10.25

संस्कृत

महर्षीणां भृगुरहं गिरामस्म्येकमक्षरम् । यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि स्थावराणां हिमालयः ॥ २५ ॥

maharṣīṇāṃ bhṛgur ahaṃ girām asmy ekam akṣaram yajñānāṃ japayajño'smi sthāvarāṇāṃ himālayaḥ

अनुवाद

महर्षियों में मैं भृगु हूँ और वाणियों में एक अक्षर हूँ। यज्ञों में मैं जपयज्ञ हूँ और अचल वस्तुओं में हिमालय हूँ।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

महर्षियों में भृगु, वाणी में ॐ (“एक अक्षर”), यज्ञों में जप, और स्थावरों में हिमालय। एक अक्षर के रूप में ॐ पर ठहरकर विचार करना उचित है — यह सूची में किसी विशुद्ध प्रतीकात्मक सत्ता को विभूति कहने के सबसे निकट पहुँचता है, और यही सूत्र श्लोक 33 में अक्षर ‘अ’ के साथ फिर उठाया गया है। एकम् अक्षरम् — “एक अक्षर”, ॐ — अब तक की सबसे प्रतीकात्मक प्रविष्टि है, और गीता 10.33 अक्षर ‘अ’ के साथ इसे दोहराता है। दोनों उस बीज-ध्वनि को नाम देते हैं जो समस्त वाणी के मूल में है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

maharṣīṇāṃ bhṛgur ahaṃमहर्षीणां भृगुः अहं
महर्षियों में मैं भृगु हूँ (mahā-ṛṣīṇām + bhṛguḥ + aham)
girām asmy ekam akṣaramगिरां अस्ंय् एकं अक्षरं
वाणियों में मैं एक अक्षर हूँ (girām + asmi + ekam + akṣaram)
yajñānāṃ japayajño'smiयज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि
यज्ञों में मैं जपयज्ञ हूँ (yajñānām + japa-yajñaḥ + asmi)
sthāvarāṇāṃ himālayaḥस्थावराणां हिमालयः
अचल वस्तुओं में हिमालय (sthāvarāṇām + himālayaḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Girām names the entire domain of speech — every word, every spoken teaching, arguably even the Vedas just praised two verses earlier — and Krishna’s answer for what’s best within all of it is a single, near-wordless syllable. The claim quietly outranks language’s most elaborate products with its simplest possible unit, the opposite of where you’d expect the best example of speech to be found.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप अपने किसी काम का सबसे अच्छा रूप खोज रहे हों, तो यह न मान लें कि अधिक विस्तृत होना अपने-आप बेहतर होना है — कभी-कभी किसी अभ्यास की सबसे सरल इकाई उसी चीज़ के पूरी तरह विकसित, भारी-भरकम तैयारी वाले रूप से बेहतर परिणाम देती है।

व्यावसायिक

  • कमरे में रखा गया सबसे परिष्कृत प्रस्ताव हमेशा सबसे प्रभावशाली नहीं होता — कभी-कभी एक सीधा-सादा वाक्य पूरी तरह तैयार की गई प्रस्तुति से अधिक बात पहुँचा देता है, और यह परखना उचित है कि जो विस्तार आप जोड़ने जा रहे हैं, क्या सच में उसकी ज़रूरत है।

परिवार और समाज

  • कभी-कभी सहज भाव से कहा गया एक ही शब्द — 'माफ़ करना', 'मैं तुमसे प्यार करता हूँ' — किसी लंबी, सावधानी से गढ़ी गई व्याख्या से अधिक कह जाता है। आप जो कहना चाहते हैं, उसका विस्तृत रूप गढ़ने से पहले देख लें कि क्या सरल रूप से ही काम नहीं बन जाता।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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