संस्कृत
योगिनामपि सर्वेषां मद्गतेनान्तरात्मना । श्रद्धावान्भजते यो मां स मे युक्ततमो मतः ॥
yoginām api sarveṣāṃ madgatenāntarātmanā śraddhāvān bhajate yo māṃ sa me yuktatamo mataḥ
अनुवाद
और सभी योगियों में भी, जो श्रद्धा से युक्त होकर, मुझमें लगे हुए अन्तरात्मा से मेरा भजन करता है, वह मेरे मत में सबसे श्रेष्ठ योगयुक्त है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
अध्याय का यह अंतिम श्लोक श्लोक 46 की पहले से ही ऊँची “योगी” की श्रेणी को एक कदम और सीमित करता है: सभी योगियों में वह, जिसकी अंतरात्मा विशेष रूप से कृष्ण में, भक्तिपूर्वक, स्थिर है, सबसे पूर्ण रूप से युक्त कहा गया है। यह जान-बूझकर अध्याय 7 की ओर बनाया गया एक सेतु है, जहाँ भक्ति गीता की स्पष्ट केंद्रीय थीम बन जाती है, और यह पीछे मुड़कर श्लोक 10–32 के ध्यान-संबंधी निर्देशों को नए अर्थ में रख देता है — कि वे अंततः एक भक्तिमय लक्ष्य की सेवा में हैं, न कि केवल मनोवैज्ञानिक लक्ष्य की। युक्ततम — “सबमें सबसे अधिक युक्त” — यह उत्तमावस्था का विशेषण भक्त पर रखा गया है, ध्यान करने वाले या तपस्वी पर नहीं। अध्याय 7–12 इसी एक पंक्ति का विस्तार हैं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- yoginām api sarveṣāṃयोगिनां अपि सर्वेषां
- सभी योगियों में भी (yoginām + api + sarveṣām)
- madgatenāntarātmanāमद्गतेनान्तरात्मना
- मुझमें लगी हुई अन्तरात्मा से (mat-gatena + antaḥ-ātmanā)
- śraddhāvān bhajate yo māṃश्रद्धावान् भजते यो मां
- जो श्रद्धावान होकर मुझे भजता है (śraddhāvān + bhajate + yaḥ + mām)
- sa me yuktatamo mataḥस मे युक्ततमो मतः
- वह मेरे मत में सबसे श्रेष्ठ योगी है (saḥ + me + yuktatamaḥ + mataḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Read backward, this verse reveals the chapter’s actual shape: a series of ever-narrower superlatives — equanimity toward people (v9), a unified vision of self in all beings (v29), the “perfect” yogi (v32), the yogi ranked above other paths (v46), and now the best among yogis specifically. Each verse looked like a standalone definition when it appeared; only the final one shows they were all steps of one continuous funnel toward a single, most specific point.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप धीरे-धीरे किए गए आत्म-सुधार के किसी लंबे दौर को पीछे मुड़कर देखें, तो जाँचिए कि क्या वे अलग-अलग कदम वास्तव में किसी एक निश्चित दिशा की ओर लगातार बढ़ता हुआ एक ही सिलसिला थे, न कि आपस में असंबद्ध प्रयासों की एक शृंखला — यह पैटर्न अक्सर पीछे मुड़कर देखने पर ही दिखाई देता है, उस बिंदु से जहाँ आप अंततः पहुँचते हैं।
व्यावसायिक
- किसी प्रोजेक्ट के इतिहास की समीक्षा करते समय यह देखें कि क्या शुरुआती निर्णय चुपचाप शुरू से ही वास्तविक अंतिम दिशा की ओर सिमट रहे थे, भले ही उस समय हर निर्णय एक स्वतंत्र चुनाव जैसा लगा हो — यह जोड़ने वाला सूत्र आमतौर पर पीछे मुड़कर देखने पर ही, अंतिम बिंदु से ही दिखाई देता है।
परिवार और समाज
- जब आप इस पर विचार करें कि वर्षों के दौरान कोई रिश्ता कैसे गहरा हुआ, तो ध्यान दें कि जो अलग-अलग व्यक्तिगत क्षण लगे, वे शायद वास्तविक निकटता की ओर लगातार बढ़ता हुआ एक ही सिलसिला थे — एक ऐसा पैटर्न जो उन छोटे-छोटे कदमों को जीते समय शायद ही कभी दिखाई देता है, केवल वहीं से दिखता है जहाँ आप अंत में पहुँचते हैं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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