3.41

संस्कृत

तस्मात्त्वमिन्द्रियाण्यादौ नियम्य भरतर्षभ । पाप्मानं प्रजहि ह्येनं ज्ञानविज्ञाननाशनम् ॥

tasmāt tvam indriyāṇy ādau niyamya bharatarṣabha pāpmānaṃ prajahi hy enaṃ jñānavijñānanāśanam

अनुवाद

इसलिए हे भरतश्रेष्ठ, तुम पहले इन्द्रियों को वश में करके ज्ञान और विज्ञान का नाश करने वाले इस पापी को निश्चय ही मार डालो।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

श्लोक 40 के नक्शे से निकलने वाला एक ठोस निर्देश: शुरुआत इन्द्रियों से करें, क्योंकि वे काम के क्षेत्र की सबसे बाहरी और सबसे सुलभ परत हैं। “मार डालो” श्लोक 37 के “शत्रु” वाले युद्ध के रूपक को आगे बढ़ाता है, और पूरे उपदेश की युद्ध की भाषा को जितना बाहर की ओर, उतना ही भीतर की ओर भी मोड़ देता है — और यह इसलिए मायने रखता है कि अर्जुन का वास्तविक संकट एक बाहरी युद्ध को लेकर ही है। आदौ — “पहले, आरम्भ में” — रणनीति का शब्द है: इन्द्रियाँ वह जगह हैं जहाँ व्यक्ति की सचमुच पकड़ होती है, इसलिए अभियान वहीं से शुरू होता है और मन से होते हुए ऊपर बुद्धि तक पहुँचता है। यह लड़ाई हारने पर ज्ञान (जानना) और विज्ञान (अनुभव से सिद्ध ज्ञान) दोनों एक साथ खो जाते हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

tasmāt tvam indriyāṇy ādauतस्मात् त्वं इन्द्रियाण्य् आदौ
इसलिए तुम पहले इन्द्रियों को (tasmāt + tvam + indriyāṇi + ādau)
niyamya bharatarṣabhaनियंय भरतर्षभ
वश में करके, हे भरतश्रेष्ठ (niyamya + bharata-ṛṣabha)
pāpmānaṃ prajahi hy enaṃपाप्मानं प्रजहि ह्य् एनं
इस पापी को निश्चय ही मार डालो (pāpmānam + prajahi + hi + enam)
jñānavijñānanāśanamज्ञानविज्ञाननाशनं
ज्ञान और विज्ञान का नाश करने वाले (jñāna-vijñāna-nāśanam)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

“First” is doing real work in this verse — the instruction isn’t master everything at once, it’s master the senses first, as the accessible entry point into territory that also includes mind and reason, per verse 40. The sequencing matters: the deepest layer of the problem isn’t the place to start just because it’s the real source, precisely because it’s the least reachable one.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • यदि कोई गहरी जड़ें जमा चुकी आदत या भावनात्मक ढर्रा सीधे निपटने के लिए बहुत बड़ा लगे, तो पहले मूल कारण को सुधारने की कोशिश करने के बजाय सबसे सुलभ बाहरी परत से शुरुआत करें — कोई एक विशेष व्यवहार, कोई एक विशेष ट्रिगर; बाहरी परत ही वह जगह है जहाँ वास्तव में पकड़ बनती है।

व्यावसायिक

  • किसी टीम के बिगड़े हुए आपसी तालमेल को सुधारते समय, पहले भीतरी संस्कृति या भरोसे को सीधे सुधारने की कोशिश करने के बजाय दिखाई देने वाले, ठोस व्यवहारों से शुरुआत करें — बैठकों के नियम, बातचीत के तरीके; सुलभ परत ही वह जगह है जहाँ आपको वास्तव में असर डालने की ताकत मिलती है।

परिवार और समाज

  • यदि परिवार के किसी सदस्य के साथ लंबे समय से चला आ रहा तनाव किसी ऐसी चीज़ में जड़ें जमाए लगे जो सीधे सामना करने के लिए बहुत गहरी है, तो आपसी व्यवहार के तरीके में कोई एक ठोस, सुलभ बदलाव करके शुरुआत करें — बाहरी परत ही वह जगह है जहाँ बदलाव की शुरुआत वास्तव में संभव है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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