संस्कृत
चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद् दृढम् । तस्याऽहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम् ॥
cañcalaṃ hi manaḥ kṛṣṇa pramāthi balavad dṛḍham tasyāhaṃ nigrahaṃ manye vāyor iva suduṣkaram
अनुवाद
हे कृष्ण, यह मन सचमुच चंचल है; यह मथ डालने वाला, बलवान और हठी है। मैं इसे वश में करना वायु को रोकने के समान अत्यन्त कठिन मानता हूँ।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
अर्जुन की वायु वाली उपमा श्लोक 19 की दीपक वाली उपमा का लगभग बिंदु-दर-बिंदु उत्तर है — जहाँ कृष्ण ने साधे हुए मन को ऐसी लौ बताया था जिसे हवा विचलित नहीं करती, वहीं अर्जुन बिना साधे मन को स्वयं हवा जैसा बताते हैं, एक ऐसी चीज़ जिसे आज तक किसी ने वास्तव में पकड़कर थामा नहीं है। यह केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि एक पैना तर्क है। कृष्ण की अपनी ही छवि को उन्हीं की ओर लौटा देना — मन लौ नहीं, हवा है — बहस की एक सच्ची चाल है। इसके कारण गीता 6.35 पर आने वाले उत्तर को आश्वासन नहीं, बल्कि एक विधि होना ही पड़ता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- cañcalaṃ hi manaḥ kṛṣṇaचञ्चलं हि मनः कृष्ण
- हे कृष्ण, मन सचमुच चंचल है (cañcalam + hi + manaḥ + kṛṣṇa)
- pramāthi balavad dṛḍhamप्रमाथि बलवद् दृढं
- मथ डालने वाला, बलवान और हठीला (pramāthi + balavat + dṛḍham)
- tasyāhaṃ nigrahaṃ manyeतस्याहं निग्रहं मन्ये
- उसका निग्रह मैं मानता हूँ (tasya + aham + nigraham + manye)
- vāyor iva suduṣkaramवायोः इव सुदुष्करं
- वायु को रोकने की तरह अत्यन्त कठिन (vāyoḥ + iva + su-duṣkaram)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Arjuna doesn’t counter Krishna’s flame image with a counter-argument — he counters it with another image, matching figure for figure. Answering someone’s metaphor with a better metaphor, rather than switching into abstract argument, is itself a form of respect for how the original claim was made — and it’s often the sharpest way to make a real objection land.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप किसी ऐसे विचार से असहमत हों जिसे किसी ने सजीव ढंग से रखा हो, जैसे किसी रूपक या कहानी के ज़रिए, तो अमूर्त तर्क का सहारा लेने के बजाय उसी ठोस शैली में उत्तर देने की कोशिश करें। सही ढंग से चुनी गई जवाबी छवि अक्सर आपकी असली आपत्ति को किसी रूखे खंडन की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी ढंग से सामने रखती है।
व्यावसायिक
- यदि कोई नेतृत्वकर्ता किसी सशक्त उपमा के सहारे अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करे और आप उससे असहमत हों, तो अमूर्त विरोध करने के बजाय उतना ही ठोस जवाबी उदाहरण दें। उन्हीं के तर्क के ढंग को अपनाना अक्सर अपनी बात को सचमुच सुनवाने का सबसे तेज़ रास्ता होता है।
परिवार और समाज
- जब आपका कोई क़रीबी अपनी बात किसी सजीव तुलना के ज़रिए रखे, तो सपाट 'मैं सहमत नहीं हूँ' कहने के बजाय अपना कोई ठोस उदाहरण सामने रखें। उसी शैली में तर्क करने पर बात अक्सर सुनी जाती है, जबकि अमूर्त आपत्ति को लोग प्रायः अनसुना करके आगे बढ़ जाते हैं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
स्वयं से पूछें
इस श्लोक को पढ़ने से आगे ले जाने के कुछ तरीके। टिक और नोट इसी ब्राउज़र में रहते हैं।