6.28

संस्कृत

युञ्जन्नेवं सदाऽऽत्मानं योगी विगतकल्मषः । सुखेन ब्रह्मसंस्पर्शमत्यन्तं सुखमश्नुते ॥

yuñjann evaṃ sadātmānaṃ yogī vigatakalmaṣaḥ sukhena brahmasaṃsparśam atyantaṃ sukham aśnute

अनुवाद

इस प्रकार अपने आप को सदा योग में लगाता हुआ, पापों से मुक्त योगी सहज ही ब्रह्म के स्पर्श से मिलने वाले असीम सुख को भोगता है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह श्लोक श्लोक 10 से आरम्भ हुए व्यावहारिक ध्यान-खण्ड को समाप्त करता है, और लगभग ठीक वैसी ही शब्दावली दोहराता है जिससे वह खण्ड आरम्भ हुआ था — “सदा आत्मा को युक्त करते हुए” वाली वही रचना, जो श्लोक 15 में फिर से प्रयुक्त हुई है — यह एक सोची-समझी टेक है जो खण्ड की पूर्णता को चिह्नित करती है। श्लोक 29 से पाठ विधि से हटकर उसके फलस्वरूप प्राप्त होने वाली दृष्टि की ओर मुड़ता है। ब्रह्मसंस्पर्श — “ब्रह्म का स्पर्श” — परम सत्ता के साथ सम्पर्क के लिए एक दुर्लभ, लगभग स्पर्शगम्य पद है; सुखेन, अर्थात् “सहज ही”, बताता है कि श्लोक 10–27 की साधना ने इसे बिना किसी प्रयास के सुलभ बना दिया है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

yuñjann evaṃ sadātmānaṃयुञ्जन्न् एवं सदात्मानं
इस प्रकार सदा अपने को योग में लगाते हुए (yuñjan + evam + sadā + ātmānam)
yogī vigatakalmaṣaḥयोगी विगतकल्मषः
पापरहित योगी (yogī + vigata-kalmaṣaḥ)
sukhena brahmasaṃsparśamसुखेन ब्रह्मसंस्पर्शं
सहज ही ब्रह्म के स्पर्श-रूप (sukhena + brahma-saṃsparśam)
atyantaṃ sukham aśnuteअत्यन्तं सुखं अश्नुते
असीम सुख का अनुभव करता है (atyantam + sukham + aśnute)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The repeated phrase isn’t incidental — it functions as a formal bookend, the text’s own way of announcing “this section is finished” before moving on to a different kind of teaching. A deliberate structural signal like this is often more useful than it looks: naming the end of a phase, rather than letting it dissolve ambiguously into the next one, is itself part of doing the phase well.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप कोई लंबा व्यक्तिगत प्रयास पूरा करें — अभ्यास का कोई क्रम, कोई कठिन परियोजना, अनुशासन का कोई दौर — तो उसके अंत को स्पष्ट रूप से चिह्नित करें, न कि उसे आगे आने वाली किसी भी चीज़ में धुँधला होकर घुल जाने दें। एक स्पष्ट समापन आपको सचमुच यह समझने में मदद करता है कि आपने क्या रचा है।

व्यावसायिक

  • जब किसी परियोजना का कोई चरण पूरा हो, तो उसे स्पष्ट रूप से समाप्त करें — एक समीक्षा बैठक, एक सारांश, एक सोचा-समझा हस्तांतरण — न कि टीम को सीधे अगले काम की ओर बह जाने दें। अंत को नाम देना उस चरण को अच्छी तरह पूरा करने का हिस्सा है, कोई वैकल्पिक औपचारिकता नहीं।

परिवार और समाज

  • जब आपके किसी करीबी के साथ कोई कठिन दौर बीत जाए — कोई सुलझ चुका विवाद, देखभाल का कोई समय जो अब पूरा हो गया हो — तो उसके अंत को बिना चिह्नित किए फीका पड़ने देने के बजाय उसे खुलकर स्वीकार करें। उसे नाम देना आप दोनों के लिए उस अध्याय को पूरा कर देता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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