संस्कृत
प्रकृतेर्गुणसम्मूढाः सज्जन्ते गुणकर्मसु । तानकृत्स्नविदो मन्दान्कृत्स्नविन्न विचालयेत् ॥
prakṛter guṇasammūḍhāḥ sajjante guṇakarmasu tān akṛtsnavido mandān kṛtsnavin na vicālayet
अनुवाद
प्रकृति के गुणों से मोहित लोग गुणों के कर्मों में आसक्त हो जाते हैं। सम्पूर्ण को जानने वाला ज्ञानी उन अधूरा जानने वाले मन्दबुद्धि लोगों को विचलित न करे।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यह श्लोक 26 की मार्गदर्शक सावधानी को दोहराता है, पर अब उसका आधार पहले के लोकसंग्रह वाले तर्क के बजाय अभी-अभी प्रस्तुत गुणों का ढाँचा है — जिनका ज्ञान अधूरा है, उन्हें विचलित न करें। यह एक बार-बार आने वाली थीम है, जो कम आगे बढ़े हुए लोगों के प्रति बौद्धिक धैर्य को स्वयं ज्ञानी व्यक्ति के अनुशासन का अंग मानती है। कृत्स्नवित् (सम्पूर्ण को जानने वाला) और अकृत्स्नवित् (केवल अंश को जानने वाला) की यह जोड़ी इस बात को संरचनात्मक बना देती है: पूरा देखने वाले व्यक्ति पर अंशतः देखने वाले के प्रति संयम रखने का दायित्व है। किसी काम चलाऊ अधूरी समझ को, उसकी जगह पूर्णतर समझ आ सकने से पहले ही, डगमगा देना अहित है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- prakṛter guṇasammūḍhāḥप्रकृतेः गुणसंमूढाः
- प्रकृति के गुणों से मोहित लोग (prakṛteḥ + guṇa-sammūḍhāḥ)
- sajjante guṇakarmasuसज्जन्ते गुणकर्मसु
- गुणों के कर्मों में आसक्त होते हैं (sajjante + guṇa-karmasu)
- tān akṛtsnavido mandānतान् अकृत्स्नविदो मन्दान्
- उन अधूरा जानने वाले मन्दबुद्धि लोगों को (tān + a-kṛtsna-vidaḥ + mandān)
- kṛtsnavin na vicālayetकृत्स्नविन् न विचालयेत्
- पूर्ण ज्ञाता विचलित न करे (kṛtsna-vit + na + vicālayet)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
This is the second time in nine verses the chapter has told the wise not to unsettle the less advanced — first from the lokasangraha argument in verse 26, now from the guna-metaphysics just laid out. The repetition under a different framework isn’t padding; it’s the text betting that a lesson which failed to land as an ethical exhortation might land as metaphysical description instead.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- अगर कोई सलाह एक तरह से कही जाने पर, मान लीजिए एक नैतिक नियम के रूप में, आपके मन में नहीं बैठी, तो उसे दूसरे रूप में फिर से देखें — इस वर्णन के रूप में कि चीज़ें वास्तव में कैसे काम करती हैं। वही सीख दूसरी बार किसी दूसरे दरवाज़े से भीतर उतर सकती है।
व्यावसायिक
- अगर किसी प्रक्रिया में बदलाव को 'सर्वोत्तम तरीका' बताकर रखने पर वह टिका नहीं, तो उसे दोबारा इस आधार पर रखकर देखें कि व्यवस्था जिस तरह व्यवहार करती है, उसके पीछे असली कार्यप्रणाली क्या है। वही निर्देश अक्सर किसी दूसरे ढाँचे में रखने पर अलग ढंग से असर करता है।
परिवार और समाज
- अगर किसी करीबी व्यक्ति को किसी सीमा की याद एक नियम के रूप में दिलाना काम नहीं आया, तो उसके बजाय उसके पीछे का असली कारण समझाकर देखें। कभी-कभी किसी सीख को दूसरी बार अलग ढंग से रखने की ज़रूरत होती है, पहले ढंग को और दोहराने की नहीं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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