संस्कृत
युञ्जन्नेवं सदाऽऽत्मानं योगी नियतमानसः । शान्तिं निर्वाणपरमां मत्संस्थामधिगच्छति ॥
yuñjann evaṃ sadātmānaṃ yogī niyatamānasaḥ śāntiṃ nirvāṇaparamāṃ matsaṃsthām adhigacchati
अनुवाद
इस प्रकार अपने मन को वश में रखने वाला योगी सदा अपने आत्मा को योग में लगाते हुए उस शान्ति को प्राप्त करता है जो निर्वाण में परिणत होती है और मुझमें स्थित है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यह श्लोक 11–14 के शारीरिक निर्देशों वाले खंड को उसके गंतव्य का नाम देकर पूरा करता है: वह शांति जिसका सर्वोच्च बिंदु निर्वाण है और जो कृष्ण में स्थित है (मत्संस्थाम्)। यहाँ निर्वाण शब्द सचमुच अलग-अलग परम्पराओं को जोड़ने का काम कर रहा है — बेसेंट का “परम आनंद” एक ऐसे शब्द का अनुवाद है जो तृष्णा के बुझने के बौद्ध अर्थ से अधिक जुड़ा है, और जिसे यहाँ एक ईश्वरवादी ढाँचे में समाहित कर लिया गया है। मत्संस्था — “जिसका आधार मुझमें है” — शांति को कृष्ण में स्थित करता है, किसी अवस्था में नहीं: यही स्थान-परिवर्तन गीता 5.29 ने अध्याय 5 के अंत में किया था।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- yuñjann evaṃ sadātmānaṃयुञ्जन्न् एवं सदात्मानं
- इस प्रकार सदा अपने को योग में लगाता हुआ (yuñjan + evam + sadā + ātmānam)
- yogī niyatamānasaḥयोगी नियतमानसः
- संयत मन वाला योगी (yogī + niyata-mānasaḥ)
- śāntiṃ nirvāṇaparamāṃशान्तिं निर्वाणपरमां
- निर्वाण में परिणत होने वाली शान्ति को (śāntim + nirvāṇa-paramām)
- matsaṃsthām adhigacchatiमत्संस्थां अधिगच्छति
- मुझमें स्थित (उस शान्ति को) प्राप्त करता है (mat-saṃsthām + adhigacchati)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Besant’s “supreme Bliss” is translating a word — nirvana — most readers associate with a different tradition’s vocabulary for the extinguishing of craving. The Gita doesn’t avoid the word; it folds it directly into a theistic frame, locating that peace in Krishna specifically (mat-samstham). The borrowed vocabulary is a reminder that the destination described here wasn’t the exclusive property of any one system even in its own era.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- यह न मान लें कि जिस अभ्यास या अंतर्दृष्टि से आपको मदद मिली, उसे वैध होने के लिए किसी एक परंपरा की शब्दावली में ही लिपटा होना चाहिए — एक ही गंतव्य का वर्णन एक से अधिक पद्धतियों की भाषा में किया जा सकता है, और उनमें से किसी का भी उस पर एकमात्र अधिकार नहीं होता।
व्यावसायिक
- जब आप किसी दूसरे विषय-क्षेत्र या किसी दूसरी कंपनी की कार्य-संस्कृति से कोई कार्य-पद्धति अपनाएँ, तो उसकी मूल शब्दावली में न उलझें — उसके पीछे की कार्य-प्रणाली को अपनी टीम की भाषा में ढालें, न कि उसकी विशेष शब्दावली को ज्यों का त्यों ले आएँ या शब्द पराए लगने के कारण उसे ठुकरा दें।
परिवार और समाज
- यदि परिवार का कोई सदस्य उसी शांति का वर्णन, जो आपने पाई है, बिलकुल अलग शब्दावली में करे — धार्मिक, धर्मनिरपेक्ष या चिकित्सकीय — तो उसके शब्दों को सुधारने के मोह से बचें। नक्शा अपरिचित लगे, तब भी गंतव्य एक ही हो सकता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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