6.20

संस्कृत

यत्रोपरमते चित्तं निरुद्धं योगसेवया । यत्र चैवात्मनाऽऽत्मानं पश्यन्नात्मनि तुष्यति ॥

yatroparamate cittaṃ niruddhaṃ yogasevayā yatra caivātmanātmānaṃ paśyann ātmani tuṣyati

अनुवाद

जहाँ योग के अभ्यास से निरुद्ध हुआ चित्त शान्त हो जाता है, और जहाँ आत्मा से आत्मा को देखता हुआ वह आत्मा में ही सन्तुष्ट रहता है;

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यहाँ से चार श्लोकों (20–23) की एक शृंखला शुरू होती है, जो बार-बार आने वाली “जिसमें… जिसमें…” की संरचना पर बनी है। हर उपवाक्य उसी एक अवस्था का एक और वर्णन जोड़ता जाता है, और अंत में श्लोक 23 उसे नाम देता है। “आत्मा के द्वारा आत्मा को देखते हुए” वाला वाक्यांश श्लोक 5 के व्याकरण को हूबहू दोहराता है — आत्मा अपनी ही दृष्टि का साधन भी है और विषय भी। योग-सेवा — “योग की सेवा”, यानी अभ्यास को सेवा-टहल के रूप में देखना — इस साधना को कुछ ऐसा मानती है जिसकी देखभाल की जाती है, जिसे हासिल नहीं किया जाता। गीता 6.25 ज़ोर देकर कहेगा कि यह विश्राम शनैः शनैः, यानी धीरे-धीरे, आता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

yatroparamate cittaṃयत्रोपरमते चित्तं
जहाँ चित्त शान्त हो जाता है (yatra + uparamate + cittam)
niruddhaṃ yogasevayāनिरुद्धं योगसेवया
योग के अभ्यास से निरुद्ध (niruddham + yoga-sevayā)
yatra caivātmanātmānaṃयत्र चैवात्मनात्मानं
और जहाँ आत्मा द्वारा आत्मा को (yatra + ca + eva + ātmanā + ātmānam)
paśyann ātmani tuṣyatiपश्यन्न् आत्मनि तुष्यति
देखते हुए आत्मा में ही सन्तुष्ट रहता है (paśyan + ātmani + tuṣyati)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Verses 20 through 23 are built as one long sentence in slow motion — each “wherein” clause adds another feature of the same state before verse 23 finally gives it a name. It’s an unusual rhetorical choice: describe the destination in increasing detail across four full verses before saying what it’s called, trusting the reader to recognize it before being told.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जिस मनःस्थिति की ओर आप बढ़ना चाहते हैं, उसे पहचानने और उसकी ओर बढ़ने से पहले आपके पास उसके लिए सही शब्द होना ज़रूरी नहीं है — कभी-कभी उसका पर्याप्त ठोस ब्योरे के साथ वर्णन करना आपको उसके उतना निकट ले जाता है, जितना समय से पहले उसे नाम देना नहीं ले जाता।

व्यावसायिक

  • जब आप अपनी टीम के सामने कोई दृष्टि रखते हैं, तो उसे कोई नाम या नारा देने से पहले ही आप ठोस, परत-दर-परत वर्णन के ज़रिए — कि वह रोज़मर्रा में कैसी दिखती है — लोगों में उसकी पहचान बना सकते हैं। जब लोग उस चीज़ को पहले से पहचानने लगते हैं, तब उसका नाम कहीं बेहतर असर करता है।

परिवार और समाज

  • आप किसी रिश्ते को जैसा महसूस होते देखना चाहते हैं, उसके लिए एकदम सही शब्द पाने से पहले भी आप सामने वाले व्यक्ति से उसका ठोस वर्णन करना शुरू कर सकते हैं — पहले सही नाम खोजने की बजाय विशिष्ट, परत-दर-परत वर्णन अक्सर आपको वहाँ जल्दी पहुँचा देता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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