3.18

संस्कृत

नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन । न चास्य सर्वभूतेषु कश्चिदर्थव्यपाश्रयः ॥

naiva tasya kṛtenārtho nākṛteneha kaścana na cāsya sarvabhūteṣu kaścid arthavyapāśrayaḥ

अनुवाद

इस संसार में उसके लिए न तो किए गए कर्म से कोई प्रयोजन है, न ही न किए गए कर्म से। समस्त प्राणियों में भी किसी पर उसका कोई प्रयोजन निर्भर नहीं है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

श्लोक 17 का चित्र यहाँ पूर्ण संतुलन के साथ पूरा होता है — किए गए कर्म में कोई स्वार्थ नहीं, न किए गए कर्म में भी कोई नहीं, और किसी भी चीज़ के लिए किसी दूसरे प्राणी पर कोई निर्भरता नहीं। शुद्ध आत्मनिर्भरता के पक्ष को पाठ यहीं तक आगे ले जाता है, फिर श्लोक 19 में दिशा बदलकर यह समझाता है कि फिर भी कर्म क्यों चलता रहता है। अंतिम वाक्यांश सबसे प्रबल है: न अस्य सर्वभूतेषु कश्चिद् अर्थव्यपाश्रयः — कहीं भी एक भी प्राणी ऐसा नहीं जिसकी उसे किसी प्रयोजन के साधन के रूप में आवश्यकता हो। ठीक इसीलिए कि भीतर की ओर कुछ भी देय नहीं है, गीता 3.19 यह माँग कर सकता है कि सब कुछ बाहर की ओर दे दिया जाए।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

naiva tasyaनैव तस्य
उसके लिए बिल्कुल नहीं है (na + eva)
kṛtenārthoकृतेनार्थो
किए गए कर्म से कोई प्रयोजन (kṛtena + arthaḥ)
nākṛteneha kaścanaनाकृतेनेह कश्चन
और न यहाँ न किए गए कर्म से कोई प्रयोजन (na + akṛtena + iha)
na cāsyaन चास्य
और न ही उसका (na + ca + asya)
sarvabhūteṣuसर्वभूतेषु
सब प्राणियों में
kaścidकश्चिद्
कोई भी
arthavyapāśrayaḥअर्थव्यपाश्रयः
प्रयोजन के लिए आश्रय (artha-vyapāśrayaḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The completeness of this portrait — no stake in doing, none in not-doing, no dependence on any being — is what makes verse 19’s “therefore” so strange to read literally. A person with genuinely nothing to gain or lose isn’t being told to act despite that fact; the absence of stakes is being repurposed as the precondition for the one kind of action that’s actually clean.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब किसी परिणाम में सचमुच आपका अपना कुछ भी दाँव पर न हो, तो इसे पीछे हट जाने का कारण न मानें — वास्तव में यही वह स्थिति है जिसमें आप सबसे निर्मल ढंग से कर्म कर सकते हैं, क्योंकि तब आपका निजी स्वार्थ आपके प्रयास को विकृत नहीं करता। इस स्वतंत्रता का उपयोग करें, इसे पीछे हटने में व्यर्थ न गँवाएँ।

व्यावसायिक

  • जब आपको किसी ऐसी परियोजना पर लगाया जाए जिसका आपके अपने कार्य-मूल्यांकन या पदोन्नति से कोई संबंध न हो, तो इसे ढिलाई बरतने की छूट न मानें — ठीक यही वह स्थिति है जिसमें आप स्वार्थ की सबसे कम विकृति के साथ योगदान दे सकते हैं। इस तटस्थता का उपयोग करें, इसे छोड़ न दें।

परिवार और समाज

  • जब परिवार में किसी की सहायता करने से आपको निजी तौर पर कुछ भी न मिलना हो — न बदले की कोई अपेक्षा हो, न श्रेय मिलने की संभावना — तो इसे सच्ची निःस्वार्थ सहायता की सबसे स्पष्ट स्थिति के रूप में पहचानें, न कि उसे टाल देने के कारण के रूप में। कुछ भी दाँव पर न होना एक अवसर है, बहाना नहीं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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