10.26

संस्कृत

अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः । गन्धर्वाणां चित्ररथः सिद्धानां कपिलो मुनिः ॥ २६ ॥

aśvatthaḥ sarvavṛkṣāṇāṃ devarṣīṇāṃ ca nāradaḥ gandharvāṇāṃ citrarathaḥ siddhānāṃ kapilo muniḥ

अनुवाद

सब वृक्षों में मैं अश्वत्थ हूँ और देवर्षियों में नारद, गन्धर्वों में चित्ररथ और सिद्धों में कपिल मुनि हूँ।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

नारद यहाँ दिव्य ऋषियों में आते हैं। गीता 10.13 में उनका नाम पहले ही उन प्रमाणों में आ चुका है जिनका हवाला अर्जुन कृष्ण पर भरोसा करने के लिए देता है। यह दोहराव अर्जुन की पहले की गवाही को कृष्ण के अपने आत्म-वर्णन से फिर जोड़ देता है। नारद ऐसे साक्षी भी हैं जिन पर अर्जुन भरोसा करता है, और ऐसा उदाहरण भी जिसे कृष्ण चुनते हैं। अब नारद वह वाहक भी हैं जिनका हवाला अर्जुन ने गीता 10.13 में दिया था, और वह उदाहरण भी जिसे कृष्ण चुनते हैं। वे एक साथ साक्षी भी हैं और विभूति भी। अश्वत्थ वृक्ष गीता 15.1 में फिर आता है, उलटा, सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के रूप में।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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शब्द-दर-शब्द

aśvatthaḥ sarvavṛkṣāṇāṃअश्वत्थः सर्ववृक्षाणां
सब वृक्षों में अश्वत्थ (aśvatthaḥ + sarva-vṛkṣāṇām)
devarṣīṇāṃ ca nāradaḥदेवर्षीणां च नारदः
और देवर्षियों में नारद (deva-ṛṣīṇām + ca + nāradaḥ)
gandharvāṇāṃ citrarathaḥगन्धर्वाणां चित्ररथः
गन्धर्वों में चित्ररथ (gandharvāṇām + citrarathaḥ)
siddhānāṃ kapilo muniḥसिद्धानां कपिलो मुनिः
सिद्धों में कपिल मुनि (siddhānām + kapilaḥ + muniḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The aśvattha named here as merely the best example among trees returns in Chapter 15 as the central image for the whole of manifest existence — an inverted tree with roots above. Chapter 10 plants it as one entry in a list; Chapter 15 pulls it out and makes it carry the entire cosmos. The vibhuti list isn’t only naming best examples, it’s occasionally previewing images the text hasn’t finished with yet.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • ध्यान दें कि कब आपके अपने जीवन में एक बार ज़िक्र हुआ कोई छोटा-सा ब्योरा बाद में चुपचाप लौट आता है और पहली बार जितना लगा था, उससे कहीं अधिक महत्व लेकर आता है — शुरू में आई कोई सामान्य-सी आदत, जगह या वस्तु पर नज़र रखना उचित है, उसे पहली बार सामने आने पर मामूली मानकर टाल देना ठीक नहीं।

व्यावसायिक

  • किसी परियोजना की शुरुआत में केवल सरसरी तौर पर ज़िक्र हुआ कोई टूल या निर्णय कभी-कभी बाद में उसकी संरचना का केंद्र बन जाता है — योजना की चर्चाओं में यूँ ही कही गई बातों पर नज़र रखें, बजाय यह मान लेने के कि पहली बार, हल्के ढंग से किया गया ज़िक्र उस चीज़ को ही छोटा बना देता है।

परिवार और समाज

  • पारिवारिक जीवन में एक बार यूँ ही ज़िक्र हुई कोई छोटी आदत या वस्तु कभी-कभी आगे चलकर सबका साझा केंद्रीय प्रतीक बन जाती है — केवल उस पर ध्यान न दें जो उस क्षण ज़ोर देकर कहा जाता है, बल्कि उस पर भी जो वर्षों में बार-बार लौटकर आता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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