संस्कृत
यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबन्धनः । तदर्थं कर्म कौन्तेय मुक्तसङ्गः समाचर ॥
yajñārthāt karmaṇo'nyatra loko'yaṃ karmabandhanaḥ tadarthaṃ karma kaunteya muktasaṅgaḥ samācara
अनुवाद
यज्ञ के लिए किए जाने वाले कर्म के अतिरिक्त अन्य कर्मों से यह लोक कर्म के बन्धन में बँधता है। इसलिए हे कौन्तेय, आसक्ति से मुक्त होकर उसी यज्ञ के लिए भली-भाँति कर्म करो।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
इस अध्याय की मुख्य तकनीकी चाल यह है: कर्म स्वभावतः बाँधता है, पर जो कर्म यज्ञ के रूप में — बलिदान, अर्पण के रूप में — किया जाए, वह नहीं बाँधता। यही वह अवधारणा है जिसके नाम पर पूरे प्रवचन का नाम रखा गया है; श्लोक 10-16 इसे एक पौराणिक और ब्रह्माण्ड-सम्बन्धी तर्क से यह समझाते हैं कि अर्पण की भावना से किया गया कर्म स्वार्थ से किए गए कर्म से केवल मात्रा में नहीं, बल्कि स्वरूप में ही भिन्न क्यों है। यज्ञ यहाँ विशेष रूप से अग्नि-अनुष्ठान नहीं है, बल्कि उसका तर्क है: अर्पण के रूप में किया गया ऐसा कार्य, जिसके परिणाम पर कोई निजी दावा न हो। यह संरचना — वही कर्म, पर फल पर कोई पकड़ नहीं — ठीक गीता 2.47 का अनुशासन है, जिसे अब अनुष्ठान से लिया गया एक नाम दे दिया गया है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- yajñārthātयज्ञार्थात्
- यज्ञ के लिए (yajña-arthāt)
- karmaṇo'nyatraकर्मणोऽन्यत्र
- कर्म के अतिरिक्त (karmaṇaḥ + anyatra)
- loko'yaṃलोकोऽयं
- यह लोक (lokaḥ + ayam)
- karmabandhanaḥकर्मबन्धनः
- कर्म से बँधा है (karma-bandhanaḥ)
- tadarthaṃतदर्थं
- उसके लिए
- karmaकर्म
- कर्म
- kaunteyaकौन्तेय
- हे कुन्तीपुत्र
- muktasaṅgaḥमुक्तसङ्गः
- आसक्ति से मुक्त होकर (mukta-saṅgaḥ)
- samācaraसमाचर
- भली-भाँति करो
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
The verse’s structure quietly reverses a common intuition: action isn’t neutral until proven harmful, it’s binding by default unless performed as offering. That “unless” clause puts the burden of proof on the actor to make their action non-binding, rather than assuming ordinary action is innocent until shown otherwise.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
Site Commentary — Second Reading
The same task, done twice, can be binding once and free the next time without changing in any outward way — a parent’s unpaid labor, a maintainer’s unpaid hours on a shared project, a mentor’s unbilled time all look identical whether they’re being kept score of or not. What differs is entirely internal: work performed for reciprocity accumulates a ledger, the same work offered without expecting return doesn’t, even though an observer watching from outside couldn’t tell the two apart. This verse is making a claim about that invisible ledger, not about the visible activity — which is exactly why it can’t be verified by watching someone’s hands.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- यह न मान लें कि आपके रोज़मर्रा के कर्म अपने-आप तटस्थ होते हैं — जिस कर्म को आपने परखा नहीं है, उसे ऐसा मानें कि वह आपको परिणाम और लालसा से बाँधता है, जब तक कि आपने सोच-समझकर यह नए सिरे से तय न किया हो कि आप उसे क्यों कर रहे हैं। किसी कर्म को हल्का बनाने की ज़िम्मेदारी आप पर है, न कि कर्म पर यह सिद्ध करने की कि वह भारी है।
व्यावसायिक
- यह न मान लें कि केवल अपना काम करना अपने-आप स्वार्थ से मुक्त होता है — साधारण काम को स्वभावतः आसक्ति से जुड़ा हुआ मानें, जब तक कि आपने सोच-समझकर उसे अपनी उन्नति से परे किसी उद्देश्य से न जोड़ा हो। यह धारणा कि काम अपने-आप तटस्थ होता है, एक भ्रम है जिसे जाँचना ज़रूरी है।
परिवार और समाज
- यह न मान लें कि परिवार के लोगों की मदद करना अपने-आप निःस्वार्थ होता है — जाँचें कि कहीं आप चुपचाप सच्ची परवाह के बजाय श्रेय पाने के लिए या दायित्व के कारण तो ऐसा नहीं कर रहे। साधारण मददगार कर्म तब तक तटस्थ नहीं है, जब तक आपने सचमुच यह परख न लिया हो कि आप उसे क्यों कर रहे हैं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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विषय
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