संस्कृत
गतसङ्गस्य मुक्तस्य ज्ञानावस्थितचेतसः । यज्ञायाचरतः कर्म समग्रं प्रविलीयते ॥
gata-saṅgasya muktasya jñānāvasthita-cetasaḥ yajñāyācarataḥ karma samagraṃ pravilīyate
अनुवाद
जिसकी आसक्ति मिट चुकी है, जो मुक्त है, जिसका चित्त ज्ञान में स्थित है और जो यज्ञ के लिए कर्म करता है, उसका सम्पूर्ण कर्म विलीन हो जाता है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
इस खंड का सारांश-दावा यह है: जो आसक्ति से मुक्त है, मुक्त हो चुका है, ज्ञान में स्थित है और कर्म को “यज्ञ के रूप में” करता है, उसका समस्त कर्म बस विलीन हो जाता है और कोई अवशेष नहीं छोड़ता। यहाँ यज्ञ शब्द एक नया काम कर रहा है। यह श्लोक 12 का कर्मकांडी यज्ञ नहीं है, बल्कि स्वयं साधारण कर्म को यज्ञ की आहुति के रूप में नए ढंग से देखना है। यही वह विचार है जिसे अगले आठ श्लोक व्यवस्थित विस्तार से विकसित करते हैं। प्रविलीयते, अर्थात् “पिघल जाता है, बिना कोई चिह्न छोड़े विलीन हो जाता है”, कर्म के अवशेष के साथ जो होता है उसके लिए इस अध्याय में आई अनेक क्रियाओं में सबसे सशक्त है। यह सीधे गीता 4.24 की ओर ले जाता है, जहाँ यह प्रकट होता है कि आहुति का प्रत्येक अंग ब्रह्म है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- gata-saṅgasya muktasyaगत-सङ्गस्य मुक्तस्य
- जिसकी आसक्ति मिट गई है, उस मुक्त पुरुष का (gata-saṅgasya + muktasya)
- jñānāvasthita-cetasaḥज्ञानावस्थित-चेतसः
- जिसका चित्त ज्ञान में स्थित है (jñāna-avasthita-cetasaḥ)
- yajñāyācarataḥ karmaयज्ञायाचरतः कर्म
- यज्ञ के लिए आचरण करने वाले का कर्म (yajñāya + ācarataḥ)
- samagraṃ pravilīyateसमग्रं प्रविलीयते
- पूरा का पूरा विलीन हो जाता है (samagram + karma + pravilīyate)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Chapter 4 doesn’t settle for stating once that liberated action leaves no residue — verse 22 said “not bound,” this verse says “melts away entirely,” and later verses will say “burned to ash.” The repetition isn’t padding: each image tests the claim from a different angle — bondage, dissolution, combustion — as if one metaphor alone couldn’t carry the whole weight of what’s being claimed about action performed without attachment.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- यदि किसी चीज़ को छोड़ देने का अपना संकल्प एक ही तरह से कहने पर टिक नहीं पाया है, तो उसे बिल्कुल अलग छवि के ज़रिए फिर से कहकर देखें — बँधा हुआ नहीं, घुला हुआ, जलकर मिटा हुआ — बजाय यह मान लेने के कि पहली बार कहने का ढंग विफल हुआ है, इसलिए लक्ष्य ही पहुँच से बाहर है।
व्यावसायिक
- जब किसी कठिन-से-समझ आने वाली प्राथमिकता की एक व्याख्या किसी हितधारक तक नहीं पहुँच रही हो, तो उसे बस और ज़ोर से न दोहराएँ — उसे बिल्कुल अलग रूपक के ज़रिए नए ढंग से प्रस्तुत करें; भीतर का विचार कई अलग-अलग छवियों में टिका रह सकता है, भले ही अकेली एक छवि असर न करे।
परिवार और समाज
- यदि आपने अपने किसी करीबी व्यक्ति से एक बार कह दिया है कि आपने कोई पुरानी नाराज़गी छोड़ दी है और उन्हें अब भी इस पर संदेह है, तो यह मान लेने के बजाय कि एक बार कहना काफ़ी होना चाहिए था, इसे किसी अलग ढंग से फिर से कहें — नए ढंग से प्रस्तुत करके दोहराना ही अक्सर वह चीज़ होती है जो सचमुच किसी को विश्वास दिलाती है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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