संस्कृत
तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतचित्तेन्द्रियक्रियः । उपविश्यासने युञ्ज्याद्योगमात्मविशुद्धये ॥
tatraikāgraṃ manaḥ kṛtvā yatacittendriyakriyaḥ upaviśyāsane yuñjyād yogam ātmaviśuddhaye
अनुवाद
वहाँ आसन पर बैठकर, मन को एकाग्र करके और चित्त तथा इन्द्रियों की क्रियाओं को वश में रखकर, उसे आत्मा की शुद्धि के लिए योग का अभ्यास करना चाहिए।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
श्लोक 11 में बताए गए आसन का तात्कालिक लक्ष्य मन की एकाग्रता (एकाग्र) बताया गया है, और उसका घोषित उद्देश्य आत्मशुद्धि है — न शक्ति, न अनुभव, बल्कि शुद्धि। श्लोक 13–14 इसी शारीरिक निर्देश को आगे बढ़ाते हैं, और उसके बाद श्लोक 15 वास्तविक गंतव्य बताता है। आत्म-विशुद्धि — आत्मा की शुद्धि — वही सीधा-सादा लक्ष्य है जो गीता 5.11 ने कर्मयोग के लिए बताया था: यहाँ ध्यान तैयारी है, अभी लक्ष्य नहीं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- tatraikāgraṃ manaḥ kṛtvāतत्रैकाग्रं मनः कृत्वा
- वहाँ मन को एकाग्र करके (tatra + eka-agram + manaḥ + kṛtvā)
- yatacittendriyakriyaḥयतचित्तेन्द्रियक्रियः
- चित्त और इन्द्रियों की क्रियाओं को वश में रखकर (yata-citta-indriya-kriyaḥ)
- upaviśyāsane yuñjyādउपविश्यासने युञ्ज्याद्
- आसन पर बैठकर अभ्यास करे (upaviśya + āsane + yuñjyāt)
- yogam ātmaviśuddhayeयोगं आत्मविशुद्धये
- योग का, आत्मशुद्धि के लिए (yogam + ātma-viśuddhaye)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Krishna is precise about what the practice is for, and it’s worth noticing what’s left off the list: not power, not extraordinary experience, not even peace yet — purification. Verses 13-14 will add more technique before verse 15 finally names the destination; this verse is careful to fix the purpose before the method gets any more elaborate.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- जिस अनुशासन को आप विकसित कर रहे हैं, उसकी बारीकियों में गहराई से उतरने से पहले स्वयं से ईमानदारी से पूछें कि आप वास्तव में इसका अभ्यास किसलिए कर रहे हैं — यदि असली लक्ष्य चुपचाप प्रतिष्ठा, परिणाम या आप कैसे दिखते हैं, यह बन गया है, तो आपकी विधि आपके जाने बिना ही भटक जाएगी।
व्यावसायिक
- किसी प्रक्रिया को गति या दिखाई देने वाले परिणाम के लिए बेहतर बनाने से पहले उसके वास्तविक उद्देश्य — विश्वसनीयता, सटीकता, सीखना — को स्पष्ट शब्दों में फिर से दोहराएँ, ताकि जब आपकी टीम उसकी बारीकियों को निखारे, तो मापदंड चुपचाप लक्ष्य की जगह न ले ले।
परिवार और समाज
- किसी के लिए आप जिस तरह मौजूद रहते हैं — अधिक बार फ़ोन करना, अधिक सोच-समझकर उपहार देना — उसे निखारने से पहले जाँच लें कि इसके पीछे का उद्देश्य अब भी उनका कल्याण ही है, न कि स्वयं को एक अच्छा परिवारजन महसूस करने की आपकी अपनी ज़रूरत। तरीके को चमकाने से पहले उद्देश्य को ठीक करें।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
स्वयं से पूछें
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