संस्कृत
तपस्विभ्योऽधिको योगी ज्ञानिभ्योऽपि मतोऽधिकः । कर्मिभ्यश्चाधिको योगी तस्माद्योगी भवार्जुन ॥
tapasvibhyo'dhiko yogī jñānibhyo'pi mato'dhikaḥ karmibhyaś cādhiko yogī tasmād yogī bhavārjuna
अनुवाद
योगी तपस्वियों से श्रेष्ठ है, उसे ज्ञानियों से भी श्रेष्ठ माना गया है, और योगी कर्म करने वालों से भी श्रेष्ठ है। इसलिए, हे अर्जुन, तुम योगी बनो।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
कृष्ण योगी को तीन अन्य मान्य मार्गों — तपस्वियों, विद्वानों और कर्मकाण्ड करने वालों (कर्मी) — से ऊपर रखते हैं, और उसके बाद अर्जुन को इस अध्याय का सीधा आदेश देते हैं। गीता में यह उन गिने-चुने स्थानों में से एक है जहाँ कृष्ण हर आध्यात्मिक मार्ग का केवल उसकी अपनी शर्तों पर वर्णन करने के बजाय उनके बीच एक स्पष्ट क्रम बताते हैं। जिन तीनों से यह ऊपर है — तपस्वी (तप), ज्ञानी (विद्या), कर्मी (कर्मकाण्ड) — वे ठीक वही तीन हैं जिन्हें गीता 4.28 ने यज्ञ के रूपों के रूप में गिनाया था। योगी उस सबको एक साथ जोड़ता है जो इनमें से हर एक अलग-अलग करता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- tapasvibhyo'dhiko yogīतपस्विभ्योऽधिको योगी
- योगी तपस्वियों से श्रेष्ठ है (tapasvibhyaḥ + adhikaḥ + yogī)
- jñānibhyo'pi mato'dhikaḥज्ञानिभ्योऽपि मतोऽधिकः
- ज्ञानियों से भी श्रेष्ठ माना गया है (jñānibhyaḥ + api + mataḥ + adhikaḥ)
- karmibhyaś cādhiko yogīकर्मिभ्यश् चाधिको योगी
- और योगी कर्मकाण्डियों से भी श्रेष्ठ है (karmibhyaḥ + ca + adhikaḥ + yogī)
- tasmād yogī bhavārjunaतस्माद् योगी भवार्जुन
- इसलिए हे अर्जुन, तुम योगी बनो (tasmāt + yogī + bhava + arjuna)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
This ranking arrives at a very particular moment — right after a long stretch of Arjuna’s doubt has just been resolved, and right before the chapter’s direct command. Krishna doesn’t move straight from reassurance to imperative; he inserts a statement of the path’s superior value first, as if closing an argument with “and here’s why this is worth doing” immediately before saying “so do it.” It’s persuasion structure as much as philosophical claim.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप अपने इस संदेह को सुलझा लें कि कोई कठिन अभ्यास निभाते रहने योग्य है या नहीं, तो उस निर्णय को और पक्का करें — स्पष्ट शब्दों में कहें कि जिन विकल्पों पर आपने विचार किया था, उनकी तुलना में यह आपके लिए अधिक मूल्यवान क्यों है। फिर से प्रतिबद्ध होने से ठीक पहले मूल्य का यह स्पष्ट कथन निर्णय को केवल संदेह सुलझाने की तुलना में कहीं अधिक टिकाऊ बनाता है।
व्यावसायिक
- अपनी टीम से किसी कठिन पहल के लिए प्रतिबद्धता माँगने से पहले, केवल उनकी आपत्तियाँ दूर करके सीधे अनुरोध पर न आ जाएँ — पहले स्पष्ट रूप से बताएँ कि यह रास्ता अन्य विकल्पों से अधिक मूल्यवान क्यों है। अनुरोध से ठीक पहले मूल्य को शब्द देना केवल आश्वासन देने की तुलना में प्रतिबद्धता को अधिक मज़बूत करता है।
परिवार और समाज
- जब आप किसी अपने को किसी साझा योजना के बारे में उसकी हिचकिचाहट से बाहर निकाल चुके हों, तो बातचीत को इस तरह समाप्त करें कि उसकी प्रतिबद्धता माँगने से ठीक पहले स्पष्ट शब्दों में कहें कि यह रास्ता अन्य विकल्पों से अधिक महत्त्वपूर्ण क्यों है — यह बात संदेह सुलझाकर बिना कुछ कहे आगे बढ़ जाने की तुलना में कहीं अधिक गहराई से असर करती है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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