6.42

संस्कृत

अथवा योगिनामेव कुले भवति धीमताम् । एतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म यदीदृशम् ॥

athavā yoginām eva kule bhavati dhīmatām etaddhi durlabhataraṃ loke janma yad īdṛśam

अनुवाद

अथवा वह बुद्धिमान योगियों के ही कुल में जन्म लेता है। ऐसा जन्म इस लोक में निश्चय ही और भी दुर्लभ है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह श्लोक दूसरा, बेहतर परिणाम बताता है — सिद्ध योगियों के कुल में सीधे जन्म — और साथ ही यह संकेत करता है कि कृष्ण के बताए दो विकल्पों में यह अधिक दुर्लभ है। श्लोक 43 बताता है कि दोनों में से कोई भी जन्म मूल्यवान क्यों है: वह पिछले प्रयास में से वास्तव में क्या सुरक्षित रखता है। दुर्लभतर — “पाना अधिक कठिन” — योगियों के कुल में जन्म को सर्वोत्तम मार्ग के रूप में चिह्नित करता है: इसमें पुण्य लोकों से होकर जाने वाला घुमावदार रास्ता छूट जाता है और साधक सीधे ऐसे लोगों के बीच लौट आता है जो उसकी सहायता कर सकते हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

athavā yoginām eva kuleअथवा योगिनां एव कुले
अथवा योगियों के ही कुल में (athavā + yoginām + eva + kule)
bhavati dhīmatāmभवति धीमतां
जन्म लेता है, बुद्धिमानों के (bhavati + dhīmatām)
etaddhi durlabhataraṃ loke janmaएतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म
यह निश्चय ही संसार में अधिक दुर्लभ है (etat + hi + durlabhataram + loke)
yad īdṛśamयद् ईदृशं
जो ऐसा जन्म है (janma + yat + īdṛśam)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Krishna could have simply promised the better of the two outcomes and left it at that — instead he names the harder-to-obtain option as exactly that, rare, even while still offering it as real. Reassurance and honesty about difficulty aren’t presented as being in tension here; the verse manages to promise a good outcome without inflating how easily it comes.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप अपने लिए कोई कठिन, ऊँचा लक्ष्य तय करें, तो यह ईमानदारी से मान लेना ठीक है कि सबसे अच्छा परिणाम अधिक दुर्लभ होता है, बजाय इसके कि अभी अच्छा महसूस करने के लिए आप खुद से किसी आसान रूप का वादा कर लें — यथार्थवादी आश्वासन दबाव में बढ़ा-चढ़ाकर दिए गए आश्वासन से बेहतर टिकता है।

व्यावसायिक

  • जब आप अपनी टीम के साथ किसी कठिन, ऊँचे परिणाम को लेकर अपेक्षाएँ तय करें, तो आसान रूप का वादा करने के बजाय अच्छे परिणाम और उससे कठिन, दुर्लभ परिणाम — दोनों को ईमानदारी से सामने रखें — जब कठिनाई को शुरू में ही स्वीकार कर लिया गया हो, तो असफलताओं के बाद भी विश्वसनीयता बेहतर बनी रहती है।

परिवार और समाज

  • जब आप अपने किसी करीबी को किसी मनचाहे परिणाम के बारे में आश्वस्त करें, तो यह ईमानदारी से कहना ठीक है कि सबसे अच्छा रूप अधिक कठिनाई से मिलता है — जो ईमानदार आश्वासन असली संभावनाओं को साफ़ बताता है, उस पर आम तौर पर तसल्ली देने वाली अतिशयोक्ति से ज़्यादा भरोसा किया जाता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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