3.23

संस्कृत

यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः । मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥

yadi hy ahaṃ na varteyaṃ jātu karmaṇy atandritaḥ mama vartmānuvartante manuṣyāḥ pārtha sarvaśaḥ

अनुवाद

हे पार्थ, यदि मैं कभी भी सावधान होकर कर्म में न लगूँ, तो मनुष्य सब प्रकार से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करेंगे।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह प्रतितथ्यात्मक तर्क आगे बढ़ता है और श्लोक 21 के अनुकरण-सिद्धांत को ब्रह्मांडीय स्तर पर लागू करके दाँव पर लगी बात को स्पष्ट करता है: यदि कृष्ण कर्म से अलग हो जाएँ, तो मानवता भी उनके मार्ग पर चलकर कर्म से अलग हो जाएगी। श्लोक 24 इसे इसके सबसे कठोर निष्कर्ष तक ले जाता है। अतन्द्रित — “अथक, कभी शिथिल नहीं” — चुपचाप बहुत महत्वपूर्ण है: आदर्श केवल यह नहीं कि कृष्ण कर्म करते हैं, बल्कि यह कि वे बिना ढीले पड़े कर्म करते हैं, और अनुकरण करने वाले दोनों ही स्थितियों में यही मानदंड अपनाएँगे। एक अथक उदाहरण गीता 3.16 के चक्र को चलाए रखता है; एक शिथिल पड़ता उदाहरण उसे बिखेर देता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

yadi hy ahaṃ na varteyaṃयदि ह्य् अहं न वर्तेयं
क्योंकि यदि मैं न लगा रहूँ (yadi + hi + aham + na + varteyam)
jātu karmaṇy atandritaḥजातु कर्मण्य् अतन्द्रितः
कभी भी, बिना थके, कर्म में (jātu + karmaṇi + atandritaḥ)
mama vartmānuvartanteमम वर्त्मानुवर्तन्ते
मेरे मार्ग का अनुसरण करते हैं (mama + vartma-anuvartante)
manuṣyāḥ pārtha sarvaśaḥमनुष्याः पार्थ सर्वशः
मनुष्य, हे पार्थ, सब प्रकार से (manuṣyāḥ + pārtha + sarvaśaḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Krishna doesn’t argue his own effort matters because the universe needs the physical outcome of his actions — he argues it matters because of what would happen to everyone watching him. That’s a strange kind of accountability: the stakes of relaxing aren’t private to the person who relaxes, they scale with how many people are calibrating their own effort against yours. The more anyone is watched, the less “just this once” actually costs only them.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आपका मन 'बस इस एक बार' मेहनत में ढील देने को करे, तो याद रखें कि अगर आपके आसपास के लोग आपकी कही बात से नहीं, बल्कि आपके वास्तविक आचरण से सीख लेते हैं, तो इसकी कीमत केवल आपको ही नहीं चुकानी पड़ती — जो ढील किसी को दिखाई नहीं देती, वह अक्सर खुली छूट बनकर सामने आ जाती है।

व्यावसायिक

  • एक वरिष्ठ इंजीनियर या टीम-प्रमुख के रूप में आपकी कोई अनकही आदत — किसी समीक्षा को छोड़ देना, समय-सीमा के दबाव में कोई शॉर्टकट अपना लेना — उन लोगों द्वारा अपना ली जाती है जिन्होंने वह संदर्भ कभी देखा ही नहीं जिसमें वह क्षम्य थी; आपकी टीम आपके घोषित मानक से नहीं, बल्कि आपके वास्तविक व्यवहार से अपना पैमाना तय करती है।

परिवार और समाज

  • अगर आप अपने बच्चों से मेहनत करने को कहते हैं और ख़ुद चुपचाप शॉर्टकट अपनाते हैं, तो यह उम्मीद न रखें कि आपके शब्द असर करेंगे — वे आपके रोज़ के व्यवहार को ही असली सीख मानते हैं, ठीक वैसे ही जैसे यह श्लोक मानकर चलता है कि लोग उपदेश से अधिक आचरण का अनुसरण करते हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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