संस्कृत
कच्चिन्नोभयविभ्रष्टश्छिन्नाभ्रमिव नश्यति । अप्रतिष्ठो महाबाहो विमूढो ब्रह्मणः पथि ॥
kaccin nobhayavibhraṣṭaś chinnābhram iva naśyati apratiṣṭho mahābāho vimūḍho brahmaṇaḥ pathi
अनुवाद
हे महाबाहो, ब्रह्म के मार्ग में मोहित और बिना किसी आधार के, दोनों ओर से भ्रष्ट हुआ वह व्यक्ति कहीं छिन्न-भिन्न बादल की भाँति नष्ट तो नहीं हो जाता?
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
अर्जुन श्लोक 37 के प्रश्न को उसके सबसे बुरे रूप में और पैना कर देते हैं: क्या ऐसा व्यक्ति पूरी तरह दो लोकों के बीच गिर जाता है — साधारण जीवन के फल भी खो देता है, क्योंकि योग के लिए उसने उन्हें त्याग दिया था, और योग का लक्ष्य भी, क्योंकि उसे वह कभी पूरा नहीं कर पाया? “छिन्न बादल” की उपमा स्वयं अर्जुन की है, कृष्ण की नहीं — कुछ ऐसा जो बिखर जाता है और पीछे कुछ नहीं छोड़ता। उभयविभ्रष्ट — “दोनों [ओर] से गिरा हुआ” — योगभ्रष्ट की उस आशंकित स्थिति का नाम है: न कोई सांसारिक लाभ, न कोई आध्यात्मिक पहुँच। कृष्ण का पूरा उत्तर छिन्नाभ्र का, यानी बस बिखर जाने वाले बादल का, खंडन है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- kaccin nobhayavibhraṣṭaśकच्चिन् नोभयविभ्रष्टश्
- क्या वह दोनों ओर से भ्रष्ट होकर (kaccit + na + ubhaya-vibhraṣṭaḥ)
- chinnābhram iva naśyatiछिन्नाभ्रं इव नश्यति
- छिन्न-भिन्न बादल की तरह नष्ट नहीं हो जाता (chinna-abhram + iva + naśyati)
- apratiṣṭho mahābāhoअप्रतिष्ठो महाबाहो
- आश्रयहीन, हे महाबाहो (apratiṣṭhaḥ + mahā-bāho)
- vimūḍho brahmaṇaḥ pathiविमूढो ब्रह्मणः पथि
- ब्रह्म के मार्ग में मोहित (vimūḍhaḥ + brahmaṇaḥ + pathi)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Krishna never suggested anything like total dissolution — that image is Arjuna’s own invention, extrapolated from an anxious “what if” rather than anything Krishna actually said. It’s a familiar shape of worry: taking a real, modest uncertainty (what happens to incomplete effort) and imagining its most catastrophic possible ending, well past anything the actual evidence supports.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप किसी अधूरे प्रयास को लेकर चिंतित हों, तो ध्यान दें कि कहीं आपने चुपचाप एक वास्तविक पर छोटी-सी अनिश्चितता को ऐसी भयंकर आपदा में तो नहीं बदल दिया, जो आपके अपने मन की गढ़ी हुई है। छिन्न बादल जैसे परिणाम को मान लेने से पहले यह देख लें कि वास्तव में क्या कहा या दिखाया गया है।
व्यावसायिक
- जब कोई परियोजना बीच में अटक जाए और आपको पूरी विफलता का डर सताने लगे, तो जो वास्तव में पक्का हुआ है (कोई देरी, कोई कमी), उसे उस भयावह कहानी से अलग करें जो आप उसके ऊपर जोड़ रहे हैं। अटके हुए अधिकतर प्रयास उस सबसे बुरे अंत की ओर नहीं जा रहे होते, जिसकी कल्पना आपकी चिंता कराती है।
परिवार और समाज
- यदि किसी रिश्ते में आई खटास से आपको डर लगने लगे कि अब यह सुधर नहीं सकता, तो जाँचें कि यह डर वास्तव में कही या की गई किसी बात पर आधारित है, या आपकी अपनी चिंता की गढ़ी हुई सबसे बुरी स्थिति पर। कल्पित आपदा प्रायः उसके नीचे छिपी वास्तविक अनिश्चितता से कहीं बुरी होती है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
स्वयं से पूछें
इस श्लोक को पढ़ने से आगे ले जाने के कुछ तरीके। टिक और नोट इसी ब्राउज़र में रहते हैं।