संस्कृत
तत्र तं बुद्धिसंयोगं लभते पौर्वदेहिकम् । यतते च ततो भूयः संसिद्धौ कुरुनन्दन ॥
tatra taṃ buddhisaṃyogaṃ labhate paurvadehikam yatate ca tato bhūyaḥ saṃsiddhau kurunandana
अनुवाद
हे कुरुनन्दन, वहाँ वह अपने पूर्व देह की उस बुद्धि के संयोग को फिर से पा लेता है, और फिर वहीं से सिद्धि के लिए पुनः प्रयत्न करता है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यह इस व्यवस्था का फल है और श्लोक 37–38 में व्यक्त अर्जुन के सब कुछ खो देने के भय का सीधा उत्तर भी: पिछले जन्म में बना बुद्धि का संयोग नए जन्म में साथ चला आता है। कुछ भी शून्य से दोबारा नहीं सीखना पड़ता — नया प्रयास वहीं से फिर शुरू होता है, जहाँ पुराना प्रयास रुका था। बुद्धि-संयोगं पौर्वदेहिकम् — “पूर्व देह से प्राप्त बुद्धि का संयोग” — यही वास्तव में आगे जाता है: स्मृतियाँ नहीं, बल्कि विकसित हो चुकी क्षमता। योगभ्रष्ट फिर से चढ़ाई के बीच से शुरू करता है, तलहटी से नहीं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- tatra taṃ buddhisaṃyogaṃतत्र तं बुद्धिसंयोगं
- वहाँ वह उस बुद्धि-संयोग को (tatra + tam + buddhi-saṃyogam)
- labhate paurvadehikamलभते पौर्वदेहिकं
- पूर्व देह से मिला हुआ, पा लेता है (labhate + paurva-dehikam)
- yatate ca tato bhūyaḥयतते च ततो भूयः
- और वहाँ से फिर प्रयत्न करता है (yatate + ca + tataḥ + bhūyaḥ)
- saṃsiddhau kurunandanaसंसिद्धौ कुरुनन्दन
- पूर्ण सिद्धि के लिए, हे कुरुनन्दन (saṃsiddhau + kuru-nandana)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
What’s said to carry forward isn’t memory, personality, or relationships — it’s specifically buddhi-saṃyoga, the connection with understanding built through practice. That’s a narrower and more precise claim than “everything continues,” and it matters: the text isn’t promising that nothing changes, only that the one thing worth preserving — hard-won discernment — doesn’t have to be rebuilt from zero.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप किसी साधना को कुछ समय के लिए छोड़ देते हैं और बाद में उस पर लौटते हैं, तो यह न मानें कि आप शून्य से शुरू कर रहे हैं — आपने जो विवेक और समझ विकसित की थी, वह शायद ही कभी पूरी तरह मिटती है, भले ही उससे जुड़ी विशेष दिनचर्या, मनोदशा या परिस्थितियाँ उस अंतराल के बाद न बचें।
व्यावसायिक
- जब कोई व्यक्ति कुछ समय दूर रहने के बाद किसी परियोजना या भूमिका में फिर से जुड़ता है, तो यह अपेक्षा रखें कि उसकी अर्जित परख और समझ काफ़ी हद तक अब भी बनी हुई है, भले ही आसपास का संदर्भ बदल गया हो — उसे नए सिरे से शुरू करने वाले की तरह नहीं, बल्कि काम फिर से सँभालने वाले की तरह जोड़ें।
परिवार और समाज
- जब संबंध में लंबे अंतराल के बाद आप किसी से फिर जुड़ते हैं, तो भरोसा रखें कि आप दोनों ने साथ मिलकर जो सच्ची समझ बनाई थी, वह पूरी तरह मिट नहीं जाती — परिस्थितियाँ बदल गई हों तब भी, एक-दूसरे के बारे में गहरा विवेक प्रायः फिर से पाया जा सकता है, वह खोया नहीं होता।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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