संस्कृत
यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता । योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः ॥
yathā dīpo nivātastho neṅgate sopamā smṛtā yogino yatacittasya yuñjato yogam ātmanaḥ
अनुवाद
जैसे वायुरहित स्थान में रखा दीपक हिलता-डुलता नहीं, वही उपमा उस योगी के लिए कही गई है जिसका चित्त संयमित है और जो आत्मा के योग में लगा हुआ है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
वायुरहित स्थान में रखे दीपक की उपमा इस अध्याय का सबसे अधिक उद्धृत किया जाने वाला बिंब है, और यह प्रसिद्धि इसे केवल काव्यात्मक होने के कारण नहीं, बल्कि सटीक होने के कारण मिली है: यह प्रकाश के अभाव वाली स्थिरता नहीं, बल्कि बाहरी विक्षोभ के अभाव वाली स्थिरता है — लौ अब भी जल रही है, अब भी सक्रिय है, बस अविचलित है। यह भेद उस ग्रंथ के लिए महत्त्वपूर्ण है जिसने साढ़े पाँच अध्याय कर्म से पीछे हटने के विरुद्ध तर्क देने में लगाए हैं। लौ जलती रहती है; केवल हवा अनुपस्थित है। यह बिंब गीता 6.34 में अर्जुन की प्रति-उपमा का उत्तर पहले ही दे देता है — अप्रशिक्षित मन हवा के समान है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- yathā dīpo nivātasthoयथा दीपो निवातस्थो
- जैसे वायुरहित स्थान में रखा दीपक (yathā + dīpaḥ + nivāta-sthaḥ)
- neṅgate sopamā smṛtāनेङ्गते सोपमा स्मृता
- नहीं डगमगाता — यही उपमा कही गई है (na + iṅgate + sā + upamā + smṛtā)
- yogino yatacittasyaयोगिनो यतचित्तस्य
- संयमित चित्त वाले योगी की (yoginaḥ + yata-cittasya)
- yuñjato yogam ātmanaḥयुञ्जतो योगं आत्मनः
- आत्मा के योग में लगे हुए (yuñjataḥ + yogam + ātmanaḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
The lamp simile earns its fame by being precise rather than merely pretty: the flame isn’t extinguished, it’s simply undisturbed by wind. That distinction is doing real work for a text that has spent five and a half chapters arguing against withdrawal from action — the steadiness being described is protection from disturbance, not the absence of activity.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
Site Commentary — Second Reading
The simile’s load-bearing word is nivāta — windless — a description of the place, not of the flame’s own effort or willpower. The lamp isn’t steady because it’s trying hard to hold still; it’s steady because it has been put somewhere the wind can’t reach it. Read literally, the verse argues less for heroic inner discipline than for engineering your conditions — the seat, the hour, the company you keep — so that steadiness becomes the default rather than a feat performed against resistance.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप उस शांति की कल्पना करें जिस तक आप पहुँचना चाहते हैं, तो रुक जाने की कल्पना न करें — एक ऐसी लौ की कल्पना करें जो अब भी जल रही है, बस अविचलित है। लक्ष्य कम महसूस करना या कम करना नहीं है; लक्ष्य है पूरी तरह सक्रिय बने रहना, और साथ ही उन चीज़ों से सुरक्षित रहना जो अन्यथा आपको बिखेर देतीं।
व्यावसायिक
- एक शांत, उच्च प्रदर्शन करने वाली टीम वह नहीं है जिसमें गतिविधि धीमी पड़ गई हो — वह ऐसी टीम है जिसमें काम पूरी गति से चलता रहता है, और साथ ही वह उन व्यवधानों (पुनर्गठन, अस्पष्ट प्राथमिकताएँ, शोर) से सुरक्षित रहती है जो अन्यथा उसका ध्यान बिखेर देते। गति की नहीं, उस सुरक्षा-कवच की रक्षा करें।
परिवार और समाज
- संकट में घिरे किसी व्यक्ति के लिए भावनात्मक रूप से स्थिर रहने का अर्थ सुन्न हो जाना या मन से अलग हो जाना नहीं है — इसका अर्थ है पूरी तरह उपस्थित और जुड़े रहना, और साथ ही उसके तूफ़ान को अपना संतुलन न बिगाड़ने देना, जैसे वायुरहित स्थान में अब भी जलती हुई लौ।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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