संस्कृत
यच्चापि सर्वभूतानां बीजं तदहमर्जुन । न तदस्ति विना यत्स्यान्मया भूतं चराचरम् ॥ ३९ ॥
yac cāpi sarvabhūtānāṃ bījaṃ tad aham arjuna na tad asti vinā yat syān mayā bhūtaṃ carācaram
अनुवाद
और हे अर्जुन, जो भी सब प्राणियों का बीज है, वह मैं ही हूँ। चर या अचर, ऐसा कोई प्राणी नहीं है जो मेरे बिना रह सके।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यह श्लोक गणना को किसी और श्रेणी का उदाहरण देकर नहीं, बल्कि एक सामान्यीकरण के साथ समाप्त करता है: जो कुछ भी सब प्राणियों का बीज है, वह कृष्ण हैं, और चर या अचर ऐसा कुछ भी नहीं है जो उनसे अलग अस्तित्व रखता हो। यह एक सारांश-कथन का काम करता है, जो उन सब बातों को समेट लेता है जिन्हें श्लोक 21 से आरंभ हुई सूची एक-एक करके गिना नहीं पाई — और यही श्लोक 40 के उस स्पष्ट कथन की ओर ले जाता है कि यह सूची कभी पूरी होने के लिए थी ही नहीं। न तद् अस्ति विना यत् स्यान् मया — “ऐसा कुछ भी नहीं है जो मेरे बिना हो सके” — यह सूची का अपना सर्वसमावेशी कथन है: जिसका नाम नहीं लिया गया, वह सब इसी एक वाक्यांश में आ जाता है। गीता 10.40 इस अपूर्णता को स्पष्ट रूप से कह देता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- yac cāpi sarvabhūtānāṃ bījaṃयच् चापि सर्वभूतानां बीजं
- और जो भी सब प्राणियों का बीज है (yat + ca + api + sarva-bhūtānām + bījam)
- tad aham arjunaतद् अहं अर्जुन
- वह मैं हूँ, हे अर्जुन (tat + aham + arjuna)
- na tad asti vinā yat syānन तद् अस्ति विना यत् स्यान्
- ऐसा कुछ नहीं है जो मेरे बिना हो सके (na + tat + asti + vinā + yat + syāt)
- mayā bhūtaṃ carācaramमया भूतं चराचरं
- कोई भी प्राणी, चर या अचर (mayā + bhūtam + cara-acaram)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Cara-acharam, “moving or unmoving,” quietly collapses a distinction the list has been using as one of its organizing axes throughout: the immovable Himalaya of verse 25 sat in a different bucket than the moving lion or bird of verse 30. This closing verse folds both buckets into a single, undivided claim, dissolving the very category boundary the enumeration had relied on to structure itself.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप अपनी सोच को किसी सीमा-रेखा के इर्द-गिर्द व्यवस्थित करते आए हों — यह गिना जाएगा, वह नहीं — तो ध्यान दें कि कब आप इसके लिए तैयार हैं कि हर नए मामले को ज़बरदस्ती पुराने बँटवारे में वापस ठूँसने के बजाय किसी बड़े सत्य को उस सीमा-रेखा से ऊपर रहने दें।
व्यावसायिक
- जब आपकी टीम द्वारा बनाया गया कोई वर्गीकरण, जैसे यह डेटा स्रोत बनाम वह डेटा स्रोत, अपना उद्देश्य पूरा कर चुका हो, तो उच्चतर स्तर के एकीकृत करने वाले तथ्य को स्पष्ट रूप से कहने के लिए तैयार रहें, बजाय इसके कि केवल इसलिए उस बँटवारे को अनिश्चित काल तक बनाए रखें क्योंकि ये श्रेणियाँ पहले से जानी-पहचानी हैं।
परिवार और समाज
- घर की ज़िम्मेदारियाँ बाँटने के लिए आप जिन पुरानी श्रेणियों का उपयोग करते आए हैं, उन्हें शायद तब मिटा देना उचित हो जब एक अधिक सरल साझा सत्य — कि आप दोनों इसमें साथ हैं — मूल बँटवारे को उतना उपयोगी न रहने दे जितना वह कभी था।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
स्वयं से पूछें
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