6.23

संस्कृत

तं विद्याद् दुःखसंयोगवियोगं योगसंज्ञितम् । स निश्चयेन योक्तव्यो योगोऽनिर्विण्णचेतसा ॥

taṃ vidyād duḥkhasaṃyogaviyogaṃ yogasaṃjñitam sa niścayena yoktavyo yogo'nirviṇṇacetasā

अनुवाद

दुःख के संयोग से छुटकारे की इस अवस्था को ही योग के नाम से जानना चाहिए। इस योग का अभ्यास दृढ़ निश्चय के साथ और ऐसे मन से करना चाहिए जो निराश न हो।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

श्लोक 20 से चली आ रही शृंखला यहाँ एक औपचारिक परिभाषा के साथ पूरी होती है: योग दुःख-के-संयोग से वियोग है — यह उसी प्रक्रिया को काट देना है जिससे दुःख पैदा होता है, केवल किसी एक दुःख से राहत नहीं। फिर श्लोक वर्णन से निर्देश की ओर मुड़ता है: इसका अभ्यास दृढ़ निश्चय के साथ और बिना निराश हुए करना होता है, और यही बात श्लोक 37–39 में असफलता के बारे में अर्जुन के अपने प्रश्न की भूमिका तैयार करती है। दुःख-संयोग-वियोग — “दुःख-के-संयोग से वियोग” — योग को उस जुड़ाव को ही काट देने के रूप में परिभाषित करता है। अनिर्विण्ण-चेतसा, “ऐसे मन से जो हार नहीं मानता”, उस असफलता वाले प्रश्न का पूर्वाभास देता है जिससे अध्याय समाप्त होता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

taṃ vidyādतं विद्याद्
उसे जानना चाहिए (tam + vidyāt)
duḥkhasaṃyogaviyogaṃदुःखसंयोगवियोगं
दुःख के संयोग से वियोग (duḥkha-saṃyoga-viyogam)
yogasaṃjñitamयोगसंज्ञितं
जिसका नाम योग है (yoga-saṃjñitam)
sa niścayena yoktavyoस निश्चयेन योक्तव्यो
उसका अभ्यास दृढ़ निश्चय से करना चाहिए (saḥ + niścayena + yoktavyaḥ)
yogo'nirviṇṇacetasāयोगोऽनिर्विण्णचेतसा
यह योग, बिना हताश हुए मन से (yogaḥ + anirviṇṇa-cetasā)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Four verses of accumulating description finally resolve into a formal definition — and notice it’s phrased as a disjunction, a severing, not an addition. Yoga isn’t described as gaining something new; it’s the ending of the very mechanism that connects you to pain in the first place. The verse then pivots immediately from what yoga is to how to hold it — firm resolve, without despondency — a warning that anticipates the doubt Arjuna will voice about failing at exactly this in verses 37-39.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप आख़िरकार समझ लें कि आपके जीवन में कोई बदलाव वास्तव में आपसे क्या माँग रहा है, तो ध्यान दें कि क्या आपकी सोच "यह अच्छी आदत जोड़ो" से बदलकर "उस तंत्र को काट दो जो बार-बार समस्या पैदा करता रहता है" पर आ जाती है — दूसरी सोच आमतौर पर अधिक सटीक और अधिक टिकाऊ होती है, भले ही उस पर टिके रहना कठिन हो।

व्यावसायिक

  • जब आप किसी टीम में बार-बार लौटने वाली गड़बड़ी की जड़ खोज रहे हों, तो देखें कि समाधान सचमुच कोई नई प्रक्रिया जोड़ने का है या उस विशेष तंत्र को काट देने का, जो समस्या को बार-बार पैदा करता रहता है — दूसरा निदान सुनने में कम सुखद होता है, पर आमतौर पर वही वास्तव में काम करता है।

परिवार और समाज

  • यदि अच्छे इरादों के बावजूद परिवार में कोई पुराना झगड़ा बार-बार उभर आता है, तो समाधान शायद एक और नेकनीयत बातचीत नहीं है — समाधान है उस विशेष ढर्रे को पहचानना और काट देना, जो आपको बार-बार उसी दुःख से जोड़ देता है, और उस पर टिके रहने के लिए किसी एक बातचीत से कहीं अधिक दृढ़ संकल्प चाहिए।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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