस्य के देखभाल या आस्था व्यक्त करने के बिल्कुल अलग ढंग का सम्मान कर सकते हैं, बिना यह घोषित किए कि हर ढंग समान रूप से सही है — इतना पहचान लेना काफ़ी है कि आप दोनों का लक्ष्य एक ही मूल स्थान है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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