6.45

संस्कृत

प्रयत्नाद्यतमानस्तु योगी संशुद्धकिल्बिषः । अनेकजन्मसंसिद्धस्ततो याति परां गतिम् ॥

prayatnād yatamānas tu yogī saṃśuddhakilbiṣaḥ anekajanmasaṃsiddhas tato yāti parāṃ gatim

अनुवाद

परन्तु जो योगी प्रयत्नपूर्वक साधना करता है, वह पापों से पूरी तरह शुद्ध होकर, अनेक जन्मों में सिद्धि पाकर, तब परम गति को प्राप्त होता है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

अनुवाद की समस्या बताएँ

व्याख्या

यहाँ श्लोक 37 से आरम्भ हुआ प्रसंग पूरे उत्तर के साथ समाप्त होता है: अनेक जन्मों तक निरन्तर किया गया प्रयत्न अन्ततः परम लक्ष्य तक पहुँचा देता है। कोई भी सच्चा प्रयास व्यर्थ नहीं जाता, परन्तु पाठ उतनी ही स्पष्टता से यह भी कहता है कि इसमें एक से अधिक जीवन लग सकते हैं — यह असफलता को लेकर अर्जुन की चिंता का सीधा और धैर्य भरा उत्तर है। अनेकजन्मसंसिद्ध — “अनेक जन्मों में पूर्ण हुआ” — गीता की शान्त, दूरगामी दृष्टि है: मोक्ष इस शर्त से बँधा नहीं है कि सब कुछ इसी शरीर में पूरा हो, और आंशिक रूप से किया गया कोई भी कार्य खोता नहीं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

अनुवाद की समस्या बताएँ

गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

prayatnād yatamānas tuप्रयत्नाद् यतमानस् तु
परन्तु प्रयत्नपूर्वक साधना करता हुआ (prayatnāt + yatamānaḥ + tu)
yogī saṃśuddhakilbiṣaḥयोगी संशुद्धकिल्बिषः
पापों से पूरी तरह शुद्ध हुआ योगी (yogī + saṃśuddha-kilbiṣaḥ)
anekajanmasaṃsiddhasअनेकजन्मसंसिद्धस्
अनेक जन्मों में सिद्ध होकर (aneka-janma-saṃsiddhaḥ)
tato yāti parāṃ gatimततो याति परां गतिं
तब परम गति को प्राप्त होता है (tataḥ + yāti + parām + gatim)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

अनुवाद की समस्या बताएँ

टीका

Site Commentary

The three qualifiers aren’t listed in arbitrary order — assiduous labor, then purification, then perfection accumulated across many births — and that sequence mirrors the actual process being described rather than just describing it. The verse’s own grammar performs the gradualism it’s teaching: effort first, then the gradual cleaning that effort produces, then, eventually and only eventually, the result.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

Site Commentary — Second Reading

“Aneka-janma” — across many births — is doing quieter work than it first appears: the claim isn’t that a single unbroken effort eventually succeeds, but that discontinuous effort, resumed again and again across gaps and failures, still accumulates toward the same result. That reframes what “not wasted” means for any real practice interrupted by illness, distraction, or years of neglect — the count that matters is the sum across every restart, not the length of an unbroken streak. Assiduous effort resumed is still assiduous effort, even when it has been broken many times before.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

इस श्लोक को अपनाएँ

पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप किसी कठिन काम में अपनी प्रगति का आकलन करें, तो जाँचिए कि कहीं आप शुरुआती चरणों — प्रयास और क्रमिक परिष्कार — को पूरा किए बिना ही अंतिम अवस्था (निपुणता, शांति, समाधान) की अपेक्षा तो नहीं कर रहे; ये चरण अंतिम परिणाम से पहले, इसी क्रम में, सचमुच होने ही होते हैं।

व्यावसायिक

  • अपनी टीम में कोई क्षमता विकसित करते समय सीधे परिपक्व परिणामों की अपेक्षा न करें — क्रम मायने रखता है: पहले निरंतर प्रयास, फिर प्रक्रिया का परिष्कार, और फिर अंततः परिणाम। इस क्रम को वैकल्पिक मान लेना ही आमतौर पर वह कारण होता है जिससे काम योजना से अधिक समय लेता है।

परिवार और समाज

  • जब आप अपने किसी करीबी व्यक्ति के साथ किसी कठिन स्थिति से गुज़र रहे हों, तो समाधान की अपेक्षा तब तक न करें जब तक शुरुआती चरणों — निरंतर प्रयास, और फिर पुराने ढर्रों की धीमी सफ़ाई — को वास्तव में घटित होने का समय न मिल गया हो। यह क्रम वैकल्पिक नहीं है, भले ही आप चाहें कि यह और जल्दी हो।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

अनुवाद की समस्या बताएँ

स्वयं से पूछें

इस श्लोक को पढ़ने से आगे ले जाने के कुछ तरीके। टिक और नोट इसी ब्राउज़र में रहते हैं।

इस श्लोक पर चिंतन करें

    खोज जारी रखें

    ← 6.44अध्याय 6 · 47 में से 456.46 →